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भारतीय वैज्ञानिकों की रिसर्च: नाक के जरिए दिमाग में पहुंच कर ऐसे नुकसान करता है कोरोना वायरस

Sat, 20 Jun 2020 05:23 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निलेश कुमार Updated Sat, 20 Jun 2020 05:23 PM IST
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covid 19 may infect respiratory centre of brain says latest coronavirus research by csir iicb kolkata
कोरोना वायरस संक्रमण - फोटो : Pixabay/Amar Ujala

कोरोना वायरस को लेकर अबतक हुए शोधों में कई तरह की जानकारियां सामने आ चुकी हैं। इसमें वायरस की प्रकृति, उसके संक्रमण फैलाने के तरीके से लेकर उसके म्यूटेशन यानी रूप बदलने के तरीकों पर कई तरह के शोध हो चुके हैं। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच एक तरफ इसकी दवा को लेकर वैज्ञानिक शोधरत हैं तो दूसरी ओर इसकी वैक्सीन तैयार करने को लेकर दुनियाभर की कई कंपनियां लगी हुई हैं। अब भारतीय वैज्ञानिकों की एक रिसर्च में चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। वैज्ञानिकों के सुझाव माने जाएं तो कोरोना वायरस के कारण मौत के खतरे के बारे में भी पता लगाया जा सकता है। 

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Coronavirus infection - फोटो : Pixabay/Amar Ujala

कोलकाता स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल बायोलॉजी (IICB), कोलकाता के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि कोरोना वायरस दिमाग के उस हिस्से को संक्रमित कर सकता है, जो सांस लेने की क्षमता को नियंत्रित करता है। दिमाग के इस हिस्से को रेस्पिरेट्री सेंटर ऑफ ब्रेन कहते हैं। शोधकर्ताओं का सुझाव है कि नर्वस सिस्टम के इस हिस्से पर नजर रखना चाहिए। ऐसा करने से यह पता चल सकता है कि कोरोना से मौत का खतरा कितना है। 

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Coronavirus - फोटो : Pixabay

ऑलफैक्ट्री बल्ब तक वायरस की पहुंच

  • आईआईसीबी के शोधकर्ताओं का कहना कि कोरोना वायरस नाक से होकर दिमाग की ऑलफैक्ट्री बल्ब तक पहुंच सकता है। यह दिमाग का ऐसा हिस्सा है, जो सांसों की गति यानी लय को कंट्रोल करता है। दिमाग के इस हिस्से के डैमेज होने का मतलब है, कोरोना मरीज की मौत। हालांकि अनुमानत: फिलहाल कम मामलों में ऐसा हो रहा है। 
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कोरोना वायरस - फोटो : पेक्सेल्स
  • शोधकर्ताओं का दावा है कि यह अपने तरह की पहली ऐसी रिसर्च जो कोरोना और दिमाग से मरीज के सांसों का कनेक्शन बताती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोरोना के मरीजों में अन्य अंगों के मुताबिक, फेफड़े सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। वहीं, मरीजों में ब्रेन को भी कोरोना वायरस प्रभावित कर रहा है। शोध टीम में डॉ. प्रेम त्रिपाठी, डॉ. अमित श्रीवास्तव, डॉ. उपासना रे और डॉ. सोनू गांधी शामिल हैं। 
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कोरोना की जांच के लिए नमूना एकत्र करता एक स्वास्थ्य कर्मी(File Photo) - फोटो : PTI

कोरोना का रूट

  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोरोना मरीजों में सेरेब्रोस्पाइनल फ्लुइड और मौत के बाद मस्तिष्क का पोस्टमॉर्टम करके कई बातों का पता लगाया जा सकता है। इससे यह जानकारी सामने आ सकती है कि नाक के जरिए मस्तिस्क में कोरोना किस रास्ते से पहुंचा और कैसे ब्रेन के रेस्पिरेट्री सिस्टम तक को प्रभावित किया। 
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