कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच लोगों को इसकी वैक्सीन का इंतजार है। जो भी लोग अबतक इसके संक्रमण से बचे हुए हैं, वे ऐसे तमाम तरह के उपाय करने को तैयार हैं, जिनसे वे इस वायरस से सुरक्षित रहें। बहुत सारे लोग घरेलू और आयुर्वेदिक उपायों से लेकर होम्योपैथिक और एलोपैथिक दवाओं का भी सेवन कर रहे हैं। विटामिन सी और डी को गोलियों के अलावा कुछ लोग एंटीबायोटिक दवाएं भी ले रहे हैं। एंटीबायोटिक दवा बहुत सारी बीमारियों में कारगर होती है, लेकिन क्या ये कोरोना वायरस के खिलाफ भी सुरक्षा देगी यानी कोविड 19 से बचाने में कारगर साबित होगी? आइए चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों से जानते हैं, ऐसे कई जरूरी शंका-आशंकाओं के बारे में:
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Coronavirus: कोरोना के डर से खा रहे हैं एंटीबायोटिक तो रुकिए, पहले बैक्टीरिया और वायरस का अंतर समझिए
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Virus and Bacteria Difference
- फोटो : Pixabay/Amar Ujala
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
- कोरोना वायरस से बचने के लिए अगर आप भी एंटीबायोटिक दवाएं ले रहे हैं तो यह आपकी भूल साबित हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानतें तो एंटीबायोटिक दवाएं कोरोना वायरस का इलाज नहीं हैं। कोरोना वायरस से बचने के लिए एंटीबायोटिक्स का सहारा लेने से पहले आपको बैक्टीरिया और वायरस के अंतर को समझना होगा। वैसे भी अधिकतर एंटीबायोटिक दवाएं वायरस जनित रोगों का इलाज नहीं होती।
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बैक्टीरिया यानी जीवाणु और वायरस मतलब विषाणु
- आपने गुड बैक्टीरिया और बैड बैक्टीरिया के बारे में सुना होगा! नहीं सुना तो सबसे पहले आपको यह समझना जरूरी है कि बैक्टीरिया अच्छे और बुरे दोनों हो सकते हैं, जैसे हमारी आदतें। दरअसल, बैक्टीरिया हमारे शरीर का हिस्सा होते हैं। आंतों में होने वाले बैक्टीरिया खाना पचाने में मदद करते हैं। वहीं, बुरे बैक्टीरिया हमें टीबी, निमोनिया जैसी बीमारियां दे सकते हैं। अब वायरस यानी विषाणु के बारे में सबसे पहले यह जान लीजिए कि इसमें गुड या बैड नहीं होता। यह हमेशा बुरा ही होता है।
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दोनों में अंतर को ऐसे समझिए
- बिहार के भागलपुर स्थित जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय और अस्पताल के डॉ. गौरव के मुताबिक, बैक्टीरिया अन्य जीवों के अंदर पाए जाने वाले कोशिकीय सूक्ष्म जीव होते हैं। इनकी संख्या लाखों में होती है। वहीं विषाणु एक अकोशिकीय सूक्ष्म जीव है, जो किसी जीवित कोशिका के संपर्क में आने पर जीवित होता है। दोनों में यह एक बड़ा अंतर है। बैक्टीरिया कभी सुप्तावस्था में नहीं रहते हैं, जबकि वायरस यदि किसी जीवित कोशिका के संपर्क में नहीं हैं तो वे सैकड़ों साल तक सुप्त अवस्था में रह सकते हैं।
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एंटीबैक्टीरियल बीमारियों में काम आती हैं एंटीबायोटिक दवाएं
- बिहार में कई जिलों में चिकित्सा पदाधिकारी रह चुके डॉ. केके सिंह बताते हैं कि एंटीबायोटिक दवाएं निमोनिया, टीबी, जख्म जैसी बैक्टीरियल बीमारियों के इलाज में काम आती हैं। इन दवाओं को एंटी-बैक्टीरियल भी कहा जाता है, यानी बैक्टीरिया का दुश्मन। दरअसल बैक्टीरिया की पहचान करने के बाद ही एंटीबायोटिक दवाएं बनाई जाती हैं। लेकिन वायरस के लिए एंटीवायरल दवाओं की जरूरत होती है। वायरस की पहचान करना और पकड़ना आसान नहीं होता। इसलिए दवाएं तैयार होने में यह बड़ी चुनौती होती है। पोलियो की वैक्सीन तैयार होने में दशकों लग गए।