दुनियाभर में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच अलग-अलग देशों में कई रिसर्च हो रही हैं। भारतीय वैज्ञानिक समेत दुनियाभर के शोधकर्ता और विशेषज्ञ कोरोना के लक्षणों, इसकी संरचना, प्रभाव, इलाज, दवा, वैक्सीन आदि को लेकर शोधरत हैं। शुरुआत से ही कई शोधों के आधार पर यह बात बताई जा चुकी है कि कमजोर इम्यूनिटी वालों को कोरोना का ज्यादा खतरा रहता है। इसके अलावा बुजुर्गों या पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। लेकिन क्या कोरोना संक्रमण का ब्लड ग्रुप से भी गहरा संबंध है? बीते मार्च में इसको लेकर चीन के हुबेई प्रांत के झोंगनान अस्पताल में एक रिसर्च स्टडी की गई थी। अब एक बार फिर जर्मनी की कील यूनिवर्सिटी ने इस संबंध में अध्ययन किया है, जिसके परिणाम पूर्व में हुई स्टडी से मिलते हैं।
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किस ब्लड ग्रुप के लोगों को कोरोना वायरस का ज्यादा खतरा, किसे कम? रिसर्च में फिर खुलासा
Sun, 07 Jun 2020 01:30 PM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Sun, 07 Jun 2020 01:30 PM IST
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Coronavirus effects Blood Group
- फोटो : Pexels
Blood Group
- फोटो : Pixabay
जर्मनी की कील यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में बताया है कि किस ब्लड ग्रुप के लोगों को कोरोना संक्रमण का ज्यादा खतरा है और किस ग्रुप के लोगों को इसका कम खतरा है। उन्होंने डीएनए के एक खास हिस्से को कोरोना संक्रमण से जोड़ते हुए अध्ययन किया है। बताया है कि ज्यादा जोखिम वाले ब्लड ग्रुप के मरीजों को सांस लेने में तकलीफ बढ़ सकती है और वेंटिलेटर की भी जरूरत पड़ सकती है।
blood test
- फोटो : Pixabay
शोधकर्ताओं का दावा
- कील यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का दावा है कि ए ब्लड ग्रुप (Blood Group A type) वाले लोगों को कोरोना संक्रमण का ज्यादा खतरा रहता है। ऐसे लोगों में संक्रमण का स्तर गंभीर हो सकता है और उन्हें वेंटिलेटर तक की जरूरत पड़ सकती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, अन्य ब्लड ग्रुप वालों की अपेक्षा ए ब्लड ग्रुप वालों को संक्रमित होने का खतरा छह फीसदी तक ज्यादा है।
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ब्लड टेस्ट
- फोटो : Pixabay
ए ब्लड गुप वालों को खतरा
- शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि ए ब्लड ग्रुप वाले कोरोना पीड़ितों में डीएनए का एक खास हिस्सा ऐसा है, जो ज्यादा जोखिम का कारक हो सकता है। रिसर्च के दौरान इसकी पुष्टि हुई है। इससे पहले चीन के वुहान में हुई रिसर्च स्टडी में भी पता चला था कि जिन लोगों का ब्लड ग्रुप ए है, उन्हें कोरोना के संक्रमण का ज्यादा खतरा है।
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Ventilator
- फोटो : Social Media
वेंटिलेटर की जरूरत
- शोधकर्ताओं का कहना है कि ए ब्लड ग्रुप वाले कोरोना मरीजों में 50 फीसदी तक संभावना है कि उन्हें सांस लेने में ज्यादा तकलीफ हो सकती है। उन्हें ऑक्सीजन की ज्यादा जरूरत पड़ सकती है या फिर उन्हें वेंटिलेटर पर भी रखना पड़ सकता है। ब्लड ग्रुप एक ऐसा फैक्टर है, जो कि बुजुर्गों के प्रति युवाओं को कम खतरा होने के समीकरण को प्रभावित करता है।