देश इन दिनों वायरल संक्रमण की दोहरी मार झेल रहा है। कोरोना के कारण बढ़ती चिंता के साथ कई राज्यों में H3N3 इंफ्लुएंजा के कारण भी स्थिति बिगड़ती हुई देखी जा रही है। गंभीर बात यह है कि फ्लू संक्रमण का यह रूप कई लोगों में गंभीर रोगों का कारण भी बन रहा है।
Alert: देश झेल रहा है वायरल संक्रमण की दोहरी मार, कई राज्यों में कोविड-इन्फ्लुएंजा के कारण अस्पतालों में भीड़
H3N2 इन्फ्लूएंजा की टेस्टिंग बढ़ी
H3N2, इन्फ्लूएंजा वायरस का ही एक प्रकार है जो गंभीर श्वसन संबंधी बीमारियों का कारण बन सकता है। विशेष रूप से बुजुर्गों और छोटे बच्चों में इसका प्रकोप और गंभीर रोग के मामले अधिक रिपोर्ट हो रहे हैं।
अमर उजाला से बातचीत में एक निजी अस्पताल में डायग्नोस्टिक विभाग के चिकित्सक बताते हैं, कोरोना और फ्लू दोनों को लेकर लोगों में डर देखा जा रहा है। यही कारण है कि ऐसे बहुत से लोग इन्फ्लुएंजा के लिए परीक्षण करा रहे हैं, जो पहले वायरल संक्रमण में टेस्टिंग की जरूरत नहीं समझते थे। इन्फ्लुएंजा सहित कुछ अन्य वायरल परीक्षणों में पिछले एक महीने में काफी बढ़ोतरी आई है।
कोरोना के मामलों में भी उछाल
इन्फ्लूएंजा के साथ-साथ चूंकि इन दोनों कोरोना के नए वैरिएंट के कारण कोविड-19 के मामलों में भी बढ़ोतरी आई है, लिहाजा हल्के सर्दी-जुकाम होने पर भी लोग परीक्षण के लिए आ रहे हैं। कोविड-19 के परीक्षण में अधिकतर लोगों में एसिम्टोमैटिक लक्षण या फिर हल्के लक्षण ही देखे जा रहे हैं, इसका कारण शायद देश में बढ़ी वैक्सीनेशन की दर है।
फिलहाल दो महीने पहले की तुलना में देखें तो इन दिनों कोरोना और फ्लू दोनों की न सिर्फ जांच बढ़ी है साथ ही मामले भी अधिक रिपोर्ट हो रहे हैं।
महाराष्ट्र में बढ़े फ्लू के रोगी
गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी की गई एक विज्ञप्ति से पता चला कि राज्य में 1 जनवरी से 28 मार्च तक इन्फ्लूएंजा के 3,53,116 संदिग्ध मामलों की सूचना मिली। उनमें से, 2018 लोगों का एंटीवायरल दवा (जिसका उपयोग इन्फ्लूएंजा ए और इन्फ्लूएंजा बी वायरस के इलाज और रोकथाम के लिए किया जाता है) के साथ उपचार किया गया।
H3N2 के साथ-साथ H1N1 के भी मामले बढ़ रहे हैं, संक्रमित रोगियों की संख्या क्रमशः 341 और 442 है। एच1एन1 संक्रमण से तीन जबकि एच3एन2 से पांच लोगों की मौत की भी खबर है।
दोनों संक्रमणों से बचाव के करें उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, H3N3 इंफ्लुएंजा और कोविड-19 के लक्षणों में अंतर करना बहुत आवश्यक है, दोनों के ज्यादातर लक्षण एक जैसे ही देखे जा रह हैं। चूंकि दोनों ही श्वसन संक्रमण हैं, ऐसे में बचाव के लिए निरंतर सतर्कता जरूरी है। मास्क पहनना, सोशल डिस्टेंसिंग और हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखकर कोरोना और फ्लू दोनों के ही खतरे से बचाव किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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