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अमर उजाला फाउंडेशन की पहल: विशेषज्ञों से जानिए कोवैक्सीन या कोविशील्ड, कौन सी वैक्सीन लगवाएं?

Mon, 07 Jun 2021 07:10 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Mon, 07 Jun 2021 07:10 PM IST
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कोविशील्ड और कोवाक्सिन वैक्सीन - फोटो : Social media
Medically Reviewed by-

डॉ विनी कंतरू
प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर स्पूतनिक वी

डॉ अमरिंदर सिंह मल्ही
असिस्टेंट प्रोफेसर, दिल्ली एम्स


कोरोना से सुरक्षा के लिए विशेषज्ञ वैक्सीनेशन को सबसे प्रभावी उपाय के रूप में देख रहे हैं। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने संबोधन में वैक्सीनेशन अभियान को और तेज करने पर जोर दिया है। भारत में कोरोना की फिलहाल तीन वैक्सीन- कोविशील्ड, कोवैक्सीन और रूस द्वारा निर्मित स्पूतनिक उपलब्ध है। देश में 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों का वैक्सीनेशन किया जा रहा है। वैक्सीनेशन अभियान के बीच लोगों के मन में अब भी टीकों को लेकर कई तरह के भ्रम का माहौल है। कुछ लोगों का मानना है कि कोवैक्सीन ज्यादा असरदार है जबकि कुछ लोग कोविशील्ड को ज्यादा प्रभावी मान रहे हैं।
अमर उजाला फाउंडेशन की पहल के माध्यम से कोरोना महामारी को लेकर सोमवार को हुई चर्चा में हमने विशेषज्ञों से इसी बारे में जानने की कोशिश की। इस दौरान डॉ विनी कंतरू (प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर स्पूतनिक वी) और डॉ अमरिंदर सिंह मल्ही (असिस्टेंट प्रोफेसर, दिल्ली एम्स) ने सभी सवालों के जवाब दिए।
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जानिए कोवैक्सीन कैसे काम करती है? - फोटो : Social media
कोविशील्ड और कोवैक्सीन
डॉ अमरिंदर सिंह बताते हैं कि देश में फिलहाल कोविशील्ड और कोवैक्सीन को ही सबसे ज्यादा प्रयोग में लाया जा रहा है। कोवैक्सीन को निष्क्रीय वायरस की तकनीक से बनाया गया है जबकि कोविशील्ड में वायरस के स्पाइक प्रोटीन को प्रयोग में लाया जाता है। यह दोनों वैक्सीन शरीर को संक्रमण की स्थिति में वायरस के गंभीर प्रभाव से सुरक्षा देती हैं। इसके अलावा दोनों ही वैक्सीन शरीर में पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडीज के निर्माण में मदद करती हैं जिससे भविष्य में संक्रमण का असर बहुत अधिक न होने पाए।
 
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कोरोना वैक्सीन लगवाना ज्यादा जरूरी - फोटो : PTI
दोनों वैक्सीनों की प्रभाविकता
डॉ अमरिंदर सिंह बताते हैं कि दोनों ही वैक्सीन की दूसरी डोज लग जाने के करीब दो हफ्ते बाद शरीर में पर्याप्त  मात्रा में एंटीबॉडीज देखने को मिली हैं। हालांकि कुछ अध्ययनों में बताया गया है कि वैक्सीन की एक डोज के बाद भी शरीर में एंटीबॉडीज का निर्माण हो जाता है, जो संक्रमण से सुरक्षा दे सकती हैं। अध्ययनों में कोवैक्सीन की प्रभाविकता 81 फीसदी और कोविशील्ड की प्रभाविकता 78-90 फीसदी तक बताई गई है, हालांकि लोगों में इसका असर अलग-अलग हो सकती है।
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भारत में मौजूद दोनों वैक्सीन हैं असरदार - फोटो : iStock
कौन सी वैक्सीन है सबसे कारगर?
इस सवाल के जवाब में डॉ विनी बताती हैं कि कौन सी वैक्सीन ज्यादा कारगर है, इस पर ध्यान देने से ज्यादा जो वैक्सीन मिले उसे लगवाने पर जोर देना चाहिए। वैक्सीन की प्रभाविकता पर हुए अध्ययनों का आंकड़ा देखें तो 70-80 फीसदी का औसत दोनों में ही देखने को मिल रहा है। इस औसत को काफी अच्छा माना जा सकता है। किसी भी बीमारी में वैक्सीन की प्रभाविकता 100 फीसदी नहीं हो सकती है, क्योंकि हम प्रकृति को चैलेंज नहीं कर सकते हैं।
 
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सभी लोग लगवाएं कोरोना का टीका - फोटो : PTI
डॉ विनी बताती हैं कि फिलहाल कोई ऐसी स्टडी नहीं है जिसमें वैक्सीनों का हेड टू हेड ट्रायल किया गया हो। यह भविष्य की बातें हैं, फिलहाल सभी के लिए वैक्सीन लेना सबसे जरूरी है। जो भी वैक्सीन मिले उसे लगवाएं। ध्यान रहे वैक्सीनेशन के बाद 100 फीसदी गारंटी नहीं है कि आपको दोबारा संक्रमण नहीं होगा, इसलिए कोविड-19 से बचाव के उपाय को प्रयोग में लाते रहें।

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नोट: यह लेख डॉ विनी कंतरू (प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर स्पूतनिक वी) और डॉ अमरिंदर सिंह मल्ही (असिस्टेंट प्रोफेसर, दिल्ली एम्स) से एक बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। दोनों ही डॉक्टर लगातार कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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