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बड़ा सवाल: क्या वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों को भी हो सकता है लॉन्ग कोविड? यहां जानिए विस्तार से

Fri, 23 Jul 2021 08:56 AM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Fri, 23 Jul 2021 08:56 AM IST
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लॉन्ग कोविड की समस्याएं (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

दुनियाभर में पिछले डेढ़ साल से ज्यादा वक्त से जारी कोरोना का प्रकोप कई देशों में एक बार फिर से बढ़ने लगा है। डेल्टा वैरिएंट के कारण आई कोरोना की दूसरी लहर में लोगों को तमाम तरह का जटिलताओं का सामना करना पड़ा, अब तीसरे लहर की आशंका स्वास्थ्य संगठनों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। तीसरी लहर की डर के साथ, कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में लॉन्ग कोविड की तरह-तरह का समस्याएं स्वास्थ्य विभाग पर अतिरिक्त दबाव डाले हुए हैं। वैसे तो कई अध्ययनों में कोविड वैक्सीन को कोरोना की जटिलताओं को कम करने में काफी फायदेमंद माना जा रहा है, ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि क्या जिन लोगों ने वैक्सीन की दोनों डोज ले ली हैं, उन्हें  लॉन्ग कोविड की दिक्कतों से मुक्त माना जा सकता है?


कोविड से हल्के या एसिम्टोमैटिक रोगियों में भी लॉन्ग कोविड की जटिलताएं देखी जा रही हैं। आइए इस लेख में जानने की कोशिश करते हैं कि जिन लोगों ने वैक्सीन लगवा ली है, अगर उन्हें कोरोना का संक्रमण हो जाता है तो क्या ऐसे लोगों में भी लॉन्ग कोविड की समस्याओं का खतरा हो सकता है?

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लॉन्ग कोविड में हो सकती हैं कई तरह की समस्याएं - फोटो : iStock

लॉन्ग कोविड का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुतबिक कोविड संक्रमण से ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक बनी रहनी वाली शारीरिक जटिलताओं को लॉन्ग कोविड के रूप में जाना जाता है। संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में इसके लक्षण भिन्न-भिन्न हो सकते हैं। सामान्यतौर पर लॉन्ग कोविड के रूप में लोगों को खांसी, सांस फूलने, सीने में दर्द, पाचन संबंधी बीमारियां, कमजोरी, थकान, चिंता और अनिद्रा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हाल ही में एक अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने बताया है कि लॉन्ग कोविड के लक्षण 200 से भी अधिक हो सकते हैं।
यूएस सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार लॉन्ग कोविड की समस्या किसी को भी हो सकती है, चाहे उसमें कोविड-19 के हल्के लक्षण रहे हों या कोई भी लक्षण न रहे हों।

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वैक्सीन और लॉन्ग कोविड का खतरा - फोटो : iStock

क्या वैक्सीन से कम हो सकती हैं लॉन्ग कोविड की जटिलताएं
डॉक्टरों का कहना है कि वैक्सीन, कोरोना संक्रमण के जोखिम को काफी कम कर देते हैं। वैक्सीन लगवाने के बाद भी यदि आपको संक्रमण हो जाता है तो इसमें गंभीर संक्रमण और इससे होने वाली मौत का जोखिम बेहद कम रहता है। ये तो रही कोरोना संक्रमण के खतरे की बात, अब जानते हैं कि क्या वैक्सीन लॉन्ग कोविड जटिलताओं को भी कम कर सकती है?
इस संबंध में हुए कई अध्ययनों में वैज्ञानिकों का मानना है कि कोविड वैक्सीन, कोरोना संक्रमण का अवधि और इससे होने वाली दीर्घकालिक जटिलताओं की आशंका को कम करने में सहायक हो सकती है। जिन लोगों ने वैक्सीन की दोनों डोज ले ली हैं, उनमें कोरोना के दीर्घकालिक जोखिमों का खतरा कम माना जा सकता है, हालांकि आने वाले महीनों में इसके व्यावहारिक रूप से प्रमाण देखने को मिल सकते हैं।

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लॉन्ग कोविड के हो सकते हैं तमाम जोखिम कारक - फोटो : iStock

लॉन्ग कोविड के कारकों को कम कर देती है वैक्सीन
डॉक्टरों का कहना है कि कोविड वैक्सीन संक्रमण के लक्षण और वायरल लोड को कम करने में सहायक हैं, जिन्हें लॉन्ग कोविड का कारक माना जाता है। हालांकि कई अन्य कारक भी कोविड-19 की दीर्घकालिक जटिलताओं को उत्पन्न कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार उम्र, लिंग के शरीर में मौजूद पहले से कई बीमारियां लॉन्ग कोविड के जोखिम को बढ़ा देती हैं। 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग, मोटापा, कमजोर प्रतिरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी कई अन्य समस्याएं लॉन्ग कोविड का कारण बन सकती हैं, इस बारे में भी सावधान रहने की आवश्यकता है।

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लॉन्ग कोविड में हो सकते हैं वैक्सीनेशन के फायदे - फोटो : Pixabay

अध्ययनों में देखे गए हैं लाभ
कोरोना संक्रमण को लेकर हाल में हुए कई अध्ययनों में वैक्सीन को लॉन्ग कोविड में भी फायदेमंद पाया गया है। इस संबंध में वैज्ञानिकों ने कोरोना के ऐसे 66 रोगियों पर अध्ययन किया गया जो संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती रह चुके थे। इनमें से 44 ने टीकाकरण करा लिया था जबकि 22 का टीकाकरण नहीं हुआ था। अध्ययन की समीक्षा में शोधकर्ताओं ने वैक्सीन ले चुके लोगों में लॉन्ग कोविड के लक्षणों में कमी और तेजी से सुधार देखा। इस आधार पर कोरोना की वैक्सीन को लॉन्ग कोविड में भी फायदेमंद माना जा रहा है।

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नोट: यह लेख विशेषज्ञों की सलाह और अध्ययनों से प्राप्त साक्ष्य के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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