कोरोना वायरस महामारी की वजह से लगभग पूरी दुनिया थम सी गई। लोग संक्रमित होने लगे और साथ ही इस वायरस ने लोगों की जान भी ली। ऐसा नहीं कि अभी ये वायरस चला गया, बल्कि भारत में तो इसकी तीसरी लहर आने की आशंका विशेषज्ञ पहले ही जता चुके हैं। इन सबके बीच वायरस के कई रूप अब तक सामने आ चुके हैं, जो बेहद घातक हैं। लेकिन हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल क्लीवलैंड मेडिकल सेंटर और केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक रिसर्च की है, जिसमें एक बीमारी का दावा किया गया है। इस रिसर्च में बताया गया है कि कोरोना वायरस के मरीजों के चेहरे पर लकवा होने का खतरा 7 गुना ज्यादा होता है, जिसे मेडिकल की भाषा में बेल्स पॉल्सी कहा जाता है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में अगली स्लाइड्स में...
कोरोना मरीज रहें सतर्क: बढ़ रहा बेल्स पॉल्सी का खतरा, ये तीन तरह के लोग बरतें अधिक सावधानी
क्या है बेल्स पॉल्सी?
- दरअसल, बेल्स पॉल्सी मांसपेशियों और पैरालिसिस से जुड़ी एक बीमारी है, जिसका सीधा असर मरीज के चेहरे पर दिखाई देता है। इसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि ये मरीज के चेहरे पर लकवा मारना भी कहा जाता है। ये एक अस्थाई लकवा है जो चेहरे की मांसपेशियों के कमजोर होने के कारण होता है।
ये हैं इसे लक्षण:-
-एक तरफ के गाल का न फूल पाना
-चेहरे का लटक जाना
-सीधे स्माइल न कर पाना
-गालों को फुलाने में परेशानी होना
-पलकों का हमेशा झुका रहना।
क्या लकवे से बचने के लिए वैक्सीन जरूरी?
- अध्ययन की मानें, तो एक लाख कोरोना मरीजों में से 82 मामले ऐसे हैं, जो बेल्स पॉल्सी के हैं। जबकि एक लाख वैक्सीन ले चुके लोगों में से सिर्फ 19 लोग ही बेल्स पॉल्सी के शिकार हुए हैं। ऐसे में वैज्ञानिकों का कहना है कि बेल्स पॉल्सी यानी इस तरह के लकवे से बचने के लिए भी कोरोना की वैक्सीन जरूरी है।
इन 3 तरह के लोगों को ज्यादा खतरा:-
1. जो लोग हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं
2. जो लोग डायबिटीज की बीमारी से ग्रसित हैं
3. जो लोग किसी प्रकार के गंभीर घाव से पीड़ित हैं।