बीते साल दिसंबर में चीन से निकला कोरोना वायरस अब दुनिया के ज्यादातर देशों को अपनी चपेट में ले चुका है। ये घातक वायरस दुनिया भर में करीब दो लाख से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है और इसका कहर रुकने का नाम नहीं ले रहा है। पूरे विश्व के डॉक्टर, वैज्ञानिक आज इस एक वायरस को रोकने कोशिश में हैं, लेकिन टीके के अभाव में उनके लिए भी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
कोरोना वायरस से लड़ने में प्लाज्मा थेरेपी की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है?
कहां कहां इस्तेमाल हो रहा है प्लाज्मा थेरेपी का?
भारत की राजधानी दिल्ली में प्रदेश सरकार ने कोविड-19 से बीमार छह लोगों को प्लाज्मा थेरेपी देना शुरु किया और उनमें से चार मामलों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। कर्नाटक ने भी इसी सप्ताह प्लाज्मा थेरेपी का क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया है। बिहार सरकार भी पटना एम्स में इसका ट्रायल करना चाहती है।
देश में सबसे पहले प्लाज्मा थेरेपी की बात करने वाले केरल में भी जल्द ही इस दिशा में काम शुरु करने वाला है। देश के अलग-अलग राज्यों से 30 से अधिक अस्पतालों ने इसकी इजाजत मांगी है। ब्रिटेन की सरकार ने बीते शनिवार को स्पष्ट किया है कि जो लोग कोविड-19 से गंभीर रूप से बीमार हैं उन पर प्लाज्मा थेरेपी दी जा रही है।
सरकार का कहना है कि वो क्लिनिकल ट्रायल शुरु कर रहे हैं और लोगों से प्लाज्मा लेने की कोशिश बढ़ाएंगे ताकि हर सप्ताह कम से कम 5,000 तक मरीजों का इलाज किया जा सके। अमेरिकी फूड एंड ड्रग एमिनिस्ट्रेशन ने कोविड-19 से ठीक हुए लोगों को प्लाज्मा दान करने की गुजारिश की है ताकि दूसरों के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सके।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इबोला वायरस से मुक़ाबले के लिए कॉन्वालेसंट प्लाज्मा का इस्तेमाल किया गया था। चीन, जहां से कोरोना वायरस दुनिया भर में चलना शुरु हुआ था उसने भी प्लाज्मा थेरपी का इस्तेमाल कर सफलता पाई है। चीन में फरवरी की शुरुआत से ही इस थेरपी पर काम करना शुरु कर दिया था।
चीनी राष्ट्रीय स्वास्थ्य कमीशन के एक अधिकारी गुओ यानहोंग ने फरवरी के आखिर में इसके प्रयोग के बारे में कहा था कि अब तक ये सुरक्षित और कारगर साबित हुई है। तो क्या कोरोना के बढ़ते कदम रोकने में कॉन्वालेसंट प्लाज्मा थेरेपी को बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है?
दिल्ली में कोरोना पैनल के चीफ और आईएलबीएस अस्पताल के डॉक्टर एसके सरीन कहते हैं कि "आपको समझना होगा कि टीका और प्लाज्मा थेरेपी दो अलग-अलग चीजें हैं। प्लाज्मा थेरेपी से इलाज तो हो रहा है लेकिन लंबे वक्त के लिए हमें कोरोना से बचने के लिए टीके की जरूरत होगी।"
वो कहते हैं, "टीका एक तरह का प्रीवेन्टिव कदम है जिसकी जरूरत हर व्यक्ति को पड़गी। जिन्हें टीका नहीं मिलेगा उन्हें कोरोना संक्रमण हो सकता है और ऐसे में उन्हें इलाज की जरूरत पड़ेगी। उनके इलाज में प्लाज्मा थेरेपी काम में आती है।"
जिन लोगों को कोरोना वायरस के कारण कोविड-19 बीमारी होती है, उनमें पहले स्टेज में वायरस फैलना शुरु होता है। इसके बाद दूसरे स्टेज में ये फेफड़ों में कॉम्प्लिकेशन पैदा करता है। और तीसरे स्टेज में इस कारण ऑर्गेन फेल होने लगते हैं।
डॉक्टर सरीन कहते हैं कि संक्रमण के दूसरे स्टेज की शुरुआत में अगर प्लाज्मा थेरेपी दी जाए तो मरीज के बचने की उम्मीद रहती है लेकिन टीके की जगह ये नहीं ले सकता। वो कहते हैं कि ये नया वायरस है, इसके टीके पर काम कई जगहों पर चल रहा है लेकिन तब तक इंतजार करना होगा। कोविड-19 के इलाज के लिए अभी तक एंटी-वायरल ड्रग नहीं हैं। ऐसे में जब तक इसके लिए एंटी-वायरल नहीं मिल जाता तब तक उम्मीद की हलकी किरण प्लाज्मा थेरेपी ही है।
डॉक्टर सरीन मानते हैं कि जब तक कोरोना वायरस का इलाज नहीं मिलता बड़े पैमाने पर इस थेरेपी का इस्तेमाल किया जा सकता है। वो कहते हैं कि इसके लिए प्लाज्मा डोनर को आगे आना चाहिए और लोग इसके लिए कई बार खून दे सकते हैं क्योंकि इससे व्यक्ति में कमजोरी नहीं आती।