भारत के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा है कि अगले साल की जनवरी से लोगों को कोविड-19 की वैक्सीन दी जाने की शुरुआत की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार की पहली प्रथमिकता ये सुनिश्चित करना है कि वैक्सीन सुरक्षित और कारगर है। समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि 'मुझे लगता है कि जनवरी में वो वक्त आ सकता है जब हम आम लोगों को कोरोना वैक्सीन देने की स्थिति में होंगे।'
Coronavirus Vaccine: भारत में बन रहीं उन नौ वैक्सीन के बारे में जानें सबकुछ, क्या कोरोना को कर पाएंगे खत्म?
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डॉ. हर्षवर्धन ने शनिवार को कहा कि देश में स्वदेशी वैक्सीन पर भी काम जारी है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले छह से सात महीनों में हम देश के 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन की डोज दे पाएंगे। कोविड-19 पर उच्च स्तरीय मंत्रियों के समूह (जीओएम) की 22वीं बैठक में उन्होंने कहा, 'हमारे वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य जानकारों ने इस वायरस को अलग किया और इसकी जीनोम सीक्वेंसिंग की और इसके बाद वो इसकी स्वदेशी वैक्सीन बनाने पर काम कर रहे हैं। आने वाले छह से सात महीनों में हमारे पास 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन देने की क्षमता होगी।'
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश में फिलहाल नौ कोरोना वैक्सीन बन रही हैं जो क्लीनिकल ट्रायल के अलग-अलग स्तर पर हैं। इनमें से छह के क्लीनिकल ट्रायल जारी हैं जबकि तीन फिलहाल प्री-क्लीनिकल ट्रायल के स्तर पर हैं।
कोविशील्ड
- ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की बनाई इस वैक्सीन का एस्ट्राजेनेका बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रही है। चिंपांजी एडेनोवायरस प्लेटफॉर्म पर बनाए जाने वाली इस वैक्सीन के लिए पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट इसका भारतीय पार्टनर है। इसके दूसरे और तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल जारी हैं और इसके इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए सरकार से इजाजत मांगी गई है।
कोवैक्सीन
- ये मृत वायरस के इस्तेमाल से बनने वाली वैक्सीन है, जिसे हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक बना रही है। आईसीएमआर के सहयोग से इसके तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल जारी हैं और इसके इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए सरकार से इजाजत मांगी गई है।
जाइकोव-डी (ZyCoV-D)
- कैडिला हेल्थकेयर की ये वैक्सीन डीएनए प्लेटफॉर्म पर बनाई जा रही है। इसके लिए कैडिला ने बायोटेकनोलॉजी विभाग के साथ सहयोग किया है। इसके तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल जारी हैं।