रूस ने कोरोना के अपने टीके को लेकर उठी अंतरराष्ट्रीय चिंताओं को खारिज करते हुए इसे 'बिल्कुल बेबुनियाद' बताया है। रूस ने मंगलवार को दावा किया था कि उसने अपने यहां एक टीका बना लिया है, जिसका इंसानों पर लगभग दो महीने परीक्षण किया गया और फिर इसे मंजूरी दे दी गई। लेकिन जानकारों ने रूस के इतनी तेजी से टीका बना लेने के दावे पर संदेह जताया। जर्मनी, फ्रांस, स्पेन और अमेरिका में वैज्ञानिकों ने इसे लेकर सतर्क रहने के लिए कहा। इसके बाद रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को ने बुधवार को रूसी समाचार एजेंसी इंटरफैक्स से कहा, 'ऐसा लगता है जैसे हमारे विदेशी साथियों को रूसी दवा के प्रतियोगिता में आगे रहने के फायदे का अंदाजा हो गया है और वो ऐसी बातें कर रहे हैं जो कि बिल्कुल ही बेबुनियाद हैं।'
Coronavirus vaccine: दो हफ्ते में आ जाएगी वैक्सीन की पहली खेप, रूस ने किया दावा, ऐसे लोगों को मिलेगी पहले
रूसी मंत्री ने कहा कि इस टीके की पहली खेप अगले दो हफ्तों में आ जाएगी और पहले ये मुख्य तौर पर डॉक्टरों को दिया जाएगा। रूसी अधिकारियों ने कहा है कि उनकी योजना है कि अक्तूबर महीने से बड़ी संख्या में लोगों का टीकाकरण शुरू हो जाएगा।
टीका बनाने का दावा
रूस के टीका बना लेने की घोषणा मंगलवार को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उनके वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस की ऐसी वैक्सीन तैयार कर ली है जो कोरोना वायरस के खिलाफ कारगर है। उन्होंने कहा था कि इस टीके का इंसानों पर दो महीने तक परीक्षण किया गया और ये सभी सुरक्षा मानकों पर खरा उतरा है। पुतिन ने साथ ही ये भी कहा था कि ये टीका उनकी बेटी को भी दिया गया है।
टीके पर सवाल
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि वो रूसी अधिकारियों से इस टीके की समीक्षा करने के लिए संपर्क कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन अभी छह टीकों पर नजर रखे हुए है जिनका विकास हो रहा है और उनमें रूस का ये टीका शामिल नहीं है जिसका नाम स्पूतनिक बताया गया है। जिन छह टीकों पर काम चल रहा है उनका विकास तीसरे चरण में है, जिसमें इंसानों पर बड़ी संख्या में परीक्षण किया जाता है।
रूसी टीके के दावे पर खास तौर पर अमेरिका और यूरोप में सवाल उठाए जा रहे हैं। जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री जेन्स स्पान ने कहा, 'लाखों लोगों को टीका देना शुरू कर देना एक खतरनाक बात है, क्योंकि अगर गड़बड़ हुई तो फिर टीके पर से लोगों का भरोसा मर जाएगा।' उन्होंने कहा, 'जितना हमें पता है, उससे लगता है कि इस टीके का समुचित परीक्षण नहीं हुआ है...बात केवल सबसे पहले टीका बना लेने की नहीं है, जरूरी ये है कि एक सुरक्षित टीका बनाया जाए।'
वहीं फ्रांस के नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च की रिसर्चर इसाबेल इम्बर्ट ने अखबार ला पेरिसियों से कहा कि इतनी जल्दी इलाज का दावा कर देना 'बहुत ही खतरनाक' हो सकता है। अमेरिका में देश के सबसे बड़े वायरस वैज्ञानिक डॉक्टर एंथनी फाउची ने भी रूसी दावे पर शक जताया है। डॉक्टर फाउची ने नेशनल जियोग्राफिक से कहा, 'मैं उम्मीद करता हूं कि रूसी लोगों ने निश्चित तौर पर परखा है कि ये टीका सुरक्षित और असरकारी है। मुझे पूरा संदेह है कि उन्होंने ये किया है।'