पिछले एक साल से दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है। यह वायरस अब तक करोड़ों लोगों को संक्रमित कर चुका है जबकि इसकी वजह से लाखों लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं। हालांकि अब ज्यादा चिंता की बात नहीं है, क्योंकि इस बीमारी को खत्म करने के लिए वैक्सीन का निर्माण हो चुका है और ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में तो टीकाकरण अभियान भी चल रहे हैं। हालांकि अभी भी बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो यह जानने के लिए बेताब हैं कि आखिर वैक्सीन कैसे काम कर रही है, उसका असर क्या होगा और कितने समय तक उसका असर रहेगा? इसके साथ ही बहुत सारे लोगों को ये भी नहीं पता होगा कि अलग-अलग कंपनियों ने जो वैक्सीन बनाई है, वो आखिर कितने प्रकार की हैं? आइए जानते हैं इसके बारे में सबकुछ...
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दुनिया में चार प्रकार से बन रही हैं कोरोना की वैक्सीन, जानिए आरएनए और प्रोटीन आधारित टीके में अंतर
Fri, 18 Dec 2020 11:38 PM IST
सोनू शर्मा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Fri, 18 Dec 2020 11:38 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विशेषज्ञों के मुताबिक, मूल रूप से देखें तो कोरोना वैक्सीन चार प्रकार ही हैं और वो हैं- प्रोटीन आधारित वैक्सीन, वायरल वेक्टर वैक्सीन, आरएनए-डीएनए आधारित वैक्सीन और निष्क्रिय या कमजोर पड़ चुके वायरस से बनी वैक्सीन।
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आरएनए-डीएनए आधारित वैक्सीन कैसे करता है काम?
- आरएनए-डीएनए आधारित वैक्सीन को बनाने में कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड का इस्तेमाल किया जाता है। इसके एक छोटे से हिस्से को जब व्यक्ति के शरीर में इंजेक्ट किया जाता है तो यह शरीर में वायरल प्रोटीन बनाता है, न कि पूरा वायरस। इस तरह शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र वायरस पर हमला करने के लिए तैयार हो जाता है। मॉडर्ना कंपनी ने आरएनए आधारित वैक्सीन ही बनाई है, जिसे अमेरिका ने हाल ही में आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दी है।
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प्रोटीन आधारित वैक्सीन
- इस तरह की वैक्सीन को बनाने में कोरोना वायरस के प्रोटीन सेल्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें प्रोटीन सेल्स से वायरस स्ट्रेन के जरिए इम्यूनिटी विकसित की जाती है।
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वायरल वेक्टर वैक्सीन
- वायरल वेक्टर वैक्सीन को बनाने के लिए पहले वायरस स्ट्रेन को संक्रमणमुक्त किया जाता है और फिर उसके इस्तेमाल से कोरोना वायरस प्रोटीन विकसित किया जाता है। इसके बाद उन प्रोटीन्स के जरिए शरीर में इतनी इम्यूनिटी विकसित की जाती है कि वो वायरस के संक्रमण को रोक ले। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन और रूस की 'स्पूतनिक-वी' वायरल वेक्टर आधारित वैक्सीन ही है।