कोरोना की वैक्सीन जल्द से जल्द लोगों को मिले, इसके लिए वैज्ञानिक तो प्रयास कर ही रहे हैं, साथ ही साथ दुनियाभर की सरकारें और संस्थाएं भी प्रयास में जुटी हुई हैं। वैक्सीन बनाने वाली कई कंपनियों ने तो टीके के आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी भी मांगी है। हालांकि इस बीच सबसे बड़ी समस्या जो उभर कर सामने आ रही है, वो ये कि आखिर सभी लोगों तक वैक्सीन पहुंचेगी कैसे? विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी दुनिया के लोगों तक वैक्सीन को पहुंचाना इतना आसान काम नहीं होगा। इसके लिए एक तो वैक्सीन की 14 करोड़ खुराक की जरूरत होगी, उसके अलावा और भी कई तरह की समस्याएं हैं, जिनसे निपटना होगा।
Coronavirus Vaccine: पूरी दुनिया में ऐसे पहुंचाई जाएगी कोरोना की वैक्सीन, होंगी ये तीन बड़ी चुनौतियां
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इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक, दुनिया की सात अरब आबादी तक वैक्सीन को पहुंचाने के लिए 110 टन क्षमता वाले जंबो जेट्स के 8000 फेरों की जरूरत होगी और सिर्फ विमानों के सहारे ही नहीं बल्कि दूरदराज के इलाकों तक वैक्सीन पहुंचाने के लिए कार से लेकर बस, ट्रक और यहां तक कि मोटरसाइकिल और साइकिल की भी जरूरत पड़ सकती है। माना जा रहा है कि वैक्सीन पहुंचाने के इस मिशन में करीब दो साल तक का समय लग सकता है।
कोरोना की वैक्सीन का रखरखाव सबसे बड़ी चुनौती होगी। चूंकि ऐसा माना जा रहा है कि फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन ही सबसे पहले आएगी, लेकिन वैज्ञानिकों की मानें तो इसे माइनस 70 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखना पड़ेगा, तभी इनका इस्तेमाल छह महीने तक किया जा सकेगा। लेकिन फिलहाल ऐसा कोई भी भी एयरक्राफ्ट नहीं है, जिसमें किसी वस्तु को इतना ठंडा रखने की व्यवस्था हो।
वैक्सीन का भंडारण भी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। कुछ बड़े शहरों के पास तो डीप फ्रीज की क्षमता है, लेकिन अधिकतर जगहें ऐसी हैं, जहां बेहद ही कम तापमान पर वैक्सीन को रखने की कोई व्यवस्था नहीं है। एक रिपोर्ट के मुताबिक,यूनाइटेड पार्सल सर्विसेस के पास कुल 600 डीप फ्रीजर हैं, जहां माइनस 80 डिग्री सेल्सियस तापमान पर वैक्सीन के 48,000 डोज को रखा जा सकता है। इसके अलावा और भी कई जगहें हैं, लेकिन वहां वैक्सीन की करोड़ों-अरबों डोज को रखना संभव नहीं है।
जो लोग शहरों या महानगरों में रहते हैं, उन तक वैक्सीन को पहुंचाना तो थोड़ा आसान है, लेकिन गांवों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों तक वैक्सीन कैसे पहुंचाई जाएगी, यह सबसे बड़ी चुनौती होगी। हालांकि यूनिसेफ ने 40 कैरियर्स को दुनिया के 92 सबसे गरीब देशों तक वैक्सीन पहुंचाने की योजना बनाकर देने को कहा है, ताकि कोरोना को हर जगह से पूरी तरह खत्म किया जा सके।