कोरोना का बढ़ता संक्रमण देश और दुनिया के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। पूरी दुनिया को इसकी एक कारगर और सुरक्षित वैक्सीन का इंतजार है। रूस और चीन ने वैक्सीन का पंजीकरण करा लिया है, जबकि भारत, ब्रिटेन, अमेरिका समेत कई अन्य देश वैक्सीन पर कामयाबी के बहुत करीब हैं। भारत समेत कई देशों में इस साल के अंत तक वैक्सीन को मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जबकि साल 2021 में टीकाकरण अभियान भी शुरू होने की उम्मीद है। कई वैक्सीन की डबल डोज संक्रमण से बचाने के लिए जरूरी होगी तो कुछेक सिंगल डोज वैक्सीन पर भी काम हो रहा है। बहरहाल, कोरोना को लेकर हुए कुछ शोध अध्ययनों में यह तो बताया जा चुका है कि मोटापा के शिकार लोगों में वायरस संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है। लेकिन अब एक नए शोध अध्ययन में शोधकर्ताओं ने आशंका जताई है कि मोटे लोगों में वैक्सीन ज्यादा असरदार नहीं होगी।
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Coronavirus Vaccine: मोटे लोगों में इस वजह से असरदार नहीं होगी कोरोना की वैक्सीन, स्टडी में जताई गई आशंका
Mon, 05 Oct 2020 06:37 PM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Mon, 05 Oct 2020 06:37 PM IST
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Coronavirus Vaccine
- फोटो : Pixabay/Amar Ujala
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
- अमेरिका की अलबामा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने आशंका जताई है कि सार्स-कोव-2 वायरस से लड़ने वाली वैक्सीन उन लोगों की सुरक्षा कर पाने में ज्यादा असरदार साबित नहीं हो पाएगा, जिनके शरीर में भारी मात्रा में चर्बी जमी हुई है। पहले से उपलब्ध कुछ वैक्सीनों को उदाहरण देते हुए उन्होंने यह आशंका जताई है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
- अलबामा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में फ्लू और हेपेटाइटिस-बी के टीके का हवाला दिया है। साल 2017 में हुए शोध में सामान्य से अधिक वजन वाले लोगों में ये दोनों टीके संबंधित संक्रमण का मुकाबला करने में बहुत कारगर नहीं रहे थे और उनमें सक्षम एंटीबॉडी पैदा नहीं हो पाई थी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
- अध्ययन में कहा गया है कि मोटे लोग फ्लू और हेपेटाइटिस के संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील तो होते ही हैं, उनमें संक्रमण के गंभीर होने के साथ ही अंग खराब होने और जान जाने का खतरा भी अपेक्षाकृत ज्यादा रहता है। कोरोना से बचाव में कारगर वैक्सीन के मामले में भी ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है।
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Human body
- फोटो : Pixabay
टी-कोशिकाओं और मैक्रोफेज की कमी
इस शोध अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. चाड पेटिट के मुताबिक मोटापे से जूझ रहे लोगों में संक्रमणरोधी वैक्सीन के कम प्रभावी होने के पीछे मुख्यत: दो कारण हैं।
- पहला- टी-कोशिकाओं का ठीक तरह से काम नहीं करना। टी-कोशिकाएं ही इम्यून सिस्टम को एंटीबॉडी पैदा करने का संदेश देती हैं।
- दूसरा- प्रतिरोक्षक क्षमता के सक्रिय होने से शरीर में सूजन बढ़ना। इससे 'मैक्रोफेज' नाम की विशेष कोशिकाओं का उत्पादन घट जाता है। मैक्रोफेज, शरीर में खतरनाक तत्वों को नष्ट करने के लिए अहम मानी जाती हैं।