कोरोना महामारी के खात्मे की ओर अब दुनिया ने कदम बढ़ा दिया है। कुछ-कुछ देशों को छोड़ दें तो अब लगभग सभी देशों को कोरोना वैक्सीन मिलने लगी है। भारत में तो टीकाकरण अभियान चल ही रहा है और अब यहां से अलग-अलग देशों को भी वैक्सीन भेजी जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने अब तक कुल नौ देशों को कोरोना टीके की 60 लाख से ज्यादा खुराकें भेजी हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के उप स्थायी प्रतिनिधि राजदूत के नागराज नायडू ने सोमवार को कहा, 'चरणबद्ध तरीके से अनुबंध के आधार पर अन्य देशों को टीकों की आपूर्ति की जा रही है। हम विश्व स्वास्थ्य संगठन की कोवैक्स पहल को भी धीरे-धीरे टीकों की आपूर्ति करेंगे।'
भारत ने अब तक नौ देशों को भेजा कोरोना का टीका, कोवैक्स पहल को भी करेगा आपूर्ति
नागराज नायडू ने कहा, 'दुनिया के सबसे बड़े टीका निर्माता के तौर पर हम अपने टीके के उत्पादन और वितरण क्षमता को पूरी मानवता के लाभ के लिए उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा कर रहे हैं।' उन्होंने बताया कि भारत ने क्लिनिकल क्षमताओं को मजबूत करने के लिए कई भागीदार देशों को प्रशिक्षण भी दिया है और टीका लगाने की उनकी क्षमताओं को भी बढ़ाया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र परिषद को बताया कि भारत ने तत्काल स्वास्थ्य और चिकित्सा आपूर्ति के माध्यम से 150 से अधिक देशों की सहायता की है।
कोवैक्स पहल क्या है?
- कोवैक्स एक वैश्विक पहल है जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सभी देशों को तेजी से और समान रूप से कोरोना का टीका मिले, चाहे उनकी आय कम हो या अधिक। इस पहल के साथ दुनिया के 180 से भी ज्यादा देश जुड़े हुए हैं।
भारत ने टीका गठबंधन गावी को कोरोना टीके की 1.5 करोड़ खुराकें देने का संकल्प जताया है और अपने पड़ोसी देशों के लिए कोविड-19 आपात कोष संचालित किया है, जिसमें शुरुआती तौर पर एक करोड़ डॉलर का योगदान दिया गया है। नागराज नायडू ने कहा कि हमारा प्रयास वैक्सीन को दुनियाभर में समान तरीके से और किफायती आधार पर पहुंचाने की दिशा में काम करने का है।
भारत ने कौन-कौन से देशों को भेजा है टीका?
- भारत ने 'पड़ोसी प्रथम' नीति के तहत अनुदान सहायता के आधार पर जिन देशों को टीका भेजा है, उनमें नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और मालदीव जैसे देश शामिल हैं। दरअसल, भारत में टीकाकरण अभियान के तहत कोविशील्ड और कोवैक्सीन टीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है और अन्य देशों को भी वहीं टीके उपलब्ध कराए जा रहे हैं।