कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण से दुनियाभर के 200 से ज्यादा देश परेशान हैं। हर दिन कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं और इससे होने वाली मौतों का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है। इस बीच कोरोना की वैक्सीन बनाने में दुनियाभर के वैज्ञानिक लगे हुए हैं। भारत, ब्रिटेन, रूस समेत कई देशों में डेढ़ दर्जन से ज्यादा वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल के फेज में पहुंच चुकी है। जबतक वैक्सीन नहीं आ जाती, तबतक इस संकट से निपटने के लिए पहले से उपलब्ध दवाओं से इसका इलाज किया जा रहा है। इस बीच भारतीय दवा नियामक डीजीसीआई ने पहले से उपलब्ध एक 'इंजेक्शन' को कोरोना के इलाज में इस्तेमाल करने की सशर्त अनुमति दे दी है। सांस की तकलीफ बढ़ने पर कोरोना मरीजों को यह 'इंजेक्शन' दिया जा सकेगा।
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Coronavirus: कोरोना के इलाज में इस 'इंजेक्शन' को मिली अनुमति, सांस संबंधी तकलीफ में दी जा सकेगी
Sat, 11 Jul 2020 04:17 PM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Sat, 11 Jul 2020 04:17 PM IST
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कोरोना वायरस वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Social Media
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
- ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने कोरोना वायरस के इलाज के लिए जिस 'इटोलीजुमैब' इंजेक्शन के सशर्त इस्तेमाल को मंजूरी दी है, उसका इस्तेमाल त्वचा से संबंधित बीमारी सोरायसिस के लिए किया जाता है। हालांकि इस वैक्सीन का इस्तेमाल डॉक्टर की विशेष निगरानी में ही किया जा सकेगा।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
- खबरों के मुताबिक, इस 'इटोलीजुमैब' इंजेक्शन का इस्तेमाल उन मरीजों पर किया जा सकेगा, जो कोरोना से संक्रमित होने के बाद मेडिकल टर्म एआरडीएस से पीड़ित हैं। इस स्थिति में मरीजों को सांस संबंधी दिक्कतें भी होती हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : PTI
- डीजीसीआई प्रमुख डॉ. वीजी सोमानी ने शुक्रवार को इस इंजेक्शन के सशर्त इस्तेमाल की अनुमति दी है। अब इस इंजेक्शन का इस्तेमाल कोविड-19 के मरीजों के इलाज में किया जा सकेगा। एआरडीएस के मरीजों को फेफड़े में दिक्कत होती है। इस वजह से मरीजों को सांस लेना मुश्किल हो जाता है और कई स्थिति में बहुत तेज जलन भी होती है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Social Media
पिछले साल तैयार हुई वैक्सीन
- इस वैक्सीन को इटोलीजुमैब इंजेक्शन बायोकॉन लिमिटेड द्वारा तैयार किया गया है। इस इंजेक्शन का इस्तेमाल प्लेग या सोरायसिस के इलाज में किया जाता है। मालूम हो कि पिछले साल ही इसे अप्रूवल मिला था।