डॉ. राजन गांधी
फिजिशियन
अनुभव- 25 साल
Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi
कोरोना वायरस महामारी ने लगभग पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लिया, और अब तक अलग-अलग देशों में इसकी कई लहरें आ चुकी हैं। वहीं, बात अगर भारत की करें तो यहां भी कोरोना की दो लहरें आ चुकी हैं और अब दूसरी लहर धीरे-धीरे करके नीचे जाते हुए नजर आ रही है। लेकिन ये कहना कि कोरोना का खतरा टल चुका है, इसमें थोड़ी जल्दबाजी होगी। इस वायरस ने काफी लोगों को संक्रमित किया और एक बड़ी संख्या में इस वायरस की वजह से लोगों की मौत भी हुई। हालांकि, काफी संख्या में इस वायरस से जंग जीतकर लोग अपने घर भी लौट रहे हैं। लेकिन इन मरीजों में ठीक होने के बाद भी कई लक्षण नजर आते हैं, जिसमें से एक लक्षण इनके नाखूनों में नजर आ सकता है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में।
दरअसल, जब व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद ठीक हो जाता है, तो उसमें कई तरह के लक्षण नजर आते हैं। इसमें थकान, सिरदर्द, आंखों का लाल होने जैसे कई अन्य लक्षण शामिल हैं। इसके अलावा एक लक्षण है कोविड नेल्स, जिसे ठीक हुए कोरोना मरीजों ने हफ्ते या महीनों बाद अपने नाखूनों पर इस चिन्ह को पहचानने की बात की है।
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कोरोना वायरस के लक्षण
- फोटो : iStock
क्या है कोविड नेल्स?
- अब ये समझना जरूरी है कि आखिर ये कोविड नेल्स क्या है? ये एक नाखूनों से जुड़ी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति के नाखूनों का रंग और आकार बदल सकता है। साथ ही नाखून खुरदुरा भी हो सकता है। हालांकि, कोरोना और इसके बीच क्या संबंध है, ये अभी तक स्पष्ट रूप से अज्ञात है। वहीं, विशेषज्ञ मानते हैं कि अत्यधिक तनाव या फिर बीमारी से गुजरना जो समग्र शरीर के स्वास्थ्य पर भारी पड़ता है। साथ ही ये व्यक्ति के नाखूनों को काफी अच्छी तरह से प्रभावित कर सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
कैसे दिखते हैं ये?
- अध्ययन बताते हैं कि कोविड नेल्स के लक्षण दिखने में कई सप्ताह या फिर कई महीनों तक लग सकते हैं यानी इतने समय बाद इसके लक्षण दिख सकते हैं। केवल हाथ के ही नहीं, बल्कि पैरों की उंगलियों पर भी ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं। नाखून प्लेट पर खांचे हो सकते हैं, जो आमतौर पर सफेद रंग का होता है। हालांकि, इसको लेकर कहा जा रहा है कि ये लक्षण हर कोविड मरीज को प्रभावित नहीं कर सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : istock
इन कारणों से भी हो सकता है ये:-
-गंभीर बीमारी का होना
-वायरस संक्रमण होना
-कॉमरेडिडिटी जैसे डायबिटीज का अनकंट्रोल होना
-कुछ संवहनी रोगों की वजह से भी ये हो सकता है।