भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या भले ही एक करोड़ पहुंचने वाली है, लेकिन सबसे अच्छी बात ये है कि इस बीमारी से ठीक होने वाले लोगों की संख्या भी यहां तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में कोरोना से स्वस्थ होने की दर 95.31 फीसदी हो गई है। अब तक यहां 94 लाख 89 हजार से अधिक मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। वैसे तो कोरोना के बहुत सारे लक्षण हैं, जिसमें गले में खराश, चक्कर आना, थकान, बुखार, जोड़ों में दर्द, स्वाद न आना, सूंघने की क्षमता जाना और सांस लेने में परेशानी आदि शामिल हैं, लेकिन सबसे अधिक चिंता की बात ये है कि धीरे-धीरे कोरोना के लक्षणों में इजाफा भी हो रहा है। ऐसे में मन में एक सवाल यह भी उठता है कि क्या आंखों में तकलीफ होना भी कोरोना का लक्षण हो सकता है? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना से जुड़े ऐसे ही कुछ जरूरी सवालों के जवाब...
Coronavirus: क्या आंखों में तकलीफ होना भी कोरोना का लक्षण हो सकता है? विशेषज्ञ से जानें ऐसे ही सवालों के जवाब
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क्या आंखों में तकलीफ होना भी कोरोना का लक्षण हो सकता है?
दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के डॉ. नीरज गुप्ता बताते हैं, 'हमारे शरीर में विशेष प्रकार की कोशिकाएं होती हैं, जिनके जरिए यह वायरस शरीर में प्रवेश करता है। इन कोशिकाओं का घनत्व नाक और गले में ज्यादा होता है, इसलिए वायरस आसानी से प्रवेश कर जाता है। इसी प्रकार की कोशिकाएं आंखों में भी होती हैं। अगर वायरस आंख के जरिए शरीर में प्रवेश करता है, तो कंजंक्टिवाइटिस के जैसा संक्रमण होता है। आपको बता दें, ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम पाई गई है।'
ब्रिटेन में कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन पाया गया है, यह कितना खतरनाक हो सकता है?
- डॉ. नीरज गुप्ता बताते हैं, 'आमतौर पर वायरस जितनी तेजी से म्यूटेट करते हैं, कोरोना वायरस में उतना म्यूटेशन अभी तक नहीं देखा गया है। जितनी भी वैक्सीन तैयार हो रही हैं, उनपर खास असर नहीं होगा। ब्रिटेन में जो स्ट्रेन पाया गया है, वो कितना खतरनाक है और उसपर वैक्सीन का असर होगा या नहीं या उस वायरस की वजह से अधिक मौतें हो सकती हैं या नहीं, इसपर अभी तक कोई अध्ययन नहीं हुआ है। हम अभी यह मानकर चल रहे हैं, वैक्सीन काफी हद तक सफल रहेगी।'
क्या सर्दी में इलेक्ट्रिक हीटर का प्रयोग करने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है?
- डॉ. नीरज गुप्ता कहते हैं, 'यह केवल एक मिथक है। हमारी नाक शुष्क हवा में नमी को समाहित कर उसे फेफड़ों तक पहुंचाने का काम करती है, ताकि फेफड़ों में शुष्क हवा नहीं जाए। इसलिए नाक को गर्म रखना होता है। सर्दियों में जब ठंड अधिक पड़ती है, तब नाक ठंडी हो जाती है, ऐसे में अगर आप किसी भी हीटर का उपयोग करते हैं, तो उससे फायदा ही होगा नुकसान नहीं। हीटर कोई भी हो, बस प्रदूषण नहीं फैलाए।'
अगर फेस शील्ड लगाई है, तो क्या मास्क पहनना जरूरी नहीं है?
- डॉ. नीरज गुप्ता कहते हैं, 'ध्यान रहे, हवा के कणों के साथ ही नाक के जरिए यह वायरस सबसे तेजी से शरीर में प्रवेश करता है। अगर कोई व्यक्ति आपके सामने बोलता है या छींकता है, उसके मुंह से मोटे-मोटे कण निकलते हैं, जिनके अंदर वायरस हो सकते हैं। फेस शील्ड केवल सामने से बचाव करती है। उसके अगल-बगल से हवा घुसकर आपको नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए यह कतई मत सोचें कि फेस शील्ड अकेले वायरस से बचाव में कारगर है।'