सर्वाइकल कैंसर दुनियाभर की महिलाओं में होने वाला सबसे आम कैंसर है। इस कैंसर से हर साल 3.50 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती हैं। हर दो मिनट में ये एक महिला की इस जान ले रहा है। इस कैंसर को लेकर सबसे अच्छी बात ये है कि समय रहते अगर सावधानी बरती जाए तो इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) वैक्सीन इसका सबसे कारगर तरीका है।
कैंसर का खतरा: क्या 2048 तक सर्वाइकल कैंसर हो सकेगा खत्म, भारत को कब मिलेगी इससे राहत?
सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ एचपीवी टीकाकरण और नियमित स्क्रीनिंग को प्रभावी हथियार माना जा रहा है। अध्ययन के अनुसार, अमीर देश 2048 तक इस कैंसर को खत्म करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। भारत में 90 फीसदी कवरेज वाला सिंगल-डोज टीकाकरण लागू होने पर मामलों में बड़ी कमी आने की उम्मीद जताई गई है।
2048 तक सर्वाइकल कैंसर होगा खत्म?
सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पेपिलोमावायरस के कारण होता है और टीकाकरण के जरिए इससे बचाव की जा सकती है। यही वजह है कि एचपीवी वैक्सीन को कैंसर की रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण हथियार माना जा रहा है।
भारत में भी इस कैंसर से बचाव के लिए व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। देश में एचपीवी टीकाकरण की कवरेज बढ़ाने, लोगों में जागरूकता पैदा करने और नियमित स्क्रीनिंग को मजबूत करने से व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं।
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि उच्च आय वाले अमीर देश टीकाकरण और बेहतर स्क्रीनिंग के दम पर साल 2048 तक सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) को पूरी तरह खत्म करने की राह पर हैं। वहीं निम्न और मध्यम आय वाले देशों में हालात अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।
अध्ययन में क्या पता चला?
कनाडा केसीएचयू डी क्यूबेक-यूनिवर्सिटी लावल रिसर्च सेंटर के शोधकर्ताओं सहित विशेषज्ञों की एक टीम ने चेतावनी दी है कि इस अंतर के कारण आने वाले समय में गरीब देशों की महिलाओं को इस बीमारी का कहीं अधिक सामना करना पड़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर के लगभग 99 फीसदी मामले ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) के संक्रमण से जुड़े होते हैं।
- अध्ययन में पांच अलग-अलग रणनीतियों का मॉडल तैयार किया गया। इसमें पाया गया कि यदि मौजूदा स्थिति बनी रही, तो गरीब देशों में कैंसर की दर में केवल 23 फीसदी की ही कमी आएगी।
- शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि इन देशों में 90 फीसदी टीकाकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया जाए, तो उप-सहारा अफ्रीका को छोड़कर बाकी गरीब देशों में भी इसे खत्म किया जा सकता है।
संगठन ने एक लक्ष्य तय किया है कि सर्वाइकल कैंसर की दर प्रति एक लाख महिलाओं में चार से भी कम हो सके। इसके लिए 90-70-90 का फॉर्मूला तय किया गया है, इसमें 90 फीसदी लड़कियों को 15 वर्ष की आयु तक एचपीवी का टीका लग जाए।
भारत कैसे होगा कैंसर-फ्री
भारत के संदर्भ में लैंसेट ऑन्कोलॉजी के एक पिछले अध्ययन (सितंबर 2022) ने सकारात्मक संकेत दिए थे। इसके अनुसार, यदि भारत में 90 फीसदी कवरेज के साथ सिंगल डोज वैक्सीनेशन प्रभावी रूप से लागू किया जाए तो कैंसर के मामलों में 78 फीसदी तक की कमी आ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कम लागत वाले टीके, सिंगल-डोज वैक्सीन और लड़कों को भी टीकाकरण अभियान में शामिल करने जैसे कदम इस वैश्विक लड़ाई को आसान बना सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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