कोरोना वायरस को समझ पाना इतना आसान नहीं है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि इस वायरस के संक्रमण से कोई व्यक्ति जल्दी ठीक हो जाता है तो किसी में ठीक होने के बाद भी लक्षण कई दिनों तक दिखते रहते हैं। आजकल कई लोगों के लॉन्ग कोविड से भी प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। दरअसल, लॉन्ग कोविड का मतलब है लंबे समय के लिए कोरोना वायरस के संक्रमण से प्रभावित होना जबकि कोविड-19 रिपोर्ट निगेटिव आई हो। नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ रिसर्च के मुताबिक, लंबे समय से कोविड-19 से पीड़ित मरीजों पर मानसिक रूप से बहुत बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
Coronavirus: क्या होता है लॉन्ग कोविड? जानिए इसके लक्षणों समेत सभी जरूरी बातें
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एक रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर लोग तो कोरोना वायरस के संक्रमण से दो हफ्ते में ठीक हो जाते हैं या जो गंभीर रूप से बीमार होते हैं, उन्हें ठीक होने में तीन से चार हफ्ते का समय लग सकता है। लेकिन कई लोग तो कोरोना के साथ ही जी रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ लोगों के लिए कोरोना का संक्रमण लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है।
लॉन्ग कोविड के मुख्य लक्षण
- लगातार रहने वाले कोविड-19 से जुड़े लक्षण
- पोस्ट इंटेनसिव केयर सिंड्रोम
- फेफड़ों और दिल को नुकसान
- पोस्ट वायरल फटीग सिंड्रोम
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फेसबुक पर लॉन्ग कोविड सपोर्ट ग्रुप के 14 लोगों से हुई बातचीत के आधार पर अक्तूबर में एक समीक्षा रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। इस समीक्षा में यह पाया गया था कि कोरोना के लगातार रहने वाले लक्षण की वजह से सांस लेने में परेशानी, दिमाग, दिल, किडनी (गुर्दे), आंत और त्वचा पर बुरा असर पड़ सकता है।
कुछ महीने पहले अमेरिकी मेडिकल एसोसिएशन की पत्रिका में भी एक अध्ययन रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। इस अध्ययन में रोम के सबसे बड़े अस्पताल से ठीक होकर घर लौटे 143 कोरोना मरीजों को शामिल किया गया था। इसमें पाया गया कि 87 फीसदी मरीजों में कोरोना से ठीक होने के दो महीने बाद भी कम से कम एक लक्षण तो देखने को मिला ही जबकि आधे से ज्यादा मरीजों को काफी समय तक थकान महसूस होती रही। इसलिए विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर कोरोना के संक्रमण से ठीक होने के बाद भी आपको लक्षण नजर आते हैं या लक्षण बढ़ते जा रहे हैं तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।