पूरा देश करीब डेढ़ साल से एक ऐसी चुनौती से जूझ रहा है, जिसके बारे में विशेषज्ञ भी ज्यादा नहीं जानते। कोरोना महामारी के दौर में अधिकांश केसेस संक्रमण को गंभीरता से न लेने या डर और झिझक के कारण समय पर इलाज न लेने के कारण बिगड़े। चाहे कोरोना के लिए अब तक कोई सटीक इलाज न मिला हो, लेकिन इस संक्रमण से उपजी स्थितियों को नियंत्रण में रखने के लिए किए जाने वाले उपाय काफी हद तक कारगर साबित हुए हैं। ये वो उपाय हैं, जो इस तरह के संक्रमण के लिए वर्षों से चिकित्सकों द्वारा अपनाए जा रहे हैं। मुख्य बात यह है कि लक्षणों को पहचानकर समय पर इलाज लिया जाता है या नहीं। पिछले साल से अब तक कई रोगियों का इलाज करते वक्त मैंने यह भी अनुभव किया कि कई लोग इस सोच के साथ भी रहते हैं कि 'हम तो इस बीमारी को हल्के में ले रहे थे। अब संक्रमित हो गए हैं। अगर लोगों को पता चल गया तो वे क्या सोचेंगे...' ऐसे में वे इलाज में देर कर देते हैं।
कोरोना संक्रमण: इन बुरी आदतों से रहें दूर, कम हो जाती है इम्यूनिटी, बरतें सावधानी
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संभाला जा सकता है संक्रमण
- यह एक तथ्य है कि आज भारत में कई अच्छे अस्पतालों के पास गंभीर से गंभीर संक्रमण को भी संभालने की क्षमता है। दवाओं की बात करें या आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की, हमारे देश में साधन मौजूद हैं। मुश्किल तब होती है, जब मरीज बड़ी संख्या में आने लगते हैं। अगर हर व्यक्ति थोड़ी सावधानी रखें, तो शायद इसकी नौबत ही न आए।
ऑर्गन फेलियर का डर
- किसी भी संक्रमण को लेकर मन में सबसे बड़ी शंका इसी बात की होती है। जब आप संक्रमण को शुरुआती स्तर पर नजरअंदाज करते हैं, इलाज नहीं लेते तो आगे वह शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को चपेट में लेने लगता है। लगातार इलाज में देरी से मल्टी ऑर्गन इंवॉल्वमेंटल फेलियर (एमओएफ) की स्थिति बन सकती है। मतलब किडनियों, हार्ट, आदि को गंभीर क्षति पहुंचने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। इसलिए डॉक्टरों की यह सलाह रहती है कि कि किसी भी बीमारी में लक्षणों की शुरुआत से ही इलाज लें, ताकि आगे रोग को बढ़ने से रोका जा सके। याद रखिए डॉक्टर्स भी इंसान हैं, उनकी जितनी क्षमता होगी, उतना प्रयास वे आपको बचाने का करेंगे ही, लेकिन यदि आपने बीमारी को बिगाड़ लिया है तो कई बार स्थितियां डॉक्टर्स के हाथ में भी नहीं होती। इसलिए अगर आप समय पर इलाज लेंगे और स्वस्थ होकर अपने परिवार के पास जाएंगे तो हमें ज्यादा खुशी होगी।
व्यसन कम कर रहे इम्यूनिटी
- सिगरेट, शराब, बीड़ी, तंबाकू या अन्य नशीले पदार्थों की लत शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाती है। कोरोना के कई मामलों में यह सामने आया है कि इन बुरी लतों के शिकार लोगों के लिए संक्रमण और भी बुरी स्थिति साथ लेकर आया। इससे फेफड़ों को नुकसान पहुंचने के अलावा इम्यूनिटी पर भी बुरा असर पड़ा। इतना ही नहीं इससे उनके ठीक होने में भी बाधा आई। इसलिए इन बुरी आदतों से दूर रहें।
कोरोना के बाद की तकलीफें
यह भी एक ध्यान रखने लायक स्थिति है। कोरोना से संक्रमित होने के बाद इलाज ले लेने से ही तकलीफ खत्म नहीं हो जाती। यह बीमारी आपके शरीर और दिमाग दोनों पर बहुत बुरा असर डालती है। दुनियाभर में इस बात को लेकर रिसर्च चल रही है और यह पाया गया है कि पोस्ट कोरोना स्थितियों को भी सही इलाज और प्रबंधन की जरूरत होती है। आमतौर पर कोरोना से संक्रमित लोगों में ठीक होने के बाद जो समस्याएं सामने आती हैं, उनमें शामिल हैं-
- फटिग या थकान
- सांस लेने में दिक्कत या जल्दी सांस भरने लगना
- बदन दर्द या सिर दर्द
- बालों का बहुत झड़ना या स्किन प्रॉब्लम्स
- शुगर के स्तर का बढ़ना
- हाई बीपी
- पाचन क्षमता का गड़बड़ाना
- नींद पर बुरा प्रभाव
- डिप्रेशन, एंग्जायटी और तनाव के प्रारंभिक लक्षण
- याददाश्त में कमी
- भूख में कमी
- बैचेनी या चक्कर आना, आदि