दुनिया में कोविड-19 वायरस की उत्पत्ति कैसे हुई, यह अभी भी एक सवाल ही बना हुआ है। हालांकि इसको लेकर पिछले एक साल से लगातार शोध चल रहे हैं। अब अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों और चीन के वैज्ञानिकों की एक टीम कोरोना वायरस की उत्पत्ति पर अपने संयुक्त अनुसंधान कार्य की रिपोर्ट प्रकाशित करने वाली है। बताया जा रहा है कि इस रिपोर्ट में चार सिद्धांत और एक संभावित निष्कर्ष शामिल हैं। दरअसल, साल 2019 में कोरोना वायरस सबसे पहले चीन में ही सामने आया था, जिसके बाद यह पूरी दुनिया में फैलना शुरू हुआ। इससे आज तक पूरी दुनिया परेशान है। इसकी वजह से पूरी दुनिया में 27 लाख से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं और कई देशों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
इस जानलेवा वायरस की उत्पत्ति को लेकर वैज्ञानिकों ने महीनों तक विचार-विमर्श किया और उससे संबधित रिपोर्ट अब प्रकाशित की जा रही है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह रिपोर्ट कब जारी की जाएगी। कहा जा रहा था कि इसका प्रकाशन इसी महीने की शुरुआत में होना है, लेकिन अब तक हुआ नहीं है। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी की वैश्विक स्वास्थ्य नीति के निदेशक मैथ्यू कवनाघ का कहना है कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच की दिशा में यह रिपोर्ट पहला कदम साबित होगी।
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वैज्ञानिकों का कहना है कि इस रिपोर्ट से कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर कुछ ठोस उत्तर मिल सकते हैं और साथ ही इसपर कई अन्य सवाल भी उठ सकते हैं। खबरों के मुताबिक, इस रिपोर्ट में 10 अंतरराष्ट्रीय महामारी विशेषज्ञों, डेटा वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सा विशेषज्ञों, प्रयोगशाला और खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का मत शामिल होगा। इन वैज्ञानिकों ने इस साल की शुरुआत में चीन के वुहान शहर का दौरा किया था।
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यह वायरस इंसानों में कैसे फैला, इसको लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम ने अपनी चीन यात्रा के आखिर में एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि कोरोना वायरस किसी प्रयोगशाला में हादसे की वजह से इंसानों में संक्रमित हुआ, इस बात की संभावना बेहद कम है। दरअसल, अमेरिका समेत कई देश इस वायरस को चीन की प्रयोगशाला में बनाए जाने का आरोप लगा चुके हैं। वहीं चीन ने दावा किया था कि इस वायरस की उत्पत्ति किसी और देश में हुई और वहां से दूषित फ्रोजेन फूड के साथ वह चीन पहुंचा। हालांकि ज्यादातर वैज्ञानिक चीन के इस दावे को नहीं मानते हैं।