देश और दुनिया में कोरोना वायरस का संक्रमण एक बार फिर से बढ़ता जा रहा है। इसकी वैक्सीन का लोगों को बेसब्री से इंतजार है। रूस और चीन के बाद भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी समेत कई देश वैक्सीन पर कामयाबी के करीब हैं। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच इसके इलाज के तरीके ढूंढने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक शोधरत हैं। इसकी बहुत सी दवाएं उपलब्ध हो चुकी हैं, जबकि प्लाज्मा थेरेपी से लेकर मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी तक के तरीके भी अपनाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में वैज्ञानिकों ने एक जानवर से प्राप्त एंटीबॉडीज में कोरोना के इलाज और रोकथाम की उम्मीद ढूंढ निकाली है। आइए जानते हैं इसके बारे में:
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एंटीबॉडी परीक्षण
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दरअसल, वैज्ञानिकों ने ऐसा तरीका खोज निकाला है जो 'लामाओं' से बेहद छोटा लेकिन कोरोना वायरस का शक्तिशाली एंटीबॉडी निकालने में सहायक है। लामा अमेरिकी ऊंट की प्रजाति का एक जानवर है जो आकार में इससे कुछ छोटा होता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे प्राप्त एंटीबॉडी में कोविड-19 के इलाज और इसकी रोकथाम की क्षमता है।
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COVID-19 antibody
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अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं के अनुसार, ये विशेष लामा एंटीबॉडी नैनोबॉडी कहलाते हैं और आकार में मनुष्य के एंटीबॉडी से बेहद छोटे होते हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि ये एंटीबॉडी, कोविड-19 महामारी फैलाने वाले वायरस Sars-COv-2 को बेअसर करने में बेहद प्रभावी होते हैं और ये बहुत स्थिर भी हैं।
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antibody Tests
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शोधकर्ताओं ने वॉली नामक काले रंग के लामा को Sars-COv-2 बढ़ाने वाले प्रोटीन के एक टुकड़े के साथ प्रतिरोधी बनाया और करीब दो महीने के बाद, इसकी रोग प्रतिरोधक प्रणाली ने वायरस के खिलाफ परिपक्व नैनोबॉडी पैदा किया। गुरुवार को साइंस पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन के वरिष्ठ लेखक यी शी ने कहा, 'प्रकृति हमारी सर्वश्रेष्ठ आविष्कारक है।'
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llama
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मास स्पेक्ट्रोमेट्री आधारित तकनीक का इस्तेमाल करते हुए इस अध्ययन के प्रमुख लेखक और शी के प्रयोगशाला में अनुसंधान सहायक युफेई शिआंग ने वॉली के ब्लड में नैनोबॉडी की पहचान की जिसका Sars-COv-2 से गहरा जुड़ाव है। शोधकर्ताओं का दावा है कि ये नैनोबॉडी Sars-COv-2 के लिए सबसे प्रभावी चिकित्सकीय एंटीबॉडीज की तरह साबित होगी।