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Coronavirus: पूरी दुनिया में कोरोना वायरस पर हुए शोध का सिर्फ चार फीसदी ही अफ्रीका से संबंधित, अध्ययन में खुलासा

Tue, 02 Mar 2021 05:17 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Tue, 02 Mar 2021 05:17 PM IST
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Coronavirus new study says Only 4 percent of all covid 19 research published relevant to Africa
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कोरोना वायरस को दुनिया में आए एक साल से भी अधिक का समय बीत चुका है और इस दौरान अलग-अलग देशों में इसपर हजारों शोध हो चुके हैं। मंगलवार को प्रकाशित एक विश्लेषण के मुताबिक, दुनियाभर में कोविड-19 पर प्रकाशित वैज्ञानिक अनुसंधान का सिर्फ चार फीसदी ही अफ्रीका से संबंधित है, जबकि यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है। शोधकर्ताओं ने एक जनवरी से 30 सितंबर 2020 के बीच 10 प्रमुख स्वास्थ्य और चिकित्सा पत्रिकाओं में प्रकाशित दो हजार से अधिक सहकर्मी-समीक्षा लेखों का विश्लेषण किया। इस दौरान पाया गया कि 2,196 में से 94 लेख, यानी लगभग चार फीसदी ही अफ्रीका या इस महाद्वीप के किसी देश से संबंधित सामग्री थी। 

Coronavirus new study says Only 4 percent of all covid 19 research published relevant to Africa
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विश्लेषण के मुताबिक, अफ्रीका से संबंधित लेखों में, 619 सूचीबद्ध लेखकों में से केवल 210 ही अफ्रीकी थे यानी 34 फीसदी। इसका मतलब है कि इस महाद्वीप से संबंधित कोविड-19 अनुसंधान के दो तिहाई लेखक गैर-अफ्रीकी थे। इस विश्लेषण को ऑनलाइन पत्रिका बीएमजे ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित किया गया है। इसके लेखकों का कहना है कि परिणाम आश्चर्यजनक नहीं थे कि कैसे अफ्रीकी लेखकों को वैज्ञानिक शोध के तहत दर्शाया गया है। 

Coronavirus new study says Only 4 percent of all covid 19 research published relevant to Africa
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

अगर कोरोना संक्रमण की बात करें तो पूरे महाद्वीप में लगभग 40 लाख संक्रमण के पुष्ट मामले हैं और एक लाख से भी अधिक लोगों की इस वायरस की चपेट में आकर मौत हो चुकी है। हालांकि यहां लाखों लोग इस बीमारी से ठीक भी हुए हैं, लेकिन अब कोरोना के नए स्ट्रेन ने और भी चिंता बढ़ा दी है। 

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Coronavirus new study says Only 4 percent of all covid 19 research published relevant to Africa
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

दक्षिण अफ्रीका में मिला कोरोना का नया स्ट्रेन भारत समेत कई देशों में फैल चुका है। हालांकि यह नया स्ट्रेन पहले के मुकाबले और अधिक गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है या मौत का जोखिम बढ़ा सकता है, इसको लेकर अभी पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं, लेकिन वैज्ञानिक कहते हैं कि यह संक्रामक जरूर है। कुछ समय पहले एक शोध के हवाले से वैज्ञानिकों ने चेतावनी देते हुए कहा था कि यह स्ट्रेन शरीर की एंटीबॉडी के साथ-साथ प्रतिरक्षा तंत्र को भी 'धोखा' दे सकता है। इसलिए बेहद ही संभल कर रहने की जरूरत है। 

नोटः यह लेख बीएमजे ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें शोध के बारे में विस्तार से बताया गया है।  

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