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CoronaVirus Study: कोरोना को और घातक बना सकता है शहरी प्रदूषण, चिंता बढ़ाता है यह शोध अध्ययन 

Thu, 08 Oct 2020 03:19 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निलेश कुमार Updated Thu, 08 Oct 2020 03:19 PM IST
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Coronavirus may be more fatal by Air pollution can raise fatality of Covid 19 Sars Cov 2 virus to be more dangerous
Coronavirus - फोटो : Pixabay/Amar Ujala

दुनियाभर के 210 से ज्यादा देशों में कोरोना वायरस का संक्रमण फैला हुआ है। इस बीच लोगों को इसकी एक ऐसी कारगर और सुरक्षित वैक्सीन का इंतजार है, जो जनसामान्य के टीकाकरण के लिए जल्द से जल्द उपलब्ध हो सके। रूस और चीन ने वैक्सीन को मंजूरी दे दी है तो दूसरी ओर भारत समेत कई देश वैक्सीन पर सफलता के करीब हैं। जबतक वैक्सीन नहीं आ जाती, तबतक विशेष एहतियात बरते जाने की अपील की जा रही है। इस बीच अमेरिका में हुआ एक शोध अध्ययन कोरोना को लेकर लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। इस अध्ययन में दावा किया गया है कि शहरी प्रदूषण कोविड महामारी को और ज्यादा घातक बना सकता है। 

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Air Ok Pollution Seizure - फोटो : Amar Ujala

अमेरिका में हुए इस शोध अध्ययन में दावा किया गया है कि लंबे समय तक शहरी प्रदूषण, खासतौर पर नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड के संपर्क में रहने पर कोविड-19 और ज्यादा जानलेवा हो सकता है। ‘दि इनोवेशन’ जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में अमेरिका के 3,122 काउंटियों में जनवरी से जुलाई के बीच अहम प्रदूषकों जैसे पीएम 2.5, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड और ओजोन का विश्लेषण किया गया है।

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प्रदूषण (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एएनआई/पीटीआई

अमेरिका स्थित इमोरी विश्वविद्यालय के दोंगहाइ लियांग ने कहा कि प्रदूषण के अल्पकालिक और दीर्घकालिक संपर्क की स्थिति में मानव शरीर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तंत्रगत प्रभाव ऑक्सीडेटिव दबाव, शोथ और सांस के संक्रमण के खतरे के रूप में पड़ता है। 

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कोरोना के दौर में मास्क पहनना जरूरी(फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
वायु प्रदूषण के प्रदूषकों और कोविड-19 की तीर्वता के बीच के संबंध का पता लगाने के लिए अनुसंधानकर्ताओं ने दो प्रमुख नतीजों, कोरोना पीड़ित मरीजों की मृत्यु और आबादी की तुलना में कोरोना से होने वाली मौतों की दर का अध्ययन किया। दो संकेतक क्रमश: कोविड से होने वाली मौतों के लिए जैविक संवेदनशीलता का संकेत दे सकते हैं और कोविड-19 से मौतों की तीव्रता की जानकारी दे सकते हैं।
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Air pollution - फोटो : social media

शोधकर्ताओं द्वारा प्रदूषकों के विश्लेषण से पता चला कि कोविड-19 से होने वाली मौतों से नाइट्रोजन ऑक्साइड का बहुत मजबूत संबंध है। शोधकर्ताओं ने कहा कि वायु में एनओ-2 यानी नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड (NO2) के 4.6 हिस्से प्रति अरब (पीपीबी) के इजाफे से क्रमश: 11.3 फीसदी कोविड मरीजों की मौत और 16.2 फीसदी मृत्युदर बढ़ती है।

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