देश में कोरोना के नए मामले तो कम होने लगे हैं, लेकिन ब्लैक फंगस संक्रमण यानी म्यूकोरमाइकोसिस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब तक 14 राज्यों ने इस बीमारी को महामारी घोषित कर दिया है, जिसमें गुजरात, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार शामिल हैं। पिछले कुछ दिनों में इस बीमारी ने हजारों लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। ब्लैक फंगस से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य गुजरात है। यहां मरीजों की संख्या दो हजार से भी अधिक हो गई है। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कि ब्लैक फंगस के इलाज में अम्फोटेरिसिन बी नामक दवा कैसे सहायक है?
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विशेषज्ञ से जानें: ब्लैक फंगस के इलाज में अम्फोटेरिसिन-बी दवा कैसे सहायक है?
Sun, 23 May 2021 09:26 AM IST
सोनू शर्मा
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Sun, 23 May 2021 09:26 AM IST
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ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस)
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
- फोटो : Twitter/Air
कोरोना के इलाज में टेली कंसल्टेंसी कितनी सहायक है?
- दिल्ली स्थित गंगाराम अस्पताल के डॉ. (लेफ्टिनेंट जनरल) वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'आज के समय में टेली कंसल्टेंसी बहुत उपयोगी है। अधिकतर दूर-दराज के लोगों को लगता है कि टेलीफोन पर भी कैसे इलाज हो सकता है? तो जी हां, अपने डॉक्टर से टेलीफोन से संपर्क कर आप इलाज करा सकते हैं। इसके जरिये सिर्फ कोरोना ही नहीं बल्कि दूसरी बीमारी का भी इलाज होता है। टेली कंसल्टेंसी के जरिये जो भी फीस होगी, आप दे देंगे और समय फिक्स करके अपने डॉक्टर से बात कर सकते हैं। इससे एक तो सभी को इलाज मिलेगा, मरीज को आना-जाना नहीं पड़ेगा और संक्रमण का भी खतरा नहीं होगा।'
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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कोरोना के हवा से फैलने को लेकर कुछ नए शोध सामने आए हैं?
- डॉ. वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'सरकार के नए दिशा-निर्देश में कहा गया है कि हवा में 10 मीटर तक कोरोना का वायरस फैल सकता है और मेडिकल जर्नल लैंसेट ने भी अपने अध्ययन में यह पुष्टि की है। लेकिन आज भी दो गज वाली दूरी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ज्यादातर केस पास रहकर बात करने, खाने से ही होते हैं यानी ड्रॉपलेट से। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कई लोगों का कहना है कि वो तो बाहर जाते नहीं थे या किसी के करीब नहीं गए, तो पाया गया कि वायरस हवा के जरिये भी संक्रमित कर सकता है। लेकिन हवा में वायरस तब आएगा, जब कोई तेज से बोलेगा, हंसेगा, गाना गाएगा, खांसेगा। इससे हवा की दिशा की तरफ वायरस का एयरोसोल हो सकता है। इसलिए दो गज की बजाय 10 गज तक की दूरी बनाकर रखें।'
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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कोविड से जंग में नया मंत्र 'जहां बीमार, वहीं उपचार' को कैसे समझें?
- डॉ. वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'जी हां, इसके पीछे का मतलब समझना बहुत जरूरी है। सबसे पहले तो हम समझें कि जो लोग जहां बीमार हैं, वहीं रहें, उन्हें वहीं उपचार दिया जाएगा। इसके लिए कोविड केयर सेंटर बढ़ाने होंगे, बीमार तक इलाज पहुंचाना होगा। इसके लिए टेस्टिंग, दवा और जरूरी चिकित्सा उपलब्ध करवाई जाएगी, जैसा कि कई राज्यों में इसकी शुरुआत भी हो गई है। गांव-गांव, घर-घर जाकर टेस्ट और सर्वे किया जा रहा है और लक्षण दिखने पर दवा भी दी जा रही है।'
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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ब्लैक फंगस के इलाज में अम्फोटेरिसिन-बी कैसे सहायक है?
- डॉ. वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'कोरोना से पहले भी ब्लैक फंगस की बीमारी होती थी। इसे म्यूकोरमाइकोसिस कहते हैं। तब ऐसे मरीज जो डायबिटीज की वजह से आईसीयू में एडमिट हो जाते थे, उनमें इसके लक्षण पाए जाते थे। तब भी इसका इलाज अम्फोटेरिसिन-बी से करते थे। तब इसके केस बहुत कम आते थे, तो ये दवा अस्पताल में मिल जाती थी, लेकिन कोई दुकान वाले नहीं रखते थे। अब इसकी मांग बढ़ी है तो सरकार उत्पाद पर भी ध्यान दे रही है और इसे बेचने के लिए नियम भी बना दिए हैं, ताकि ब्लैक (कालाबाजारी) न हो सके।'