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विशेषज्ञ से जानें: मास्क लगाकर कोई खांसे या बोले तो क्या कोरोना वायरस बाहर आ सकता है?

Wed, 12 May 2021 06:51 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Wed, 12 May 2021 06:51 PM IST
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कोरोना वायरस - फोटो : istock

कोरोना का संक्रमण देश में लगातार बढ़ता जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग संक्रमण के कारण हुई परेशानियों से मर रहे हैं। इन्हीं अनचाही मौतों को रोकने के लिए विशेषज्ञ हमेशा से संक्रमण से बचने की सलाह देते आए हैं कि मास्क पहनें, सुरक्षित शारीरिक दूरी रखें, हाथ धोएं आदि। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि बहुत सारे लोग ऐसे थे और अभी भी हैं जो इन नियमों को नहीं मानते और ऐसे ही लोगों के कारण संक्रमण बढ़ भी रहा है। हालांकि अभी भी लोग अगर सतर्क हो जाएं तो संक्रमण को बढ़ने से रोका जा सकता है। इसमें सबसे जरूरी है मास्क लगाकर रहना, लेकिन इसको लेकर भी बहुत सारे सवाल हैं कि कौन सा मास्क अच्छा है, किस तरह मास्क पहनें कि संक्रमण से बचाव हो? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं इन सवालों के जवाब... 

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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air

मास्क लगा अगर कोई खांसता या बोलता है तो क्या वायरस बाहर आ सकता हैं? 

  • दिल्ली स्थित आरएमएल अस्पताल के डॉ. ए. के. वार्ष्णेय कहते हैं, 'ये निर्भर करता है कि व्यक्ति ने किस तरह का मास्क लगाया है। अगर किसी ने एन-95 मास्क लगाया है तो 95 प्रतिशत सुरक्षा मिलती है। एन-95 को काफी अच्छा माना जाता है। इसके बाद आता है सर्जिकल मास्क। ये ज्यादातर लोग ढीला लगाते हैं, लेकिन इसे इस तरह लगाएं कि मास्क लगाने के बाद मुंह का भाप या हवा बाहर न जाए, क्योंकि अगर हवा बाहर आ रही है तो अंदर भी जा सकती है, इससे वायरस प्रवेश कर सकता है। अब आता है कॉटन का मास्क, जो थोड़ा इन दोनों से कम या 50 प्रतिशत तक सुरक्षा देते हैं। ऐसे में अब डबल मास्क लगाने के लिए कहा जा रहा है। अगर बाहर जा रहे हैं तो नीचे सर्जिकल मास्क लगाएं और ऊपर से कॉटन मास्क लगाएं। ऊपर कॉटन मास्क इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि उसे धो सकते हैं। लेकिन एन-95 मास्क लगाया तो डबल मास्क की जरूरत नहीं है।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air

होम आइसोलेशन में रहने के लिए किन मरीजों को सलाह दी जाती है? 

  • डॉ. ए. के. वार्ष्णेय कहते हैं, 'कोरोना में 90 प्रतिशत मरीज में अगर अपर रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (ऊपरी श्वसन संक्रमण) होता है, यानी सिर्फ बुखार, शरीर में दर्द, गले में खराश, स्मेल (गंध) और टेस्ट (स्वाद) का न आना जैसे लक्षण होते हैं। ऐसे व्यक्ति 10 से 15 दिन में घर पर रह कर ही ठीक हो सकते हैं, लेकिन उसके लिए घर में एक खुद का कमरा हो, पल्स ऑक्सीमीटर, बुखार नापने वाला थर्मामीटर आदि हो, तब होम आइसोलेशन देते हैं। लेकिन जो लोग बुजुर्ग, डायबिटीज, हार्ट (दिल) मरीज हैं, तो उन्हें तभी होम आइसोलेशन देते हैं, जब वो लगातार डॉक्टर से संपर्क में रहते हैं या परिवार में कोई हो जो उनकी देखभाल करने वाला हो।'  
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air

कोरोना संक्रमण होने के बाद फेफड़े में कितना संक्रमण है, जानने के लिए क्या सीटी स्कैन जरूरी है?

  • डॉ. ए. के. वार्ष्णेय कहते हैं, 'अगर आरटी-पीसीआर में पॉजिटिव है और ऑक्सीजन लेवल गिर रहा है तो खुद से सीटी स्कैन कराने की जरूरत नहीं है। डॉक्टर के पास जाएं, उन्हें पता है कि कैसे इलाज करना है। लेकिन अगर बुखार नहीं उतर रहा है तो कई बार कुछ ब्लड टेस्ट कराते हैं। लेकिन अगर आरटी-पीसीआर निगेटिव है, कोविड के लक्षण हैं और ऑक्सीजन लेवल गिरता है तो उस समय निमोनिया की संभावना रहती है। तब डॉक्टर सीटी स्कैन कराते हैं, जिससे फेफड़े में निमोनिया का क्या स्तर है यानी गंभीरता कितनी है ये पता चलता है। सीटी स्कैन में दोनों फेफड़ों को 25 हिस्सों में बांटते हैं, उनमें से कितने हिस्से प्रभावित हुए हैं, ये पता चलता है।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air

आइसोलेशन खत्म होने के बाद क्या कोई वायरस ट्रांसमिट कर सकता है? 

  • डॉ. ए. के. वार्ष्णेय कहते हैं, 'अगर कोई एसिम्प्टोमैटिक (बिना लक्षण वाला) या माइल्ड इंफेक्शन (हल्का संक्रमण) वाला है, तो आइसोलेशन के 10 दिन में अगर तीन से छह दिन तक बिना किसी दवा के बुखार नहीं है तो व्यक्ति से संक्रमण की संभावना कम होती है। लेकिन अगर दवा ले रहे हैं या बीच में बुखार या खांसी जैसे लक्षण हैं तो अभी वायरस का संक्रमण फैल सकता है। इसलिए आइसोलेशन पूरा करें।' 
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