देश में कोरोना संक्रमण के दैनिक मामलों में लगातार गिरावट जारी है। वर्ल्डोमीटर के आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार को भी संक्रमण के 1.75 लाख से कम नए मामले सामने आए हैं। हालांकि इस दौरान 3,600 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवा दी। इस बीच राहत की बात ये है कि देश में अब तक दो करोड़ 54 लाख से अधिक कोरोना मरीज संक्रमण से ठीक हो चुके हैं, लेकिन ऐसे कई मरीजों में कोरोना से ठीक होने के बाद भी बुखार की समस्या देखने को मिल रही है, ऐसे में मरीज क्या करें? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना से जुड़े कुछ ऐसे ही सवालों के जवाब...
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विशेषज्ञ से जानें: कोरोना से ठीक होने के बाद भी 99-100 डिग्री बुखार है तो क्या करें?
Sun, 30 May 2021 09:35 AM IST
सोनू शर्मा
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Sun, 30 May 2021 09:35 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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कोविड के दौरान खुद से एंटीबायोटिक दवा लेते हैं, क्या इसकी वजह से भी समस्या हो सकती है?
- दिल्ली स्थित एम्स के डॉ. नीरज निश्चल कहते हैं, 'कोविड-19 एक वायरल बीमारी है। वायरल बीमारी में लक्षण के हिसाब से दवा दी जाती है। वायरल बीमारी में एंटीबायोटिक का कोई रोल नहीं है, सोशल मीडिया के जरिये लोग खुद से ऐसी दवा ले रहे हैं। इसका रोल तभी आता है जब एक बीमारी के साथ कोई और बैक्टीरियल इंफेक्शन हो जाता है, तब इसे देते हैं। कई बार मरीज आते हैं और स्मार्ट बनने की कोशिश करते हैं कि हमने इतनी एंटीबायोटिक ले ली, लेकिन हमें फिर भी कुछ नहीं हुआ और ये समस्या आ गई है। इसलिए हम कह रहे हैं कि अभी हम एक महामारी से लड़ रहे हैं, कहीं ऐसा न हो कि आने वाले समय में लोगों की इस लापरवाही की वजह से बड़ी समस्या हो जाए। इसे रोकने की जरूरत है।'
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
- फोटो : Twitter/Air
कोविड से रिकवर होने के बाद भी 99-100 डिग्री फारेनहाइट बुखार है तो क्या करें?
- डॉ. नीरज निश्चल कहते हैं, 'अगर रिकवर कर चुके हैं, तो परेशान न हों। कई बार जो लोग रिकवर कर के जाते हैं, उनमें देखा गया है कि दोपहर और शाम में उनका तापमान 99-100 डिग्री फारेनहाइट के बीच में रहता है और खुद से ठीक हो जाता है। अगर किसी का तापमान सुबह में 100 से ऊपर जाता है, तो डॉक्टर से संपर्क करें।'
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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कोविड में ऑक्सीजन का लेवल कम होना दूसरी लहर में इतना क्यों हो रहा है?
- डॉ. नीरज निश्चल कहते हैं, 'इसकी कई वजह हो सकती है। कई लोगों का मानना है कि वायरस म्यूटेट हो गया है, इसलिए बहुत तेज बीमारी फैल रही है और ऑक्सीजन लेवल लो हो जा रहा है। लेकिन मेरा मानना है कि युवाओं को लगने लगा था कि उन्हें कुछ हो नहीं सकता है। ऐसे में अगर घर में कोई बीमार हुआ तो उनकी देखभाल करेंगे, लेकिन खुद लापरवाह बने रहेंगे। लक्षण आने पर भी नजरअंदाज करते हैं। आराम नहीं करते हैं और कोविड का उन्हें इलाज नहीं मिल पाता है और तब सेचुरेशन लो होने लगता है।'
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कोविड से ठीक होकर घर आने पर भी क्या ऑक्सीजन सेचुरेशन चेक करना है?
- डॉ. नीरज निश्चल कहते हैं, 'कोविड मरीज अगर अस्पताल में एडमिट हो जाता है, तो एक तरह से बीमारी साइकोलॉजिकल रूप से भी उसे काफी प्रभावित करती है। अगर एक बार अस्पताल से ठीक हो कर घर आ गए हैं, तो उसके बाद ऑक्सीजन सेचुरेशन चेक करने की जरूरत नहीं है। अगर बार-बार चेक करते हैं तो एक तरह से ओसीडी हो सकता है। हां, अगर डॉक्टर कहते हैं कि घर पर चेक करना है तो कर सकते हैं, नहीं तो जरूरत नहीं है। इसके अलावा अगर कुछ लक्षण आते हैं, जैसे सांस फूलने लगना, खांसी बहुत ज्यादा बढ़ जाने की समस्या है, तो डॉक्टर से संपर्क करें और तब सेचुरेशन भी चेक कर सकते हैं।'