फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कोरोना वायरस: संक्रमण से मौत होने की कितनी संभावना, आम आदमी को कितना खतरा?

Sun, 10 May 2020 05:03 PM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Published by: निलेश कुमार Updated Sun, 10 May 2020 05:03 PM IST
विज्ञापन
Coronavirus: How likely to die from covid 19 infection, how much danger corona to common man
सवाल उठता है कि कोरोना से संक्रमित होने वाले लोगों में से कितने लोगों की मौत हो रही है। - फोटो : PTI

दुनिया भर में कोरोना वायरस से मरनेवालों की संख्या बढ़कर 2.80 लाख से भी ज्यादा हो गई है। वहीं, अब तक कोरोना वायरस से करीब 41.21 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके है। चीन के बाहर कोरोना वायरस के सबसे बड़े हॉट-स्पॉट अमेरिका, स्पेन, इटली और फ्रांस बताए जा रहे हैं। इस वायरस से मरने वालों में बुजुर्गों की संख्या ज्यादा बताई जा रही है।



लेकिन सवाल उठता है कि कोरोना से संक्रमित होने वाले लोगों में से कितने लोगों की मौत हो रही है। शोधार्थियों की मानें तो कोरोनावायरस से संक्रमित प्रति एक हजार व्यक्तियों में से नौ व्यक्तियों की मौत होने की आशंका है। लेकिन कोरोनावायरस से संक्रमित होने के बाद किसी व्यक्ति की मौत होने या उसका बच जाना तमाम अलग-अलग कारकों पर निर्भर करता है। इन कारकों में संक्रमित व्यक्ति की उम्र, लिंग, उसका सामान्य स्वास्थ्य और वह जिस देश में रहता है वहां का स्वास्थ्य तंत्र शामिल हैं।

Coronavirus: How likely to die from covid 19 infection, how much danger corona to common man
प्रतीकात्मक तस्वीर

मृत्यु दर निकालना कितना मुश्किल है?
कोरोनावायरस से संक्रमण के बाद कितने लोगों की मौत होती है, ये निकालना बहुत मुश्किल है। ऐसे मामलों में अक्सर ऐसा होता है कि वायरस से संक्रमण के ज्यादातर मामले स्वास्थ्य तंत्र की नजरों से ओझल रहते हैं। क्योंकि संक्रमित होने वाले लोगों में लक्षण काफी सामान्य होते हैं जिस वजह से वे डॉक्टर के पास नहीं जाते हैं। दुनिया भर में इस समय कोरोनावायरस से जुड़ी मृत्यु दर अलग अलग बताई जा रही हैं। लेकिन इसके लिए वायरस की अलग-अलग किस्में जिम्मेदार नहीं हैं।

इंपीरियल कॉलेज के शोध के मुताबिक, कोरोनावायरस की अलग-अलग मृत्यु दरें इसलिए सामने आ रही हैं क्योंकि अलग-अलग देशों के स्वास्थ्य तंत्रों की आसानी से नजर में न आने वाले मामलों का पता लगाने में दक्षता अलग-अलग है। ऐसे में जब संक्रमित होने वाले सभी व्यक्तियों की गिनती नहीं होती है तो इससे जो मृत्यु दर निकलकर आती है, वो असल मृत्यु दर से ज्यादा होती है। क्योंकि मृत्यु दर निकालने के लिए मरने वाले लोगों की कुल संख्या को संक्रमित होने वाले लोगों की कुल संख्या से विभाजित किया जाता है।

Coronavirus: How likely to die from covid 19 infection, how much danger corona to common man
कोरोना की जांच के लिए नमूना एकत्र करता स्वास्थ्य कर्मी(File Photo) - फोटो : PTI

संक्रमण के चलते मौत
किसी व्यक्ति के संक्रमित होने के बाद उसके ठीक होने या संक्रमण के चलते मौत होने में समय लगता है। अगर आप सभी ऐसे मामलों को शामिल कर लें जिनमें अब तक लक्षण भी सामने नहीं आए हैं तो आप मृत्यु दर कम आंकेंगे क्योंकि आपके आकलन में मरने वालों की वो संख्या नहीं होगी जिनकी आखिरकार इस वायरस के चलते मौत होगी।

वैज्ञानिक इन सभी सवालों से जुड़े सबूतों को एकत्रित करके मृत्यु दर निकालने के लिए एक कोशिश करते हैं। उदाहरण के लिए, वैज्ञानिक एक फ्लाइट से अपने देश लौटने वाले लोगों पर नजर रखकर उनमें से बीमार पड़ने वाले लोगों की संख्या के आधार पर एक अनुपात निकाल सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Coronavirus: How likely to die from covid 19 infection, how much danger corona to common man
तापमान जांचते पुलिसकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

वैज्ञानिक एक छोटे समूह, जैसे कि फ्लाइट से वापस आने वाले लोगों का समूह, पर ध्यान केंद्रित करके उसमें मौजूद वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों का अनुपात निकालेंगे। लेकिन इस तरह की कोशिशों से मिले सबूतों में मामूली बदलाव भी कोरोनावायरस से जुड़े बड़े परिदृश्य को बदलने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

अगर आप सिर्फ चीन के खूबे प्रांत के आंकड़े निकालें, जहां मृत्यु दर शेष चीन के मुकाबले कहीं ज्यादा थी, तो आपको कोरोनावायरस की मृत्यु दर काफी खराब दिखेगी। ऐसे में वैज्ञानिक मृत्यु दर के मामले में संभावित आंकड़ा देते हैं। लेकिन इससे भी पूरी बात सामने नहीं आती है क्योंकि यहां एक भी मुख्य मृत्यु दर नहीं है।

विज्ञापन
Coronavirus: How likely to die from covid 19 infection, how much danger corona to common man
लोगों की जांच करते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

आम आदमी को कितना खतरा है?
कोरोना वायरस की वजह से बुजुर्गों, पहले से बीमार और पुरुषों के मरने का खतरा ज्यादा है। चीन के 44000 मामलों के पहले विश्लेषण में सामने आया है कि कोरोना वायरस से बुजुर्गों के मरने की दर मध्य-उम्रवर्ग के लोगों की तुलना में दस गुना ज्यादा था।

30 साल से कम उम्र के लोगों के कोरोना वायरस से मरने की दर सबसे कम थी। ऐसे 4500 मामलों में सिर्फ 8 व्यक्तियों की मौत हुई। वहीं, पुरुषों की मृत्यु दर महिलाओं की तुलना में ज्यादा थी। ये सभी कारक एक दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं। और हर भौगोलिक क्षेत्र में हर तरह के व्यक्ति को कितना जोखिम है, इसे लेकर हमारे पास अभी भी पुख्ता जानकारी नहीं है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed