इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के मुताबिक कोरोना वायरस का संक्रमण भारत में दूसरे स्तर पर है। मतलब ये कि फिलहाल संक्रमण उन्हीं लोगों तक फैला है जो संक्रमण वाले देशों से भारत आए या फिर उन लोगों में फैला जो संक्रमित लोगों के संपर्क में आए।
कोरोना वायरस: स्टेज-3 के संक्रमण से बचने को कितना तैयार है भारत, क्या है मोदी सरकार का एक्शन प्लान?
दूसरे चरण में स्थानीय स्तर पर संक्रमण फैलता है, लेकिन ये वे लोग होते हैं जो किसी ना किसी ऐसे संक्रमित शख्स के संपर्क में आए जो विदेश यात्रा करके लौटे थे। तीसरा और थोड़ा खतरनाक स्तर है 'कम्युनिटी ट्रांसमिशन' का, जिसे लेकर भारत सरकार चिंतित है।
कम्युनिटी ट्रांसमिशन तब होता है जब कोई व्यक्ति किसी ज्ञात संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए बिना या वायरस से संक्रमित देश की यात्रा किए बिना ही इसका शिकार हो जाता है। पिछले दो सप्ताह में जितनी बार भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रेस वार्ता की है, उसमें इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि भारत में अभी तीसरा चरण नहीं आया है। और चौथा चरण होता है, जब संक्रमण स्थानीय स्तर पर महामारी का रूप ले लेता है।
तीसरे चरण यानी कम्युनिटी ट्रांसमिशन से निपटने के लिए कितना तैयार है भारत?
कोरोना वायरस से निपटने के लिए भारत के प्रयासों की सराहना विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कर चुका है। जब ये बीमारी चीन तक ही सीमित थी, तब ही WHO की रिजनल डायरेक्ट, साउथ इस्ट एशिया, पूनम खेत्रपाल सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री को तीन चिट्ठियों के जरिए आगाह किया था।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिट्ठी में कोरोना से निपटने के लिए क्या ज़रूरी क़दम हर देश को उठाने चाहिए उसका भी जिक्र किया था। उसी दिशा निर्देश का पालन करते हुए भारत सरकार के ना सिर्फ़ स्वास्थ्य मंत्रालय ने काम शुरू किया बल्कि केंद्र सरकार ने इसके लिए ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स का भी गठन किया।
टेस्टिंग की सुविधा
माना जा रहा है कि तीसरे चरण में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या इतनी बढ़ जाएगी कि भारत के पास जितने लैब हैं उनमें सभी लोगों के टेस्ट पूरे नहीं किए जा सकते। फिलहाल भारत सरकार के अनुसार देश में 70 से ज़्यादा टेस्टिंग यूनिट हैं जो आईसीएमआर के अंतर्गत काम कर रहे हैं।
आईसीएमआर के महानिदेशक डॉक्टर बलराम भार्गव के मुताबिक इस हफ़्ते के अंत तक क़रीब 50 और सरकारी लैब कोविड-19 की जाँच के लिए शुरू होंगे। कोविड-19 की जांच के लिए भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन से करीब 10 लाख किट और मांगी हैं।
आईसीएमआर ने यह भी दावा किया है कि 23 मार्च तक भारत में दो ऐसे लैब तैयार हो जाएंगे जहाँ 1400 टेस्ट रोज हो सकेंगे। इससे तीन घंटे के भीतर कोविड-19 की जाँच की जा सकेगी। इस तरह की कुछ अन्य मशीनें भी भारत सरकार ने विदेश से मंगवाई हैं। अमरीका और जापान के पास इस तरह की मशीने हैं जिनसे एक घंटे में कोविड-19 की जांच की जा सकती है।
प्राइवेट लैब की तैयारी
भारत अगर कोरोना संक्रमण के तीसरे चरण में पहुंचता है तो ऐसा माना जा रहा है कि इस स्थिति से निपटने के लिए प्राइवेट लैब में भी कोरोना के जांच की जरूरत पड़ेगी। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉक्टर बलराम भार्गव के मुताबिक़ पिछले दिनों प्राइवेट लैब्स ने ऐसी इच्छा जताई है कि वो कोरोना संक्रमण के तीसरे चरण में सरकार के साथ मिल कर काम करना चाहते हैं।
लेकिन इस जांच के लिए किट की उन्हें जरूरत पड़ेगी। जो लैब्स सरकार के साथ संपर्क में हैं उनमें से एक हैं डॉ. अरविंद लाल, लाल पैथ लैब के मालिक। उनके मुताबिक सरकार से बातचीत चल रही है कि एक टेस्ट पर कितना खर्च आएगा, प्राइवेट लैब इसके लिए लोगों से पैसा लेगी या सरकार उन्हें इस जांच के लिए मुफ्त में किट मुहैया कराएगी। लेकिन इतना तय है कि सरकार प्राइवेट लैब्स के साथ इस विषय पर बातचीत कर रही है।
इस बारे में आईसीएमआर की बातचीत कुछ एनएबीएल सर्टिफाइड लैब के साथ चल रही है। सरकार ने इस बारे में दिशा निर्देश भी जारी किए हैं कि अगर किसी प्राइवेट अस्पताल या लैब में ऐसे संक्रमित व्यक्ति की पहचान होती है तो उसकी रिपोर्ट तुंरत सरकार के रजिस्टर्ड नंबर पर दिया जाए।