देशभर में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 के हल्के लक्षणों के उपचार के लिए होम आइसोलेशन यानी घर पर देखभाल के उपायों को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। इस गाइडलाइन में लोगों को सलाह दी गई है कि कोरोना के लक्षण नजर आने पर घबराएं नहीं, क्योंकि अधिकतर लोग अपनी देखभाल के उपाय करके घर में ही रहकर संक्रमण से ठीक सकते हैं। कहा गया है कि संक्रमण का पहला लक्षण नजर आते ही सबसे पहले तो लोगों को घर में ही आइसोलेट हो जाना चाहिए। उसके बाद क्या करना चाहिए, आइए जानते हैं इसके बारे में...
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सलाह: कोरोना मरीज घर पर कैसे करें अपना इलाज? स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी की नई गाइडलाइन
Fri, 30 Apr 2021 06:30 PM IST
सोनू शर्मा
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Fri, 30 Apr 2021 06:30 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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होम आइसोलेशन में क्या करें?
- नई गाइडलाइन के मुताबिक, मरीजों को बुखार, खांसी और नाक बहने जैसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर की सलाह पर इलाज शुरू कर देना चाहिए। मरीजों को गर्म पानी से गरारा करना चाहिए और साथ ही दिन में दो बार भाप लेने की भी सलाह दी गई है।
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- फोटो : Pixabay
- नई गाइडलाइन के मुताबिक, मरीजों को लगातार अपने डॉक्टर से संपर्क में रहना चाहिए और किसी भी गंभीर परिस्थिति में तुरंत डॉक्टर को इसकी सूचना देनी चाहिए। अगर कोरोना मरीज पहले से किसी बीमारी से पीड़ित हैं, तो डॉक्टर से सलाह के बाद उस बीमारी की दवा जारी रख सकते हैं।
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बुखार होने पर क्या करें?
- गाइडलाइन में बताया गया है कि बुखार होने पर डॉक्टर की सलाह पर पैरासिटामोल लेना चाहिए, लेकिन अगर दिन में चार बार पैरासिटामोल (650 एमजी) लेने के बाद भी बुखार कम नहीं हो रहा है, तो मरीज को तत्काल अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेट्री ड्रग (NSAID), जैसे कि नेप्रोक्सेन (250 एमजी, दिन में दो बार) लेने की सलाह दे सकते हैं।
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और कौन सी दवाएं ले सकते हैं?
- गाइडलाइन के मुताबिक, डॉक्टर कोरोना मरीज को तीन से पांच दिनों के लिए आइवरमेक्टिन टैबलेट (200 mcg/kg, रोजाना एक बार खाली पेट) लेने की भी सलाह दे सकते हैं। अगर मरीज को बुखार और/या खांसी जैसे लक्षण पांच दिन के बाद भी बने रहते हैं, तो इन्हेलेशनल बुडेसोनाइड दिया जा सकता है। 800 एमसीजी की ये दवा 5 से 7 दिनों के लिए दिन में दो बार इनहेलर के माध्यम से मरीज को दी जा सकती है।