कोरोना वायरस पिछले तीन साल से अधिक समय से वैश्विक चिंता का कारण बना हुआ है। दुनियाभर में अब तक यह 69 करोड़ से अधिक लोगों को शिकार बना चुका है। भले ही इन दिनों कोरोना संक्रमण की रफ्तार काफी नियंत्रित है पर वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे हल्के में लेने की गलती नहीं की जानी चाहिए, वायरस में लगातार म्यूटेशन हो रहा है जिससे नए वैरिएंट्स का खतरा बना हुआ है।
कोरोना अलर्ट: चमगादड़ नहीं अब हिरणों से नए वैरिएंट्स के संक्रमण का खतरा, अध्ययन में बड़ा खुलासा
क्यों हो रहा है वैरिएंट में म्यूटेशन?
वैज्ञानिकों के लिए फिलहाल बड़ा सवाल यह था कि जब वैश्विक स्तर पर कोरोना की रफ्तार कम हो रही है, तो वैरिएंट में म्यूटेशन क्यों हो रहा है? इसे समझने के लिए एक बार फिर से जानवरों की आबादी में कोरोना संक्रमण का पता लगाना शुरू किया गया। इस दौरान अमेरिकी शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि यहां हर 10 में से करीब तीन हिरण कोरोना संक्रमित थे, जिससे स्पष्ट होता है कि वायरस अब इंसानों के साथ जानवरों के माध्यम से खुद को म्यूटेट कर रहा है।
हिरणों की बड़ी आबादी में संक्रमण का जोखिम
यहां जानना जरूरी है कि किसी की वायरस को जीवित रहने के लिए लगातार म्यूटेट होते रहना आवश्यक है और इसके लिए किसी स्रोत की जरूरत होती है। चूंकि इंसानों में वैक्सीनेशन और प्राकृतिक प्रतिरक्षा के कारण संक्रमण का जोखिम कम हो गया है, लिहाजा वायरस ने म्यूटेट होने के लिए इस बार हिरणों को अपना स्रोत बनाया है।
अमेरिकी कृषि विभाग के अनुसार, मनुष्यों के माध्यम से कम से कम 100 बार हिरणों में वायरस फैला है। नवंबर 2021 से अप्रैल 2022 के बीच अमेरिका के आधे हिस्से में 12,000 से अधिक हिरणों का परीक्षणों किया गया, जिससे पता चलता है कि हिरण लगभग हर वैरिएंट (अल्फा, गामा, डेल्टा सहित सभी प्रमुख वेरिएंट) के संपर्क में थे। अब भी हिरणों में संक्रमण का जोखिम अधिक है जहां से नए वैरिएंट्स के उभरने का जोखिम बना हुआ है।
घरेलू जानवर भी हो सकते हैं संक्रमण का स्रोत
शोधकर्ताओं ने बताया कि हिरण के अलावा, वायरस के कई वैरिएंट्स जंगली और घरेलू जानवरों में भी पाए गए हैं, जिनमें कुत्ते, शेर, मिंक, चूहे, ऊदबिलाव, गोरिल्ला और बिल्लियां भी शामिल हैं। सफेद पूंछ वाले हिरणों के अलावा मिंक और घरेलू बिल्लियों से इंसानों में वायरस के संचरण का संदेह है।
शोधकर्ताओं ने कहा- इस अध्ययन के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं क्योंकि जानवरों की आबादी कोरोना वायरस के लिए जलाशय की तरह हो सकती है, जिसमें वायरस गुप्तरूप से फैल रहा है। अगर यहां से कोई अति संक्रामक वैरिएंट उभरता है तो इससे एक बार फिर दुनियाभर में कोरोना के मामलों के बढ़ने का खतरा हो सकता है।
क्या कहते हैं शोधकर्ता?
मिसौरी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और अध्ययन के लेखकों में से एक प्रोफेसर शिउ-फेंग हेनरी वान कहते हैं, हिरण, बिल्ली-कुत्ते नियमित रूप से मनुष्यों के संपर्क में रहते हैं। हमें भविष्य में कोरोना के जोखिमों के लिए इन स्रोतों को अनदेखा नहीं करना चाहिए। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि हिरण, मानव भोजन अपशिष्ट, मास्क या अन्य अपशिष्ट उत्पादों से वायरस के संपर्क में आ सकते हैं।
जानवरों से इंसानों में संक्रमण और यहां से नए वैरिएंट्स के म्यूटेशन को लेकर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। चमगादड़ों के बाद अब हमारे पास हिरण भी एक जानवर है जो वायरस के संक्रमण का स्रोत हो सकता है।
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स्रोत और संदर्भ
Transmission of SARS-CoV-2 in free-ranging white-tailed deer in the United States
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