इस कोरोना काल में आपने 'एयरबोर्न ट्रांसमिशन' के बारे में कई बार सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये एयरबोर्न ट्रांसमिशन आखिर होता क्या है? दरअसल, आसान शब्दों में कहें तो कोरोना वायरस का हवा में होना और उसके जरिये फैलना ही एयरबोर्न ट्रांसमिशन कहलाता है। कोरोना महामारी की शुरुआत में ही कई देशों के वैज्ञानिकों ने यह दावा किया था कि कोरोना वायरस हवा के जरिये भी फैलता है। हालांकि उस समय इसके पर्याप्त सबूत नहीं मिले थे, इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसपर कुछ खास ध्यान नहीं दिया था, लेकिन अब 'द लैंसेट' के नए अध्ययन में यह दावा किया गया है कि कोरोना वायरस हवा में भी फैलता है और इस दावे को साबित करने के लिए सबूत भी पेश किए गए हैं।
कोरोना वायरस: क्या होता है एयरबोर्न ट्रांसमिशन, बंद कमरे में क्यों है संक्रमण का खतरा ज्यादा?
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कोरोना वायरस के फैलने को लेकर आमतौर पर यही मान्यता रही है कि यह संक्रमित मरीज के खांसने, छींकने या बोलने के दौरान नाक या मुंह से निकले ड्रॉपलेट्स के जरिये या फिर संक्रमित सतहों को छूने से फैलता है, लेकिन नए अध्ययन में कहा गया है कि ड्रॉपलेट्स की बजाय एयरबोर्न यानी हवा के जरिये संक्रमण फैलना ज्यादा आसान है। अध्ययन के दौरान यह पाया गया है कि क्वारंटीन होटलों में एक-दूसरे से सटे कमरों में रह रहे लोगों के बिना एक-दूसरे के कमरे में गए भी संक्रमण फैल गया।
एयरबोर्न का असली मतलब क्या?
- हालांकि मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन के डॉ. फहीम यूनुस ने एक ट्वीट के माध्यम से कहा कि एयरबोर्न का मतलब यह नहीं है कि बाहर की हवा वायरस से दूषित हो गई है, बल्कि इसका मतलब यह है कि वायरस हवा में मौजूद हो सकता है, खासकर इनडोर वातावरण यानी बंद कमरे में, और यह खतरा पैदा कर सकता है। दरअसल, इसकी वजह ये है कि बंद कमरे में हवा का बहाव नहीं होता, जैसा खुले में होता है। ऐसी हवा स्थिर रहती है और दूषित हो जाती है, जिससे अन्य लोग भी संक्रमित हो जाते हैं।
Lancet study:
— Faheem Younus, MD (@FaheemYounus) April 17, 2021
“Airborne” does NOT mean outside air is contaminated. It means the virus may remain suspended in the air — typically in indoor settings —and pose a risk
Our parks and beaches are still the safest places to enjoy without a mask (provided 6 ft distance)
विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण का कारण वही हवा बन सकती है, जिसमें कोरोना वायरस मौजूद हो। अस्पताल, होटल के वातावरण में भले ही संक्रमण के फैलने की संभावना हो, लेकिन खुली या ताजी हवा में ऐसी संभावना नहीं रह जाती है। हालांकि यह स्पष्ट रूप से कहने के लिए इसपर अभी और शोध की जरूरत है।
क्या बिना मास्क के भी घूम सकते हैं?
डॉ. फहीम यूनुस ने ट्वीट के जरिये बताया है कि पार्क या फिर बीच पर यानी समुद्र के किनारे बिना मास्क के भी घूमा जा सकता है, ये सुरक्षित जगह हैं, लेकिन इस दौरान सुरक्षित शारीरिक दूरी का जरूर ध्यान रखना है, यानी एक दूसरे से छह फीट की दूरी बनाए रखनी है।