फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कोरोना वायरस: क्या होता है एयरबोर्न ट्रांसमिशन, बंद कमरे में क्यों है संक्रमण का खतरा ज्यादा?

Sun, 18 Apr 2021 04:05 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Sun, 18 Apr 2021 04:05 PM IST
विज्ञापन
Coronavirus Airborne transmission covid 19 study lancet
कोरोना वायरस - फोटो : Pixabay

इस कोरोना काल में आपने 'एयरबोर्न ट्रांसमिशन' के बारे में कई बार सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये एयरबोर्न ट्रांसमिशन आखिर होता क्या है? दरअसल, आसान शब्दों में कहें तो कोरोना वायरस का हवा में होना और उसके जरिये फैलना ही एयरबोर्न ट्रांसमिशन कहलाता है। कोरोना महामारी की शुरुआत में ही कई देशों के वैज्ञानिकों ने यह दावा किया था कि कोरोना वायरस हवा के जरिये भी फैलता है। हालांकि उस समय इसके पर्याप्त सबूत नहीं मिले थे, इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसपर कुछ खास ध्यान नहीं दिया था, लेकिन अब 'द लैंसेट' के नए अध्ययन में यह दावा किया गया है कि कोरोना वायरस हवा में भी फैलता है और इस दावे को साबित करने के लिए सबूत भी पेश किए गए हैं। 

Coronavirus Airborne transmission covid 19 study lancet
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कोरोना वायरस के फैलने को लेकर आमतौर पर यही मान्यता रही है कि यह संक्रमित मरीज के खांसने, छींकने या बोलने के दौरान नाक या मुंह से निकले ड्रॉपलेट्स के जरिये या फिर संक्रमित सतहों को छूने से फैलता है, लेकिन नए अध्ययन में कहा गया है कि ड्रॉपलेट्स की बजाय एयरबोर्न यानी हवा के जरिये संक्रमण फैलना ज्यादा आसान है। अध्ययन के दौरान यह पाया गया है कि क्वारंटीन होटलों में एक-दूसरे से सटे कमरों में रह रहे लोगों के बिना एक-दूसरे के कमरे में गए भी संक्रमण फैल गया। 

Coronavirus Airborne transmission covid 19 study lancet
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

एयरबोर्न का असली मतलब क्या? 

  • हालांकि मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन के डॉ. फहीम यूनुस ने एक ट्वीट के माध्यम से कहा कि एयरबोर्न का मतलब यह नहीं है कि बाहर की हवा वायरस से दूषित हो गई है, बल्कि इसका मतलब यह है कि वायरस हवा में मौजूद हो सकता है, खासकर इनडोर वातावरण यानी बंद कमरे में, और यह खतरा पैदा कर सकता है। दरअसल, इसकी वजह ये है कि बंद कमरे में हवा का बहाव नहीं होता, जैसा खुले में होता है। ऐसी हवा स्थिर रहती है और दूषित हो जाती है, जिससे अन्य लोग भी संक्रमित हो जाते हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Coronavirus Airborne transmission covid 19 study lancet
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण का कारण वही हवा बन सकती है, जिसमें कोरोना वायरस मौजूद हो। अस्पताल, होटल के वातावरण में भले ही संक्रमण के फैलने की संभावना हो, लेकिन खुली या ताजी हवा में ऐसी संभावना नहीं रह जाती है। हालांकि यह स्पष्ट रूप से कहने के लिए इसपर अभी और शोध की जरूरत है। 

विज्ञापन
Coronavirus Airborne transmission covid 19 study lancet
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

क्या बिना मास्क के भी घूम सकते हैं? 

डॉ. फहीम यूनुस ने ट्वीट के जरिये बताया है कि पार्क या फिर बीच पर यानी समुद्र के किनारे बिना मास्क के भी घूमा जा सकता है, ये सुरक्षित जगह हैं, लेकिन इस दौरान सुरक्षित शारीरिक दूरी का जरूर ध्यान रखना है, यानी एक दूसरे से छह फीट की दूरी बनाए रखनी है। 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed