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कामयाबी: इस आयुर्वेदिक दवा से सात दिनों में ठीक हो सकते हैं कोरोना के लक्षण, अध्ययन में दिखे प्रमाण

Sun, 20 Jun 2021 06:26 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sun, 20 Jun 2021 06:26 PM IST
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corona symptoms can be cured in seven days by ayush-64 medicine, expert claims
कोरोना की आयुर्वेदिक दवा - फोटो : Pixabay/Amar Ujala

दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के मामलों को डेढ़ साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। इसमें कोरोना की आई दो लहरों ने लोगों को स्पष्ट रूप से समझा है- सेहत है संग तो ही जीत सकते हैं हर जंग। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान लोगों को संक्रमण की गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ा। एक समय देश में अपर्याप्त मालूम हो रही चिकित्सा सुविधाओं के बीच सदियों पुरानी आयुर्वेद चिकित्सा ने लोगों का ध्यान न सिर्फ अपनी ओर आकर्षित किया, साथ ही इससे लोगों को लाभ भी मिला।


आयुर्वेद वर्षों से स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं के निवारण और लोगों की प्रतिरोधक क्षमता को ठीक करने की दिशा में काम कर रहा है। कोरोना के विकट अंधाकर में इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति ने लोगों को आशा की नई किरण दिखाई। कोरोना काल में आयुर्वेद विशेषज्ञों ने अनुसंधान और तमाम अध्ययनों के आधार पर एक ऐसी दवा पेश की है, जिससे मात्र एक सप्ताह में कोरोना के लक्षणों को ठीक करने का दावा किया जा रहा है। खास बात यह है कि इससे संबंधित किए गए तमाम अध्ययनों में भी वैज्ञानिकों को बेहतर परिणाम देखने को मिले हैं। आइए इस दवा के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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आयुर्वेद में कोरोना का इलाज - फोटो : social media
कोरोना और आयुर्वेद
कोरोना में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति काफी कारगर साबित हो सकती है। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की निदेशक, डॉ तनुजा नेसरी बताती हैं कि आयुर्वेद में कई ऐसी औषधियां हैं जो स्वाद में तो कड़वी होती हैं लेकिन कोरोना के उपचार में काफी कारगर साबित हो रही हैं। तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, नीम, मुलेठी जैसी औषधियां न सिर्फ इम्यूनिटी को बढ़ाने में सहायक हैं, साथ ही इनमें मौजूद एंटीवायरल गुण संक्रमण को कम करने में भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इन्हीं औषधियों पर आधारित अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों ने कोरोना काल में आयुष-64 दवा लोगों के लिए उपलब्ध कराई, जिसके अद्भुत परिणाम देखने को मिले।
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कोरोना की दवा आयुष-64 - फोटो : @PIB_India

आयुष-64 दवा कोरोना में लाभकारी
सीसीआरएएस के निदेशक जनरल डॉ एन श्रीकांत ने बताया कि हाल के वर्षों में आयुष मंत्रालय ने प्रमाण आधारित चिकित्सा प्रस्तुत करने की दिशा में तेजी से काम किया है। आयुष मंत्रालय ने आयुष रिसर्च एंड डवेलपमेंट टास्क फोर्स का गठन किया है, इसे प्रो. भूषण पटवर्धन के नेतृत्व में संचालित किया जा रहा है। इस कमेटी ने कई सारी औषधियों का परीक्षण किया है। इसी क्रम में कोरोना के रोगियों के लिए आयुष-64 दवा पेश की गई। 

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आयुष 64 के लाभ - फोटो : Social media

6-7 दिनों में कम हो सकते हैं लक्षण
डॉ एन श्रीकांत बताते हैं कि आयुष-64 को लेकर किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि इस दवा का सेवन कोरोना के एसिम्टोमैटिक से लेकर माइल्ड-माडरेट रोगियों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। रोगियों को स्टैंडर्ड केयर के साथ आयुष-64 दवा देने से काफी लाभ के साक्ष्य मिले हैं। इस दवा को लेने से 6-7 दिनों में कोविड-19 के लक्षणों को कम होते देखा गया है। एक सप्ताह तक इस दवा का सेवन करने वाले लोगों का आरटी-पीसीआर भी निगेटिव देखने को मिला।

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पोस्ट कोविड समस्याओं का भी आयुर्वेद में इलाज - फोटो : Social media

पोस्ट कोविड लाभ
डॉ एन श्रीकांत बताते हैं कि कई संस्थानों के साथ मिलकर कोरोना के इलाज के संबंध में अब तक 122 क्लीनिकल स्टडी किए जा चुके हैं। इसमें कोविड-19 जैसे रोगों की रोकथाम और मैनेजमेंट से संबंधित 60 अध्ययन शामिल हैं। इन अध्ययनों के दौरान रोगियों में आयुष-64 दवा के स्पष्ट लाभ देखने को मिले। इस दवा को लेकर किए गए अध्ययनों का प्री-प्रिंट भी प्रकाशित किया जा चुका है। खास बात यह है कि इस दवा से न सिर्फ कोरोना रोग को ठीक किया जा सकता है, साथ ही कोरोना के बाद रोगियों को होने वाली तमाम समस्याओं ( नींद और पेट की समस्या और तनाव-घबराहट) को भी इससे दूर किया जा सकता है।

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नोट:
यह लेख अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की निदेशक, डॉ तनुजा नेसरी और सीसीआरएएस के निदेशक जनरल डॉ एन श्रीकांत द्वारा से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।  आयुष मंत्रालय और राष्ट्रीय आयुर्वेदिक विद्यापीठ के साथ मिलकर  किए गए पहल के क्रम में आयोजित वेबिनार में विशेषज्ञों का पैनल शामिल हुआ। इस लेख उसी चर्चा का अंश है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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