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Copper Bottle Toxicity: क्या तांबे की बोतल में डिटॉक्स वाटर रखना सही है? जानिए एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं
Tue, 14 Jul 2026 05:15 PM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Tue, 14 Jul 2026 05:15 PM IST
सार
Copper Bottle Toxicity: तांबे की बोतल में पानी पीने के फायदे तो आप सभी जानते होंगे। पर, अगर आप डिटॉक्स वाटर भी तांबे की बोतल में पीते हैं तो इस खबर को अवश्य पढ़ें।
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तांबे की बोतल इस्तेमाल करते समय रखें ये सावधानियां
- फोटो : AI
Copper Bottle Toxicity: तांबे की बोतल में रखा पानी पीना भारत में लंबे समय से स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता रहा है। आयुर्वेद में भी तांबे के पात्र में रखा पानी सुबह खाली पेट पीने की सलाह दी जाती है। इससे शरीर स्वस्थ रहता है।
तांबे की बोतल इस्तेमाल करते समय रखें ये सावधानियां
- फोटो : AI
क्या तांबे की बोतल में डिटॉक्स वाटर रखना सही है?
तांबे की बोतल में सादा पानी रखना आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इसमें नींबू, संतरा, आंवला, सिरका या अन्य अम्लीय चीजें डालकर डिटॉक्स वाटर बनाना उचित नहीं माना जाता। अम्लीय पदार्थ तांबे के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया कर सकते हैं, जिससे पानी में कॉपर की मात्रा बढ़ सकती है।
तांबे की बोतल में सादा पानी रखना आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इसमें नींबू, संतरा, आंवला, सिरका या अन्य अम्लीय चीजें डालकर डिटॉक्स वाटर बनाना उचित नहीं माना जाता। अम्लीय पदार्थ तांबे के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया कर सकते हैं, जिससे पानी में कॉपर की मात्रा बढ़ सकती है।
तांबे की बोतल इस्तेमाल करते समय रखें ये सावधानियां
- फोटो : AI
क्यों हो सकता है नुकसान?
1. एसिड और तांबे की प्रतिक्रिया
डिटॉक्स वाटर में अक्सर नींबू, संतरा, आंवला, कीवी या सेब जैसे फल मिलाए जाते हैं। इनमें प्राकृतिक एसिड मौजूद होता है। जब ऐसे अम्लीय पदार्थ लंबे समय तक तांबे की बोतल के संपर्क में रहते हैं, तो तांबे की सतह के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया हो सकती है। इससे पानी में कॉपर की मात्रा सामान्य से अधिक घुल सकती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ तांबे के बर्तन में केवल सादा पानी रखने की सलाह देते हैं, जबकि डिटॉक्स वाटर के लिए कांच या स्टेनलेस स्टील के बर्तन को बेहतर विकल्प माना जाता है।
1. एसिड और तांबे की प्रतिक्रिया
डिटॉक्स वाटर में अक्सर नींबू, संतरा, आंवला, कीवी या सेब जैसे फल मिलाए जाते हैं। इनमें प्राकृतिक एसिड मौजूद होता है। जब ऐसे अम्लीय पदार्थ लंबे समय तक तांबे की बोतल के संपर्क में रहते हैं, तो तांबे की सतह के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया हो सकती है। इससे पानी में कॉपर की मात्रा सामान्य से अधिक घुल सकती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ तांबे के बर्तन में केवल सादा पानी रखने की सलाह देते हैं, जबकि डिटॉक्स वाटर के लिए कांच या स्टेनलेस स्टील के बर्तन को बेहतर विकल्प माना जाता है।
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तांबे की बोतल इस्तेमाल करते समय रखें ये सावधानियां
- फोटो : AI
2. कॉपर टॉक्सिसिटी का खतरा
कॉपर शरीर के लिए एक जरूरी मिनरल है, लेकिन इसकी मात्रा संतुलित होना बेहद आवश्यक है। यदि लंबे समय तक शरीर में जरूरत से ज्यादा कॉपर पहुंचता रहे, तो कॉपर टॉक्सिसिटी का खतरा बढ़ सकता है। इसकी वजह से शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। अधिक कॉपर का सेवन लिवर और किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। इसलिए तांबे की बोतल में नींबू पानी या अन्य खट्टे पेय लंबे समय तक रखने से बचना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को पहले से लिवर या किडनी से जुड़ी समस्या है, तो उसे तांबे के बर्तनों का नियमित उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर होता है।
कॉपर शरीर के लिए एक जरूरी मिनरल है, लेकिन इसकी मात्रा संतुलित होना बेहद आवश्यक है। यदि लंबे समय तक शरीर में जरूरत से ज्यादा कॉपर पहुंचता रहे, तो कॉपर टॉक्सिसिटी का खतरा बढ़ सकता है। इसकी वजह से शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। अधिक कॉपर का सेवन लिवर और किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। इसलिए तांबे की बोतल में नींबू पानी या अन्य खट्टे पेय लंबे समय तक रखने से बचना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को पहले से लिवर या किडनी से जुड़ी समस्या है, तो उसे तांबे के बर्तनों का नियमित उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर होता है।
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तांबे की बोतल इस्तेमाल करते समय रखें ये सावधानियां
- फोटो : AI
3. पेट से जुड़ी समस्याएं
जरूरत से ज्यादा कॉपर शरीर में पहुंचने पर सबसे पहले असर पाचन तंत्र पर दिखाई दे सकता है। इससे मतली, उल्टी, पेट दर्द, दस्त, पेट में ऐंठन और जलन जैसी परेशानियां हो सकती हैं। कुछ लोगों को मुंह में धातु जैसा स्वाद भी महसूस हो सकता है। अगर तांबे की बोतल में लंबे समय तक रखा खट्टा पेय पीने के बाद ऐसी समस्याएं बार-बार होने लगें, तो उसका सेवन तुरंत बंद कर देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। सुरक्षित रहने के लिए डिटॉक्स वाटर हमेशा कांच या स्टेनलेस स्टील की बोतल में ही स्टोर करें।
जरूरत से ज्यादा कॉपर शरीर में पहुंचने पर सबसे पहले असर पाचन तंत्र पर दिखाई दे सकता है। इससे मतली, उल्टी, पेट दर्द, दस्त, पेट में ऐंठन और जलन जैसी परेशानियां हो सकती हैं। कुछ लोगों को मुंह में धातु जैसा स्वाद भी महसूस हो सकता है। अगर तांबे की बोतल में लंबे समय तक रखा खट्टा पेय पीने के बाद ऐसी समस्याएं बार-बार होने लगें, तो उसका सेवन तुरंत बंद कर देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। सुरक्षित रहने के लिए डिटॉक्स वाटर हमेशा कांच या स्टेनलेस स्टील की बोतल में ही स्टोर करें।