पिछले करीब तीन वर्षों से हम सभी COVID-19 के कारण होने वाली गंभीर समस्याओं से भली भांति परिचित हैं। कोरोनावायरस के कारण होने वाली यह समस्या गंभीर श्वसन संक्रमण के साथ शरीर के कई अन्य अंगों को भी प्रभावित करती हुई देखी गई। फिलहाल वैश्विक स्तर पर इसका जोखिम कम देखा जा रहा है। COVID के जोखिमों से हम सभी परिचित हैं पर क्या आप CVID की समस्या के बारे में जानते हैं?
Health Alert: COVID की तरह ही खतरनाक है CVID रोग, दोनों कमजोर इम्युनिटी की समस्याएं, जानिए विस्तार से
कॉमन वेरिएबल इम्युनोडेफिशिएंसी (सीवीआईडी) क्या है?
कॉमन वेरिएबल इम्युनोडेफिशिएंसी (सीवीआईडी) के कारण चूंकि शरीर की इम्युनिटी काफी कमजोर हो जाती है, ऐसे में आपको बार-बार संक्रमण होने का खतरा हो सकता है। ऐसे लोगों में कान, साइनस और श्वसन तंत्र में बार-बार संक्रमण होते रहने के साथ पाचन संबंधी विकार, ऑटोइम्यून विकार, रक्त विकार और कैंसर का भी जोखिम रहता है। सीवीआईडी आपको आनुवांशिक रूप में भी हो सकता है या फिर जीवनकाल के दौरान भी विकसित हो सकती है।
सीवीआईडी एक दुर्लभ समस्या है, 25,000 लोगों में से लगभग एक में ये होता है। यह स्थिति बच्चों या किशोरों में भी दिखाई दे सकती है।
कैसे होते हैं इसके लक्षण?
सीवीआईडी के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग प्रकार के हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं। चूंकि यह प्रतिरक्षा प्रणाली में कमजोरी की समस्या है ऐसे में इसके रोगियों में बार-बार संक्रमण होने का खतरा रहता है। इसके अलावा कुछ लक्षणों पर भी ध्यान देते रहना चाहिए।
- सांस की परेशानी-क्रोनिक खांसी।
- दस्त, जिसके कारण वजन कम हो सकता है।
- कान और साइनस का बार-बार संक्रमण होना।
- निमोनिया या बार-बार फेफड़ों में संक्रमण होना।
- डायबिटिक रोगियों में यह समस्या घावों को भरने में और अधिक देरी या फिर बार-बार यूटीआई का कारण बन सकती है।
क्यों होती है सीवीआईडी?
शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि ज्यादातर मामलों में, आनुवंशिक उत्परिवर्तन के कारण इस समस्या का जोखिम होता है। सीवीआईडी प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़े जीन में दोष के कारण होती है। इन दोषों के कारण शरीर में इम्युनोग्लोबुलिन जी (आईजीजी) सहित इम्युनोग्लोबुलिन नामक प्रोटीन के उत्पादन की मात्रा कम हो जाती है। रक्त में आईजीजी का स्तर कम होना शरीर के लिए संक्रमण से लड़ना मुश्किल बना सकती है।
यदि आपमें किसी वैक्सीन के प्रति असामान्य प्रतिक्रिया की समस्या होती है या फिर प्रतिरक्षा से संबंधित कोई दिक्कत है तो डॉक्टर इसे सीवीआईडी को संभावित कारण के रूप में देख सकते हैं।
सीवीआईडी का इलाज और बचाव
जिन लोगों में सीवीआईडी का पता चलता है संक्रमण को रोकने के लिए डॉक्टर इम्युनोग्लोबुलिन (आईजीजी) रिप्लेसमेंट थेरेपी की सलाह दे सकते हैं। हालांकि यह थेरेपी जीवन भर चलती रहती है, यह एक बार का उपचार नहीं है। वहीं सीवीआईडी से संबंधित संक्रमणों के इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स दी जा सकती है।
चूंकि यह स्थिति आनुवंशिक विकार के कारण अधिक होती है, ऐसे में इसके लिए रोकथाम नहीं किया जा सकता है। स्वस्थ आहार और दिनचर्या का पालन करके आप जोखिमों को कम कर सकते हैं।
----------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।