शरीर में सूजन की समस्या भले ही काफी आम सी लगती है, पर ये असल में ये सेहत के लिए गंभीर खतरों का कारण बन सकती है। शरीर में कहीं चोट लगने या संक्रमण होने के बाद स्वाभाविक रूप से वह हिस्सा सूज जाता है, ये शरीर की सुरक्षात्मक प्रकिया का हिस्सा है।
हेल्थ अलर्ट: शरीर में लगातार बनी सूजन कहीं खतरे की घंटी तो नहीं? जानिए क्रॉनिक इंफ्लेमेशन से क्या होता है
क्रॉनिक इंफ्लेमेशन यानी लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन शरीर के ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे डायबिटीज, दिल की बीमारी, फैटी लिवर और ऑटोइम्यून रोगों का खतरा हो सकता है। सीआरपी और ईएसआर जैसे टेस्ट से सूजन के बारे में पता चल सकता है।
अध्ययनों में लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन को कई क्रॉनिक बीमारियों का प्रमुख कारण पाया गया है। वैसे तो सूजन का होना ही अपने आप में किसी खास बीमारी का संकेत नहीं है, पर इस स्थिति पर सभी लोगों को गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए।
पहले क्रॉनिक इंफ्लेमेशन के बारे में जान लीजिए
जब शरीर की सूजन वाली प्रतिक्रिया लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसे क्रॉनिक इंफ्लेमेशन कहा जाता है। यह कई बार बिना स्पष्ट लक्षणों के भी हो सकती है। इसके कारण कुछ लोगों में थकान, जोड़ों में दर्द, अकड़न या बार-बार अस्वस्थ महसूस करने जैसी शिकायतें हो सकती हैं।
किन बीमारियों का हो सकता है खतरा?
क्रॉनिक इंफ्लेमेशन कई प्रकार की बीमारियों का जोखिम बढ़ाने वाली हो सकती है। इसके जोखिमों को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहना चाहिए।
- क्रॉनिक इंफ्लेमेशन से टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम हो सकता है। मोटापा और लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है जिससे डायबिटीज हो सकती है।
- सूजन की स्थिति दिल की बीमारियों का भी कारण हो सकती है। इंफ्लेमेशन से धमनियों में प्लाक बनने का जोखिम बढ़ सकता है।
- इंफ्लेमेशन की स्थिति मेटाबॉलिक फैटी लिवर का जोखिम भी बढ़ा देती है जिससे कुछ लोगों में आगे चलकर फाइब्रोसिस हो सकता है।
- अध्ययनों में लंबे समय तक बने रहने वाले सूजन को कुछ कैंसर का जोखिम बढ़ाने वाला भी पाया गया है।
शरीर में सूजन की समस्या से बचे रहने के लिए क्या करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शरीर में सूजन की समस्या से बचने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना सबसे जरूरी है।
- इसके लिए सबसे पहले खानपान पर ध्यान दें। अपनी डाइट में हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज और नट्स-सीड्स को शामिल करें। इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और पोषक तत्व शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
- चीनी, ज्यादा नमक, तली-भुनी चीजों और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें।
- इसके अलावा रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलें या हल्का व्यायाम करें।
- पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित रखने के लिए योग और मेडिटेशन जैसे उपाय करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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