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चीन ने लोगों को मानसिक बीमारियों से बचाने के लिए उठाया बड़ा कदम, ऐसे कंट्रोल होगा अब मोबाइल फोन

Wed, 16 Aug 2023 01:25 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Wed, 16 Aug 2023 01:25 PM IST
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China Wants to Limit Children Smartphone Use, know how smartphone affects our lives
स्मार्टफोन के इस्तेमाल को नियंत्रित करने की चीन की पहल - फोटो : iStock

चीन ने हाल ही में स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक ऐसा निर्णय लिया है, जिसकी पूरी दुनिया में तारीफ हो रही है।  देश के साइबर स्पेस रेगुलेटर ने बच्चों में स्मार्टफोन्स के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के प्रस्ताव का एलान किया है। इसके तहत स्मार्टफोन्स को माइनर मोड पर डाला जा सकेगा, जिसमें 18 साल से कम उम्र के लोग दो घंटे से अधिक समय तक स्मार्टफोन्स का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। लोगों की इसपर प्रतिक्रिया को जानने के लिए फिलहाल इस नियमन को दो सितंबर तक लागू रखा जाएगा।



बेहतर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए स्मार्टफोन्स के उपयोग को कम करने को लाभकारी माना जा रहा है। अध्ययनों से पता चलता है कि स्मार्टफोन पर अधिक समय बिताना बच्चों में अवसाद और चिंता की समस्या को बढ़ाने वाला हो सकता है। मानसिक स्वास्थ्य के अलावा कई प्रकार की  शारीरिक समस्याओं के जोखिमों को भी स्मार्टफोन्स के अधिक इस्तेमाल से जोड़कर देखा जाता रहा है। 

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मोबाइल फोन्स क अधिक इस्तेमाल हो सकता है हानिकारक - फोटो : istock

स्मार्टफोन्स के इस्तेमाल के दुष्प्रभाव

ब्रिटिश साइकोलॉजिकल सोसायटी के अनुसार, मोबाइल फोन्स और सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले बच्चों-किशोरों में आत्मसम्मान की कमी, चिंता, अवसाद और खराब गुणवत्ता वाली नींद की समस्या अधिक देखी जाती रही है। बच्चो में स्मार्टफोन्स के इस्तेमाल को कम करके भविष्य में उन्हें इन समस्याओं से सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, माता-पिता के रूप में, हमें अपने बच्चों को मोबाइल फोन्स-सोशल मीडिया के खतरों के बारे में बताना होगा और उन्हें इससे बचाव को लेकर सतर्क भी करना होगा। 

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बच्चों में मोबाइल फोन्स की बढ़ती आदत - फोटो : istock

कोविड महामारी ने बढ़ा दिया है मोबाइल का उपयोग

अध्ययनकर्ताओं की टीम ने पाया कि वैसे तो पहले से ही बच्चों के साथ लगभग सभी आयुवर्ग के लोगों में स्मार्टफोन की बढ़ी हुई लत देखी जा रही है पर कोरोना महामारी के दौरान यह जोखिम काफी बढ़ गया है। कनाडा मेकगिल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में  पाया कि दुनियाभर के कई देशों में स्मार्टफोन का उपयोग काफी तेजी से बढ़ा है। चीन, मलेशिया और सऊदी अरब इनमें सबसे आगे हैं। बच्चों के अलावा वयस्कों में भी स्मार्टफोन का उपयोग अधिक देखा जा रहा है। 

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मस्तिष्क की सेहत पर स्मार्टफोन के दुष्प्रभाव - फोटो : pixabay

हो सकते हैं कई दीर्घकालिक नकारात्मक असर

तीन साल से अधिक समय तक जारी कोरोना महामारी के दौरान बढ़े स्क्रीन का उपयोग, खासकर बच्चों के बीच, को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ अलर्ट कहते हैं। जामा पीडियाट्रिक्स में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, महामारी की शुरुआत के बाद से बच्चों द्वारा स्क्रीन पर बिताए जाने वाले औसत समय में 52 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बढ़ा हुआ स्क्रीन टाइम संपूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

स्मार्टफ़ोन का मस्तिष्क पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, स्वास्थ्य विशेषज्ञों को चिंता है कि इसका अत्यधिक उपयोग बच्चों के मस्तिष्क के विकास को प्रभावित करने वाला भी हो सकता है।

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नींद की गुणवत्त पर असर - फोटो : istock

नींद की गुणवत्ता हो जाती है प्रभावित

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप सभी चमकदार नीली रोशनी उत्सर्जित करते हैं। समस्या यह है कि नीली रोशनी आपके मस्तिष्क में मेलाटोनिन के उत्पादन को बाधित कर सकती है, जिसका सीधा असर आपकी नींद की गुणवत्ता पर देखा जाता है। जो लोग अधिक स्मार्टफोन्स या स्क्रीन का इस्तेमाल करत हैं उनका सर्कैडियन रिदम प्रभावित हो सकता है, जो कई प्रकार की शारीरिक समस्याओं जैसे हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग सहित कई गंभीर समस्याओं को बढ़ाने वाली हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी उम्र के लोगों को स्मार्टफोन्स का उपयोग कम करने की सलाह देते हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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