शरीर के किसी भी अंग में होने वाले दर्द को हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए, वहीं अगर यह दर्द आपकी छाती में है तो स्थिति को और भी गंभीरता से देखने की आवश्यकता है। आमतौर पर छाती में होने वाले दर्द को हृदय रोगों के प्रमुख कारण के तौर पर देखा जाता है, पर हर बार इसी समस्या को जिम्मेदार समझना सही नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हृदय रोगों के अलावा भी कई अन्य स्थितियों में आपकी छाती में दर्द की समस्या बनी रह सकती है। ऐसे में लक्षणों की पहचान करके स्थिति का सही निदान और समय पर इलाज किया जाना आवश्यक होता है। इसमें बरती गई किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।
सेहत की बात: सिर्फ हृदय रोग ही नहीं, इन वजहों से भी हो सकता है आपकी छाती में दर्द, लक्षणों को न करें अनदेखा
मांसपेशियों में सूजन की समस्या
पसलियों के आसपास की मांसपेशियों और टेंडेंट्स में सूजन के परिणामस्वरूप भी सीने में लगातार दर्द हो सकता है। यह दर्द आपकी गतिविधि के साथ बढ़ता जाता है। सूजन की समस्या के कई अंतर्निहित कारण हो सकते हैं, जिसका समय पर निदान और इलाज किया जाना आवश्यक होता है। यदि आपको कुछ दिनों से लगातार दर्द का अनुभव होता रहा है तो इस बारे में किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें।
पसलियों में चोट
किसी दुर्घटना या किसी भी तरह की चोट, पसलियों में दर्द का कारण बन सकती है, जिसे आमतौर पर छाती का सामान्य दर्द समझ लिया जाता है। चोट लगना, पसलियों के टूटने और फ्रैक्चर होने के कारण भी सीने में दर्द हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति की पसली टूटी हुई है तो उसे अत्यधिक दर्द महसूस हो सकता है। यह आपात स्थिति है जिसमें तुरंत डॉक्टरी मदद की आवश्यकता होती है।
पेप्टिक अल्सर की स्थिति में दर्द
पेप्टिक अल्सर, पेट की परत में घाव की समस्या होती है, ऐसी स्थिति में छाती में दर्द की समस्या होती रहती है। कई तरह की सामान्य ओवर-द-काउंटर दवाइयों की मदद से आमतौर पर पेप्टिक अल्सर के कारण होने वाले दर्द से राहत मिल सकता है। हालांकि बिना जांच या डॉक्टरी सहायता के स्थिति का सही अंदाजा लगा पाना कठिन हो सकता है, इसलिए समय पर इस बारे में किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें।
अस्थमा रोगियों में दर्द
अस्थमा एक सामान्य श्वास विकार है जो वायुमार्ग में सूजन के कारण होती है। इस स्थिति में भी सीने में दर्द की समस्या बनी रह सकती है। दर्द के अलावा अस्थमा के कारण सांस की तकलीफ, खांसी और घरघराहट जैसी दिकक्तों का होना भी सामान्य है। अस्थमा के रोगियों को विशेष देखभाल और सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है, क्योंकि कुछ सामान्य सी स्थितियों में यह समस्या ट्रिगर हो जाती है।
---------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।