सरकार ने दवाएं सस्ती करने के लिए नया तरीका चुना है। नए तरीके के तहत सरकार ने कैंसर की 42 दवाएं सस्ती कर दी हैं। दावा किया जा रहा है कि इससे जो कैंसर की दवाइयां वो करीब 70 फीसदी तक सस्ती हो जाएंगी। हालांकि इस बार सरकार ने जो प्राइस रेग्युलेशन का तरीका है वो बदला है। पहले जहां सरकार सेलिंग प्राइस तय करती थी किसी दवा की। वहीं इस बार ट्रेड मार्जिन निर्धारित कर दिया गया है।
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Pills
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एनपीपीए के पास मौजूद डेटा के मुताबिक इन दवाओं के 105 ब्रांड्स का मैक्सिमम रिटेल प्राइस 85 प्रतिशत तक घट जाएगा। अभी कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 57 शेड्यूल्ड दवाएं प्राइस कंट्रोल के तहत हैं। नोटिफिकेशन के अनुसार अब एमआरपी पर ट्रेड मार्जिन को 30 पर्सेंट तक सीमित करने के लिए कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 42 दवाओं को चुना गया है।
दवा कंपनियों को दिया गया समय
नोटिफिकेशन मे कहा गया है एनपीपीए के पास मौजूदा डेटा के अनुसार इससे 72 फॉर्म्यूलेशंस और लगभग 355 ब्रांड्स कवर होंगे। इस सूची को अंतिम रूप देने के लिए हॉस्पिटल्स और फार्मा कंपनियों से डेटा जुटाए जा रहे हैं। दवा कंपनियों को कीमतों को दोबारा कैलक्युलेट करने और उनकी जानकारी NPPA, राज्यों के ड्रग कंट्रोलर, स्टॉकिस्ट्स और रिटेलर्स को देने के लिए 7 दिन का समय दिया गया है।
नई कीमतें 8 मार्च से लागू होंगी। NPPA अभी नेशनल लिस्ट ऑफ इसेंशियल मेडिसिन्स (NLEM) में मौजूद दवाओं की कीमतें तय करती है। अभी तक लगभग 1 हजार दवाओं को प्राइस कंट्रोल के तहत लाया गया है। नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं के लिए प्रत्येक वर्ष 10 पर्सेंट तक कीमत बढ़ाने की अनुमति है। इसकी निगरानी NPPA करती है।
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breast cancer
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रिटेल के लिए अधिकतम ट्रेड मार्जिन होगा वो 20 फीसदी का होगा जबकि स्टॉकिस्ट के लिए ट्रेड मार्जिन 10 फीसदी का होगा। यानी कुल मिलाकर जो ट्रेड मार्जिन रहेगा वो 30 फीसदी का रहेगा। इससे ज्यादा मुनाफाखोरी नहीं होगी।