जन्मदिन हो या कोई अन्य उत्सव इन्हें सेलिब्रेट करने के लिए केट काटने की परंपरा है। लोग केक को बड़े चाव से खाते भी हैं। बाजार में कई तरह के फ्लेवर वाले केक मौजूद हैं, जिन्हें काफी पसंद किया जाता रहा है। पर कहीं ये केक कैंसर का खतरा तो नहीं बढ़ा रहे हैं? सही सुना आपने, एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है जिसमें कहा जा रहा है कि कुछ प्रकार के केक में ऐसे तत्व पाए गए हैं जो कैंसर का कारण बन सकते हैं।
Health Alert: आपका पसंदीदा केक कहीं बन न जाए कैंसर का कारण, परीक्षण में सामने आई जानकारियां कर देंगी हैरान
केक में कैंसर कारक तत्वों का पता चला
केक में कैंसर कारक तत्वों का पता चलने के बाद से लोगों के मन में डर है। हालांकि यह कोई पहला मामला नहीं है जब खाद्य पदार्थों में कैंसर कारक तत्वों के होने को लेकर सावधान किया गया है। इससे पहले गोभी मंचूरियन, कबाब और पानीपुरी जैसे लोकप्रिय खाद्य पदार्थों में भी इसके जोखिमों को लेकर लोगों को अलर्ट किया जाता रहा है।
स्थानीय मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता विभाग ने सभी बेकरियों से खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों का अनुपालन करने पर जोर दिया है।
कृत्रिम रंगों और रसायनों से खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, रेड वेलवेट और ब्लैक फॉरेस्ट जैसे केक को अक्सर दिखने में आकर्षक बनाने के लिए कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। ये कृत्रिम रंग स्वास्थ्य के लिए खतरनाक जोखिम पैदा कर सकते हैं। केक सैंपल की टेस्टिंग के दौरान इनमें एल्यूरा रेड, सनसेट येलो एफसीएफ, पोंसो 4आर, टार्ट्राजीन और कारमोइसिन जैसे कृत्रिम रंगों और तत्वों की मौजूदगी का पता चला है। इसमें से अधिकतर को इंसानी सेहत के लिए खतरनाक माना जाता है।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
खाद्य पदार्थों में कृत्रिम रंगों के इस्तेमाल को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ पहले भी अलर्ट करते रहे हैं। इसी साल मार्च में कर्नाटक सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए कॉटन कैंडी में इस्तेमाल होने वाले फूड कलर्स पर रोक लगा दी थी। कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने कॉटन कैंडी और गोभी मंचूरियन में रोडामाइन-बी फूड कलरिंग एजेंट के इस्तेमाल को खतरनाक पाया था, जिसके इस्तेमाल को रोकने के आदेश दिए गए थे। रोडामाइन-बी को कैंसर कारक माना जाता है।
कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने कहा था कि इन हानिकारक एजेंट्स का उपयोग करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फूड कलर्स के हो सकते हैं गंभीर दुष्प्रभाव
रोडामाइन-बी जैसे फूड कलर्स को लेकर हुए अध्ययनों में इसे स्वास्थ्य के लिए कई प्रकार से हानिकारक प्रभावों वाला पाया गया है। केक के सैंपल टेस्टिंग में भी कुछ केक में इसकी मात्रा पाई गई है। शोधकर्ता बताते हैं रोडामाइन-बी का इस्तेमाल कपड़ों को डाई करने के लिए किया जाता रहा है, इसका उपयोग फूड कलर के रूप में भी होने लगा। रोडामाइन बी युक्त भोजन के सेवन से फूड पॉइजनिंग और कई प्रकार की गंभीर बीमारी हो सकती है। इसे कई अध्ययनों में संभावित कैंसरजन भी पाया गया है।
इसी तरह केक में पाए गए पोंसो 4आर को ब्रिटेन की खाद्य मानक एजेंसी द्वारा किए गए एक अध्ययन में बच्चों में अति सक्रियता बढ़ाने और शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस का कारण बनने वाला पाया गया था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, सभी लोग खान-पान की चीजों को लेकर सावधानी बरतते रहें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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