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दुनियाभर में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। भारत में कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्राॅन से संक्रमितों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। अब तक देश में 221 ओमिक्राॅन संक्रमित मिल चुके हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि ओमिक्रॉन का खतरा उन लोगों को भी है जो वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके हैं। ओमिक्राॅन पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को इस नए खतरे से बचाव करते रहने की चेतावनी दी है। हालिया रिपोर्टस में शोधकर्ताओं ने ओमिक्रॉन के कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में बताया है जो डेल्टा वैरिएंट से संक्रमण के मामले में देखने को नहीं मिले थे। ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर लोगों के मन में अब भी कई तरह के सवाल हैं, उसमें से एक यह भी है कि क्या डेल्टा की तरह इससे संक्रमण की स्थिति में भी लोगों को सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों की समस्याएं हो रही है? क्या ओमिक्रॉन का संक्रमण लोगों में मौत का कारण बन सकता है? इस बारे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कुछ जानकारियां साझा की हैं, आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
विशेषज्ञ से जानिए: क्या ओमिक्रॉन संक्रमितों को भी हो रही है सांस लेने में तकलीफ और फेफड़े की बीमारियां?
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कोरोना संक्रमण और सांस की समस्या
अमर उजाला से बातचीत में वाराणसी स्थित एक अस्पताल में इंटेंसिव केयर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ अमित भार्गव बताते हैं, कोरोना वायरस ऊपरी श्वसन प्रणाली को लक्षित करता है और फेफड़ों में यह अपनी संख्या को बढ़ाता है। ज्यादातर संक्रामक वायरस सांस लेते समय फेफड़ों में प्रवेश करते हैं और सीधे फेफड़ों और एल्वियोली (छोटी वायु थैली) को नुकसान पहुंचाते हैं, जिसके कारण लोगों को सांस लेने में समस्या होने लगती है। हालांकि ओमिक्रॉन को लेकर जो अध्ययन सामने आए हैं उससे यह पता चलता है कि यह वैरिएंट सांस से संबंधित समस्याओं का कारण नहीं बन रहा है।
गले को प्रभावित कर रहा है ओमिक्रॉन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 के ज्यादातर मामलों में वायरस फेफड़ों में खुद को बढ़ाते हुए देखे गए हैं, हालांकि ओमिक्रॉन संभवत: गले में ही यह कार्य प्रारंभ कर देता है। एक मीडिया रिपोर्ट में एम्स में कम्युनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ पुनीत बताते हैं, इसमें कुछ असामान्य नहीं है कि एक ही वायरस के अलग स्ट्रेन, भिन्न-भिन्न तरीके के लक्षण प्रकट करें।
ओमिक्रॉन वेरिएंट के साथ भी ऐसा ही है। इस स्ट्रेन से संक्रमितों को सांस लेने में तकलीफ नहीं होती है, शायद इसलिए कि यह फेफड़ों में स्वयं को नहीं बढ़ा रहा है।
ओमिक्रॉन का फेफड़ों पर असर
डॉ पुनीत बताते हैं, दुनियाभर से सामने आ रही रिपोर्टस से यह पता चलता है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट, डेल्टा से अलग फेफड़ों की जगह गले को प्रभावित कर रहा है। इस वैरिएंट के बारे में अब भी विस्तार से जानने के लिए अध्ययन किए जा रहे हैं, हालांकि, प्रारंभिक अध्ययन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन के लक्षण हल्के होते हैं। राहत की बात यह भी है कि ओमिक्रॉन संक्रमितों में निमोनिया जैसी समस्याओं का खतरा भी कम ही होने की उम्मीद है।
ओमिक्रॉन की प्रकृति को समझिए
ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर हुए अध्ययनों से पता चलता है कि कोरोना के अन्य वैरिएंट्स की तुलना में यह काफी तेजी से संक्रमण का कारण बन सकता है। इससे ज्यादा लोगों के संक्रमित होने की आशंका बनी हुई है, लेकिन इसमें गंभीर लक्षण, अस्पताल में भर्ती होने या मृत्यु का खतरा काफी कम हो सकता है। ओमिक्रॉन वैरिएंट की प्रकृति को समझने के लिए विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है।
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