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WHO की सलाह: यह आसान उपाय हर साल 8 लाख मासूमों की बचा सकता है जान, गंभीरता से दें ध्यान

Thu, 21 Aug 2025 06:19 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 21 Aug 2025 06:19 PM IST
सार

  • विशेषज्ञों की टीम ने बताया है कि अगर स्तनपान के महत्व और इससे होने वाले फायदों को लेकर जागरूकता बढ़ाई जाए, माएं स्तनपान कराएं तो हर साल दुनियाभर में 8 लाख बच्चों की जान बचाई जा सकती है। 

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डब्ल्यूएचओ ने स्तनपान बढ़ाने पर दिया जोर - फोटो : Freepik.com

शिशु मृत्युदर, भारत में लंबे समय से एक गंभीर चिंता का विषय रहा है। साल 2010 में भारत में शिशु मृत्युदर, विशेष रूप से पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में मौत के मामले, प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 65 थे। आधुनिक चिकित्सा, गर्भवती में समय पर स्वास्थ्य समस्याओं का निदान और जनजागरूकता बढ़ाकर अब भारत ने मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने में सफलता पा ली है।



साल 2014 में एक वर्ष से कम आयु के प्रति एक हजार जन्मे बच्चों में मृत्युदर 39 थी, जो 2021 में घटकर 27 रह गई। इसी प्रकार, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर साल 2014 में 45 से घटकर 2021 में 31 रह गई है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), यूनिसेफ जैसे वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों ने इसमें और सुधार लाने की अपील की है। इसी से संबंधित एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि अगर स्तनपान के महत्व और इससे होने वाले फायदों को लेकर और अधिक जागरूकता बढ़ाई जाए, माएं स्तनपान कराएं तो दुनियाभर में हर साल 8 लाख बच्चों की जान बचाई जा सकती है। 

जन्म से 23 माह तक सभी बच्चों के लिए स्तनपान जरूरी है, ये हर साल पांच साल से कम उम्र के 8.2 लाख से अधिक बच्चों में असमय मृत्यु के खतरे को कम कर सकती है।

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बच्चों की अच्छी सेहत के लिए जरूर कराएं स्तनपान - फोटो : Freepik.com

स्तनपान से वंचित रह जाते हैं शिशु

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के साल 2022 के आंकड़ों के मुताबिक केवल 44% शिशुओं को ही जन्म से छह माह तक स्तनपान कराया जाता है। दुनियाभर में 5 साल से कम उम्र के 14.9 करोड़ बच्चे बौनेपन, 4.5 करोड़ बच्चे दुबलापन और 3.7 करोड़ बच्चे मोटापे से जूझ रहे हैं। हर साल कुपोषण से लगभग 27 लाख बच्चों की मौत होती है जो कुल बाल मृत्यु का 45% है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि स्तनपान में सुधार लाकर न सिर्फ शिशु मृत्युदर को कम किया जा सकता है बल्कि ये बच्चों में मोटापा और डायबिटीज जैसी बीमारियों के खतरे को भी कम करने वाला उपाय हो सकता है। 

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ब्रेस्ट फीडिंग से होने वाले फायदों को जानिए - फोटो : Adobe Stock

क्या कहते हैं डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञ?

डब्ल्यूएचओ के अनुसार छह माह तक केवल स्तनपान कराने से शिशुओं को संपूर्ण पोषण, रोग-प्रतिरोधक क्षमता और जीवन की बेहतर शुरुआत मिलती है। यह सांस के संक्रमण, दस्त और शिशु मृत्यु सिंड्रोम (एसइईडीएस) से लेकर मोटापा व मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचाव करता है। वैश्विक संस्थानों ने सरकारों, समुदायों और कार्यस्थलों से ऐसी स्थायी संरचनाएं बनाने का आग्रह किया है जो माताओं को स्तनपान कराने की सुविधाएं दे । 

डब्ल्यूएचओ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्तनपान कराने से माताओं के लिए भी अनेक स्वास्थ्य लाभ हैं जैसे प्रसवोत्तर रक्तस्राव में कमी, स्तन और ओवेरियन कैंसर का कम खतरा और प्रसव के बाद तेज रिकवरी आदि। स्तनपान न सिर्फ शारीरिक वृद्धि, बल्कि बौद्धिक विकास में भी अहम भूमिका निभाता है। 

भारत में जन्म से छह माह तक स्तनपान कराने की दर 58% है जो वैश्विक औसत से अधिक है, हालांकि फिर भी लक्ष्य 90% से काफी दूर है। विशेषज्ञ मानते हैं, मातृत्व अवकाश बढ़ाना, कार्यस्थलों पर स्तनपान-अनुकूल सुविधाएं और गांवों में प्रशिक्षण इस दर को और बढ़ा सकते हैं।

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बच्चों को सेहत को कैसे ठीक रखा जाए - फोटो : Freepik.com

एक उपाय और अनेकों लाभ

शोध बताते हैं कि स्तनपान आपके शिशु में कुछ बीमारियों के जोखिम को कम करता है और एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली बनाने में मदद करता है। स्तनपान करने वाले शिशुओं में आमतौर पर होने वाले दस्त, उल्टी और नेक्रोटाइजिंग एंटरोकोलाइटिस जैसे आंतों की गंभीर बीमारियों का जोखिम कम होता है। 

निमोनिया, रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (आरएसवी) और काली खांसी जैसे श्वसन संक्रमण और ल्यूकेमिया से बचाव में भी मां के दूध को लाभकारी पाया गया है। 


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स्रोत

Breastfeeding

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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