शिशु मृत्युदर, भारत में लंबे समय से एक गंभीर चिंता का विषय रहा है। साल 2010 में भारत में शिशु मृत्युदर, विशेष रूप से पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में मौत के मामले, प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 65 थे। आधुनिक चिकित्सा, गर्भवती में समय पर स्वास्थ्य समस्याओं का निदान और जनजागरूकता बढ़ाकर अब भारत ने मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने में सफलता पा ली है।
WHO की सलाह: यह आसान उपाय हर साल 8 लाख मासूमों की बचा सकता है जान, गंभीरता से दें ध्यान
- विशेषज्ञों की टीम ने बताया है कि अगर स्तनपान के महत्व और इससे होने वाले फायदों को लेकर जागरूकता बढ़ाई जाए, माएं स्तनपान कराएं तो हर साल दुनियाभर में 8 लाख बच्चों की जान बचाई जा सकती है।
स्तनपान से वंचित रह जाते हैं शिशु
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के साल 2022 के आंकड़ों के मुताबिक केवल 44% शिशुओं को ही जन्म से छह माह तक स्तनपान कराया जाता है। दुनियाभर में 5 साल से कम उम्र के 14.9 करोड़ बच्चे बौनेपन, 4.5 करोड़ बच्चे दुबलापन और 3.7 करोड़ बच्चे मोटापे से जूझ रहे हैं। हर साल कुपोषण से लगभग 27 लाख बच्चों की मौत होती है जो कुल बाल मृत्यु का 45% है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि स्तनपान में सुधार लाकर न सिर्फ शिशु मृत्युदर को कम किया जा सकता है बल्कि ये बच्चों में मोटापा और डायबिटीज जैसी बीमारियों के खतरे को भी कम करने वाला उपाय हो सकता है।
क्या कहते हैं डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञ?
डब्ल्यूएचओ के अनुसार छह माह तक केवल स्तनपान कराने से शिशुओं को संपूर्ण पोषण, रोग-प्रतिरोधक क्षमता और जीवन की बेहतर शुरुआत मिलती है। यह सांस के संक्रमण, दस्त और शिशु मृत्यु सिंड्रोम (एसइईडीएस) से लेकर मोटापा व मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचाव करता है। वैश्विक संस्थानों ने सरकारों, समुदायों और कार्यस्थलों से ऐसी स्थायी संरचनाएं बनाने का आग्रह किया है जो माताओं को स्तनपान कराने की सुविधाएं दे ।
डब्ल्यूएचओ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्तनपान कराने से माताओं के लिए भी अनेक स्वास्थ्य लाभ हैं जैसे प्रसवोत्तर रक्तस्राव में कमी, स्तन और ओवेरियन कैंसर का कम खतरा और प्रसव के बाद तेज रिकवरी आदि। स्तनपान न सिर्फ शारीरिक वृद्धि, बल्कि बौद्धिक विकास में भी अहम भूमिका निभाता है।
भारत में जन्म से छह माह तक स्तनपान कराने की दर 58% है जो वैश्विक औसत से अधिक है, हालांकि फिर भी लक्ष्य 90% से काफी दूर है। विशेषज्ञ मानते हैं, मातृत्व अवकाश बढ़ाना, कार्यस्थलों पर स्तनपान-अनुकूल सुविधाएं और गांवों में प्रशिक्षण इस दर को और बढ़ा सकते हैं।
एक उपाय और अनेकों लाभ
शोध बताते हैं कि स्तनपान आपके शिशु में कुछ बीमारियों के जोखिम को कम करता है और एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली बनाने में मदद करता है। स्तनपान करने वाले शिशुओं में आमतौर पर होने वाले दस्त, उल्टी और नेक्रोटाइजिंग एंटरोकोलाइटिस जैसे आंतों की गंभीर बीमारियों का जोखिम कम होता है।
निमोनिया, रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (आरएसवी) और काली खांसी जैसे श्वसन संक्रमण और ल्यूकेमिया से बचाव में भी मां के दूध को लाभकारी पाया गया है।
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स्रोत
Breastfeeding
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