Blood Sugar Test: डायबिटीज का खतरा सभी उम्र के लोगों में बढ़ता जा रहा है। अकेले भारत में करोड़ों लोग इस गंभीर बीमारी की चपेट में हैं, इतना ही नहीं साल-दर-साल ये आंकड़े बढ़ते ही जा रहे हैं। डायबिटीज के बढ़ते मामलों के कारण भारत को डायबिटीज कैपिटल भी कहा जाता है। भाग-दौड़ भरी जिदगी, फास्ट फूड्स, नींद की कमी और तनाव जैसी लाइफस्टाइल की समस्याओं ने इस बीमारी को और भी बढ़ा दिया है।
Diabetes Test: ग्लूकोमीटर या HBA1C टेस्ट, ब्लड शुगर की जांच में कौन सा ज्यादा भरोसेमंद? जानिए विस्तार से
- डॉक्टर कहते हैं, समय रहते डायबिटीज के लक्षणों को पहचानना और नियमित जांच कराना बेहद जरूरी है। इसमें ग्लूकोमीटर या HBA1C टेस्ट कौन सा ज्यादा असरदार है?
शुगर के स्तर की निगरानी करते रहना जरूरी
आमतौर पर जब भी शुगर की जांच की बात आती है तो इसके लिए ग्लूकोमीटर मशीन को सबसे ज्यादा प्रयोग में लाया जाता है। ग्लूकोमीटर एक छोटा-सा डिवाइस होता है जो घर पर ही आपके ब्लड शुगर लेवल को चेक करने में मदद करता है। इसके अलावा कई बार डॉक्टर आपको HbA1c टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।
अब सवाल ये है कि इन दोनों टेस्ट में क्या अंतर है और जांच के लिए इनमें से कौन सा तरीका सबसे कारगर होता है? आइए इसे समझते हैं।
घर पर ग्लूकोमीटर से शुगर की जांच
ग्लूकोमीटर का इस्तेमाल करना बहुत आसान है। आपको सिर्फ उंगली की नोक पर हल्की-सी सुई चुभाकर एक बूंद खून निकालना होता है और फिर उस खून की बूंद को टेस्ट स्ट्रिप पर डालकर मशीन में लगाना होता है। कुछ ही सेकंड में स्क्रीन पर ब्लड शुगर का परिणाम आ जाता है।
ग्लूकोमीटर का फायदा ये है कि इससे आप तुरंत जान सकते हैं कि इस समय आपका शुगर लेवल कितना है? यह खासतौर पर डायबिटीज के मरीजों के लिए जरूरी है, क्योंकि उन्हें दिन में कई बार शुगर लेवल चेक करना पड़ता है। इससे मरीज यह समझ पाते हैं कि कौन-सा खाना या दवा उनके शुगर लेवल को कैसे प्रभावित कर रही है।
HbA1c टेस्ट क्या है?
HbA1c टेस्ट यानी ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन टेस्ट एक प्रकार के खून की जांच है। ये खून में पिछले 2 से 3 महीनों के दौरान शुगर का स्तर कितना रहा है इसका औसत बताता है। जब हमारे खून में शुगर ज्यादा समय तक बनी रहती है, तो वह धीरे-धीरे हीमोग्लोबिन (खून में ऑक्सीजन ले जाने वाला प्रोटीन) से चिपक जाती है। जितनी ज्यादा शुगर चिपकेगी उतनी ही HbA1c की रीडिंग ज्यादा होगी।
यह सिर्फ एक दिन की रीडिंग नहीं देता, बल्कि आपके पिछले 90 दिनों की औसत स्थिति बताता है। डॉक्टर इसे डायबिटीज की सही पहचान और उसकी गंभीरता समझने के लिए सबसे भरोसेमंद मानते हैं। आमतौर पर HbA1c का नॉर्मल स्तर 5.7% से कम होना चाहिए। अगर यह 5.7% से 6.4% के बीच है तो इसे प्री-डायबिटीज कहा जाता है और 6.5% या उससे अधिक आने पर डायबिटीज माना जाता है।
(डायबिटीज की सटीक जानकारी के लिए HbA1c टेस्ट, जानिए किसे करवानी चाहिए ये जांच)
कौन का टेस्ट है असरदार?
डॉक्टर कहते हैं, दोनों ही टेस्ट शरीर में शुगर की स्थिति बताते हैं दोनों में बस थोड़ा सा अंतर है।
ग्लूकोमीटर से आप रोज शुगर की स्थिति जान सकते हैं, ये रीडिंग नोट करने में मददगार है और उस दिन शुगर का स्तर बताता है। वहीं HbA1c टेस्ट से बीमारी की सटीक जानकारी मिलती है। तीन महीने के औसत शुगर लेवल से जाना जा सकता है कि आपके डायबिटीज की स्थिति क्या है? डायबिटीज के मरीजों को हर तीन महीने में डॉक्टर HbA1c टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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