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Diabetes Test: ग्लूकोमीटर या HBA1C टेस्ट, ब्लड शुगर की जांच में कौन सा ज्यादा भरोसेमंद? जानिए विस्तार से

Sat, 30 Aug 2025 07:42 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 30 Aug 2025 07:42 PM IST
सार

  • डॉक्टर कहते हैं, समय रहते डायबिटीज के लक्षणों को पहचानना और नियमित जांच कराना बेहद जरूरी है। इसमें ग्लूकोमीटर या HBA1C टेस्ट कौन सा ज्यादा असरदार है?

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डायबिटीज की जांच कैसे की जाए? - फोटो : Freepik.com

Blood Sugar Test: डायबिटीज का खतरा सभी उम्र के लोगों में बढ़ता जा रहा है। अकेले भारत में करोड़ों लोग इस गंभीर बीमारी की चपेट में हैं, इतना ही नहीं साल-दर-साल ये आंकड़े बढ़ते ही जा रहे हैं। डायबिटीज के बढ़ते मामलों के कारण भारत को डायबिटीज कैपिटल भी कहा जाता है। भाग-दौड़ भरी जिदगी, फास्ट फूड्स, नींद की कमी और तनाव जैसी लाइफस्टाइल की समस्याओं ने इस बीमारी को और भी बढ़ा दिया है। 



डायबिटीज के साथ सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि ये बीमारी चुपचाप शरीर को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाने लगती है। यही वजह है कि शुगर के मरीजों में दिल, किडनी, आंखों और नसों से संबंधित समस्याओं का खतरा भी अधिक होता है।

हाल ही में किए गए एक अध्ययन में हार्वर्ड के विशेषज्ञों ने डायबिटीज से बचाव के लिए कारगर तरीका बताया है जिसकी मदद से इस रोग के खतरे को 31% तक कम किया जा सकता है। इसके अलावा डॉक्टर कहते हैं, समय रहते इस बीमारी के लक्षणों को पहचानना और नियमित जांच कराना बेहद जरूरी है। सही समय पर टेस्ट और इलाज मिलने से इसे कंट्रोल करना आसान हो जाता है और शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित होने से भी बचाया जा सकता है।

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बच्चों में भी हो सकते हैं डायबिटीज के मामले - फोटो : Adobe Stock

शुगर के स्तर की निगरानी करते रहना जरूरी

आमतौर पर जब भी शुगर की जांच की बात आती है तो इसके लिए ग्लूकोमीटर मशीन को सबसे ज्यादा प्रयोग में लाया जाता है। ग्लूकोमीटर एक छोटा-सा डिवाइस होता है जो घर पर ही आपके ब्लड शुगर लेवल को चेक करने में मदद करता है। इसके अलावा कई बार डॉक्टर आपको  HbA1c टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।

अब सवाल ये है कि इन दोनों टेस्ट में क्या अंतर है और जांच के लिए इनमें से कौन सा तरीका सबसे कारगर होता है? आइए इसे समझते हैं।

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घर पर शुगर की जांच कैसे करें? - फोटो : Freepik.com

घर पर ग्लूकोमीटर से शुगर की जांच

ग्लूकोमीटर का इस्तेमाल करना बहुत आसान है। आपको सिर्फ उंगली की नोक पर हल्की-सी सुई चुभाकर एक बूंद खून निकालना होता है और फिर उस खून की बूंद को टेस्ट स्ट्रिप पर डालकर मशीन में लगाना होता है। कुछ ही सेकंड में स्क्रीन पर ब्लड शुगर का परिणाम आ जाता है।

ग्लूकोमीटर का फायदा ये है कि इससे आप तुरंत जान सकते हैं कि इस समय आपका शुगर लेवल कितना है? यह खासतौर पर डायबिटीज के मरीजों के लिए जरूरी है, क्योंकि उन्हें दिन में कई बार शुगर लेवल चेक करना पड़ता है। इससे मरीज यह समझ पाते हैं कि कौन-सा खाना या दवा उनके शुगर लेवल को कैसे प्रभावित कर रही है।

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शुगर के लिए खून की जांच - फोटो : Freepik.com

HbA1c टेस्ट क्या है?


HbA1c टेस्ट यानी ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन टेस्ट एक प्रकार के खून की जांच है। ये खून में पिछले 2 से 3 महीनों के दौरान शुगर का स्तर कितना रहा है इसका औसत बताता है। जब हमारे खून में शुगर ज्यादा समय तक बनी रहती है, तो वह धीरे-धीरे हीमोग्लोबिन (खून में ऑक्सीजन ले जाने वाला प्रोटीन) से चिपक जाती है। जितनी ज्यादा शुगर चिपकेगी उतनी ही HbA1c की रीडिंग ज्यादा होगी।

यह सिर्फ एक दिन की रीडिंग नहीं देता, बल्कि आपके पिछले 90 दिनों की औसत स्थिति बताता है। डॉक्टर इसे डायबिटीज की सही पहचान और उसकी गंभीरता समझने के लिए सबसे भरोसेमंद मानते हैं। आमतौर पर HbA1c का नॉर्मल स्तर 5.7% से कम होना चाहिए। अगर यह 5.7% से 6.4% के बीच है तो इसे प्री-डायबिटीज कहा जाता है और 6.5% या उससे अधिक आने पर डायबिटीज माना जाता है। 


(डायबिटीज की सटीक जानकारी के लिए HbA1c टेस्ट, जानिए किसे करवानी चाहिए ये जांच)
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डायबिटीज और इसका जोखिम - फोटो : Freepik.com

कौन का टेस्ट है असरदार?

डॉक्टर कहते हैं, दोनों ही टेस्ट शरीर में शुगर की स्थिति बताते हैं दोनों में बस थोड़ा सा अंतर है।

ग्लूकोमीटर से आप रोज शुगर की स्थिति जान सकते हैं, ये रीडिंग नोट करने में मददगार है और उस दिन शुगर का स्तर बताता है। वहीं HbA1c  टेस्ट से बीमारी की सटीक जानकारी मिलती है। तीन महीने के औसत शुगर लेवल से जाना जा सकता है कि आपके डायबिटीज की स्थिति क्या है? डायबिटीज के मरीजों को हर तीन महीने में डॉक्टर  HbA1c  टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।




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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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