कोरोना संक्रमण ने पिछले दो वर्षों में वैश्विक स्तर पर हम सभी को कई तरह से परेशान किया है। कुछ वैरिएंट्स ने जहां फेफड़े और हृदय को गंभीर क्षति पहुंचाई, वहीं कुछ को अत्याधिक संक्रामक माना जा रहा है। संक्रमण से ठीक होने के लंबे समय, यहां तक कि कुछ मामलों में एक साल बाद तक भी लोगों में लॉन्ग कोविड की समस्या देखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना वायरस का संक्रमण और इसके दीर्घकालिक दुष्प्रभाव, दोनों ही शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं, ऐसे में हम सभी को इससे बचाव के निरंतर उपायों को प्रयोग में लाते रहने की आवश्यकता है।
Covid-19: संक्रमण से ठीक होने के महीनों बाद भी हो सकती है ब्लड क्लॉटिंग की दिक्कत, विशेषज्ञों ने ऐसे लक्षणों को लेकर किया सावधान
लॉन्ग कोविड में डीप वेन थ्रॉम्बोसिस का खतरा
स्वीडिश वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस अध्ययन में बताया गया है कि कुछ लोगों में संक्रमण से ठीक होने के तीन महीने तक डीप वेन थ्रॉम्बोसिस का खतरा देखा गया है। इस स्थिति में शरीर की एक या अधिक नसों में रक्त का थक्का (थ्रोम्बस) बनने लगता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि संक्रमण से ठीक होने के छह महीने बाद तक लोगों में डीप वेन थ्रॉम्बोसिस, पल्मोनरी एम्बोलिज्म और इंटर्नल ब्लीडिंग जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इनका समय पर निदान और इलाज बहुत आवश्यक माना जाता है।
अध्ययन में क्या पता चला?
स्वीडन स्थित उमेया यूनिवर्सिटी में क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रोफेसर ऐनी-मैरी फ़ोर्स कोनोली के नेतृत्व में 10.57 लाख से अधिक लोगों पर यह अध्ययन किया गया था। इन लोगों को फरवरी 2020 से लेकर मई 2021 के बीच कोरोनोवायरस से संक्रमित पाया गया था। शोधकर्ताओं ने कई स्तर और मापदंडों पर किए गए इस शोध में पाया कि पुरुष प्रतिभागियों में पल्मोनरी एम्बोलिज्म का खतरा अधिक होता है। यह स्थिति फेफड़ों की धमनियों में रुकावट का कारण बन सकती है।
पुरुष प्रतिभागियों में जोखिम अधिक
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि कोविड-19 से ठीक होने के बाद पहले तीन महीनों के दौरान, महिला प्रतिभागियों की तुलना में पुरुष प्रतिभागियों में धमनियों में रुकावट का खतरा अधिक पाया गया। कोविड की पहली लहर के दौरान संक्रमित रह चुके वृद्ध लोगों में रक्तस्राव की घटनाएं भी अधिक देखने को मिली हैं। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि रक्तस्राव के कारण वैसे तो कोई गंभीर स्वास्थ्य जोखिम नहीं देखा गया है, हालांकि इससे कुछ स्थितियों में खतरा जरूर हो सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
प्रमुख अध्ययनकर्ता प्रोफेसर ऐनी-मैरी बताती हैं, कोविड-19 से ठीक होने के बाद कई लोगों में पहले तीन महीनों में डीप वेन थ्रॉम्बोसिस के मामले देखे गए हैं। खास बात यह है कि इसका खतरा अधिक उम्र वाले लोगों में ज्यादा पाया गया है। इसके अलावा कोरोना की दूसरी और तीसरी लहरों की तुलना में पहली लहर के दौरान संक्रमित रहे लोगों में इसका जोखिम अधिक पाया देखा जा रहा है। लॉन्ग कोविड के ऐसे लक्षण, कुछ स्थितियों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकते हैं।