मेडिकल साइंस ने हाल के दशकों में अभूतपूर्व तरक्की की है। नई दवाओं की खोज, आधुनिक चिकित्सा तकनीक ने कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों के उपचार को अब काफी आसान बना दिया है। कोरोनावायरस संक्रमण को तेजी से काबू करना, एचआईवी संक्रमण की नई और कारगर दवाएं हों या कैंसर का प्रभावी इलाज इसी का उदाहरण है। चिकित्सा विज्ञान कई बार ऐसे चमत्कारी काम कर जाता है जिसपर भरोसा करना भी कठिन होता है।
Bizarre Surgery: 'दांत से बनी आंख' ने लौटाई महिला की जिंदगी में रोशनी, मेडिकल साइंस ने किया दुनिया को हैरान
- कनाडा में डॉक्टरों ने एक अनोखी सर्जरी करके करीब एक दशक से अंधी महिला को नई रोशनी दी है। आंख में एक जटिल और विचित्र सर्जरी के जरिए डॉक्टरों ने उसका दांत लगा दिया, जिसकी मदद से अब महिला फिर से देख सकती है।
आंखों की दुर्लभ सर्जरी से लौटी रोशनी
मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक डॉक्टरों ने ओस्टियो-ओडोन्टो केराटोप्रोस्थेसिस (ओओकेपी) नामक एक दुर्लभ सर्जरी करके चमत्कार कर दिया। 'टूथ-इन आई' सर्जरी के दौरान चिकित्सा विशेषज्ञों ने उसके दांत से बने बेस पर एक कृत्रिम कॉर्निया फिट करके आंखों के सॉकेट में प्रत्यारोपित किया।
इस सर्जरी के कुछ ही हफ्तों के भीतर महिला की देखने की क्षमता वापस आ गई। जैसे-जैसे सुधार होता गया, वह पहले की ही तरह से दोबारा अच्छी तरह से देखने लगी।
कैसे की गई ये चमत्कारी सर्जरी?
स्थानीय कनाडा मीडिया में छपी रिपोर्ट में महिला ने बताया, मैं अब बहुत सारे रंग देख सकती हूं। पेड़, घास और फूलों को फिर से देख पाना एक अद्भुत एहसास है।
मेडिकल विशेषज्ञ बताते हैं, 'ओस्टियो-ओडोन्टो केराटोप्रोस्थेसिस एक ऐसी तकनीक है जिसका उपयोग उन नेत्रहीन रोगियों की क्षतिग्रस्त कॉर्निया को बदलने के लिए किया जाता है, जिनके लिए कैडेवरिक कॉर्निया ट्रांसप्लांट (मृत अंगदाता से कॉर्निया प्राप्त करना) विकल्प नहीं होता है।
यह प्रक्रिया एक दांत निकालने से शुरू होती है जिसे लंबाई में काटा जाता है और फिर चिकनी प्लेट बनाने के लिए पॉलिश किया जाता है। फिर उसमें एक छेद करके ऑप्टिकल उपकरण (कृत्रिम कॉर्निया) डालने के लिए जगह बनाई जाती है और फिर उसे चिपका दिया जाता है।
इसके बाद, दांत से बने प्लेट और ऑप्टिकल उपकरण को तीन महीने के लिए गाल में ट्रांसप्लांट किया जाता है, जहां से इसमें ऊतकों और रक्त वाहिका का निर्माण होना शुरू हो जाता है। डॉक्टर्स इसका नियमित रूप से परीक्षण करते रहते हैं। जब मेडिकल टीम सुनिश्चित हो जाती है तो इसे आंखों में सर्जरी करके फिट कर दिया जाता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
यह पहली बार है कि ये सर्जरी कनाडा में की गई है, हालांकि इससे पहले कई अन्य देशों में ये सर्जरी की जा चुकी है। देश में यह ऑपरेशन करने वाले पहले सर्जन, माउंट सेंट जोसेफ अस्पताल के डॉ. ग्रेग मोलोनी कहते हैं, यह एक जटिल और अजीब ऑपरेशन था, इसमें मूल रूप से कॉर्निया को बदलना होता है। इस नाजुक ऑपरेशन की सफलता की संभावना बढ़ाने के लिए दांत का इस्तेमाल किया गया।
डॉक्टर बताते हैं, हमें एक ऐसी संरचना चाहिए थी जो प्लास्टिक फोकसिंग टेलीस्कोप (कृत्रिम कॉर्निया) को थामे रखने के लिए पर्याप्त मजबूत हो, और ये शरीर द्वारा अस्वीकार न की जाए। इसके अलावा महिला को फिर से ऑटो इम्यून रोग के दुष्प्रभावों से भी बचाना था, जिसमें दांत से बना बेस अच्छा काम कर सकता है।
मेडिकल का करिश्मा
विशेषज्ञ बताते हैं, इसे लगभग 40 साल पहले इटली में विकसित किया गया था। कृत्रिम कॉर्निया को सहारा देने के लिए मरीज के अपने दांत की जड़ और एल्वियोलर (जबड़े) की हड्डी का इस्तेमाल किया जाता है। कनाडा में ये सफल सर्जरी की गई है, इससे महिला को एक दशक के बाद दोबारा से देखने का मौका मिला है, ये काफी खुशी की बात है। आई डोनेशन न मिलपाने की स्थिति में ये अच्छा विकल्प हो सकता है।
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स्रोत
For the 1st time in Canada, surgeons put teeth in patients' eyes to restore sight
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