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इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 15वें सीजन के लिए शनिवार (12 फरवरी) को दो दिवसीय नीलामी की शुरुआत हुई। इस दौरान कई खिलाड़ियों पर करोड़ों की बोली लगी। हालांकि नीलामी के दौरान एक ऐसा हादसा हुआ जिसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। असल में खिलाड़ियों की नीलामी करा रहे नीलामीकर्ता ह्यू एडमीड्स अचानक गिर पड़े। नीलामी के पहले एक घंटे वह पूरी तरह से स्वस्थ थे, ऐसे में उनका अचानक से गिर कर बेहोश हो जाना लोगों के लिए चौंकाने वाला था। घटना के तुरंत बाद मेडिकल टीम ने उनकी स्थिति की निगरानी की, फिलहाल वह स्वस्थ बताए जा रहे हैं।
इस घटना के बारे में बीसीसीआई के एक सूत्र ने बताया, "ह्यू की देखभाल की जा रही है, अब वह ठीक हैं। पोश्चरल हाइपोटेंशन के कारण वह अचानक से गिर पड़े थे। जांच के बाद स्थिति और स्पष्ट हो पाएगी। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि आखिर यह पोश्चरल हाइपोटेंशन क्या समस्या है? किन लोगों को इसका खतरा होता है?
IPL Auction 2022: पोश्चरल हाइपोटेंशन के कारण अचानक बेहोश हो गए थे ह्यू एडमीड्स, इस समस्या के बारे में जानिए विस्तार से
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पोश्चरल हाइपोटेंशन क्या है?
पोश्चरल हाइपोटेंशन जिसे ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के नाम से भी जाना जाता है, यह अचानक से ब्लड प्रेशर लो हो जाने के कारण होता है। सामान्यतौर पर ज्यादा देर तक बैठे या लेटे रहने के बाद अचानक खड़े होने पर लोगों को इस तरह की दिक्कत हो सकती है। पोश्चरल हाइपोटेंशन के कारण चक्कर या बेहोशी की दिक्कत हो सकती है। सामान्यतौर पर लोगों को कुछ मिनटों तक यह दिक्कत बनी रह सकती है। हालांकि लंबे समय तक बने रहने वाली यह दिक्कत गंभीर समस्याओं का संकेत भी हो सकती है। यह किसी और अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या का भी संकेत हो सकता है।
पोश्चरल हाइपोटेंशन के क्या लक्षण होते हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक पोश्चरल हाइपोटेंशन के कारण आमतौर पर बैठे रहने या लेटने के बाद अचानक खड़े होने पर चक्कर आ सकता है। इसके लक्षण आमतौर पर कुछ मिनटों से भी कम समय तक रहते हैं और स्वत: भी ठीक हो जाते हैं। पोश्चरल हाइपोटेंशन की स्थिति में लोगों को कुछ और समस्याएं हो सकती हैं, इनपर भी ध्यान दिया जाना आवश्यक है।
- अचानक से खड़े होने पर धुंधला दिखाई देना।
- कमजोरी महसूस होना।
- बेहोशी-मतली
- भ्रम की स्थिति
क्यों होती है पोश्चरल हाइपोटेंशन की दिक्कत?
अमर उजाला से बातचीत में इंटेंसिव केयर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ सौरभ अवस्थी बताते हैं, सामान्यतौर पर जब हम खड़े होते हैं तो गुरुत्वाकर्षण के कारण पैरों और पेट में रक्त जमा हो जाता है। इसके कारण ब्लड प्रेशर कम हो जाता है, जोकि पोश्चरल हाइपोटेंशन की दिक्कत का कारण बनता है। आमतौर पर, हृदय और गर्दन की धमनियों के पास मौजूद स्पेशल सेल्स (बैरोरिसेप्टर) इस निम्न रक्तचाप को महसूस करती है। बैरोरिसेप्टर, मस्तिष्क को इसका संकेत भेजती है, जो दिल को तेजी से धड़कने और रक्त पंप को तेजी से पंप करने का संकेत देता है, जिससे रक्तचाप स्थिर हो सके। कई स्थितियां पोश्चरल हाइपोटेंशन का कारण बन सकती हैं।
- डिहाइड्रेशन।
- हृदय की समस्याएं।
- एंडोक्रोनिक दिक्कतें।
- तंत्रिका तंत्र से संबंधित समस्याएं।
पोश्चरल हाइपोटेंशन का क्या इलाज है?
डॉ सौरभ बताते हैं, पोश्चरल हाइपोटेंशन के उपचार में सबसे पहले रक्तचाप को सामान्य करने के तरीके अपनाए जाते हैं। रोगी की स्थिति और अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या के आधार पर आगे की प्रक्रियाओं को प्रयोग में लाया जाता है। सामान्यतौर पर कुछ दवाइयों की मदद से इस तरह की दिक्कतें ठीक हो जाती हैं, हालांकि यदि किसी गंभीर स्थिति के कारण पोश्चरल हाइपोटेंशन हो रहा हो तो इसके लिए विशिष्ठ उपचार की आवश्यकता होती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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