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राष्ट्रीय पोषण सप्ताह 2026: समय के साथ कैसे पीढ़ी दर पीढ़ी बदल रही भारतीयों की थाली? एक क्लिक में जानें

Wed, 02 Sep 2026 09:49 AM IST
Shruti Gaur हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shruti Gaur Updated Wed, 02 Sep 2026 09:49 AM IST
सार

National Nutrition Week 2026: राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के मौके पर हम आपको बताएंगे कि कैसे समय के साथ लोगों की थाली में बदलाव आया है। यानी कि कैसे लोग समय के साथ अपनी थाली के भोज्य पदार्थों को बदलते रहे। 

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National Nutrition Week 2026 how indian Generational Food Habits changed over the time
दादा-दादी से Gen Z तक बदली भारतीय थाली - फोटो : AI
National Nutrition Week 2026: हर साल सितंबर के पहले सप्ताह में नेशनल न्यूट्रिशन वीक यानी राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मनाया जाता है। इस सप्ताह का मकसद लोगों को पोषण, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ पेट भरना ही काफी नहीं है, बल्कि भोजन में जरूरी पोषक तत्वों का सही संतुलन होना भी बेहद जरूरी है। 


आज बदलती लाइफस्टाइल, व्यस्त दिनचर्या और खानपान में आए बदलाव के बीच पोषण को लेकर जागरूक होना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।नेशनल न्यूट्रिशन वीक इसी दिशा में लोगों को अपने भोजन और स्वास्थ्य पर ध्यान देने का संदेश देता है लेकिन बदलते समय के साथ सिर्फ हमारी लाइफस्टाइल ही नहीं बदली, हमारी थाली भी बदल गई। 

दादा-दादी की पारंपरिक और घर की थाली से लेकर आज की प्रोटीन और हेल्थ-कॉन्शस थाली तक खाने की आदतों में कई बदलाव आए हैं। आखिर समय के साथ हमारी थाली में क्या-क्या बदला और अलग-अलग पीढ़ियों की डाइट कैसी रही? दादा-दादी से लेकर आज की Gen Z तक भारतीय थाली के इस बदलते सफर को इस लेख में विस्तार से समझेंगे।
National Nutrition Week 2026 how indian Generational Food Habits changed over the time
दादा-दादी से Gen Z तक बदली भारतीय थाली - फोटो : AI

सबसे पहले जानें पोषण क्यों है जरूरी?

हमारे शरीर को अलग-अलग पोषक तत्वों की जरूरत होती है। प्रोटीन शरीर के विकास और मांसपेशियों के लिए जरूरी है, जबकि कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देता है। विटामिन और मिनरल्स शरीर के विभिन्न कार्यों को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद करते हैं। फाइबर पाचन के लिए महत्वपूर्ण है और पर्याप्त पानी शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है।

 
National Nutrition Week 2026 how indian Generational Food Habits changed over the time
दादा-दादी से Gen Z तक बदली भारतीय थाली - फोटो : AI
बदलती लाइफस्टाइल का खानपान पर असर

भारतीय थाली सिर्फ स्वाद के साथ नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली और सेहत की जरूरतों के साथ भी बदल रही है। कुछ दशक पहले तक घर के खाने में दाल, सब्जियां, रोटी, चावल, दही, छाछ और मौसमी फल प्रमुख होते थे। बाजरा, ज्वार और रागी जैसे पारंपरिक अनाज भी कई परिवारों के भोजन का हिस्सा थे। आज की पीढ़ी फिर से इन चीजों की ओर लौट रही है, लेकिन इस बार वजह है—हेल्थ और न्यूट्रिशन।

 
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दादा-दादी से Gen Z तक बदली भारतीय थाली - फोटो : AI
दादा-दादी की थाली: प्राकृतिक और संतुलित भोजन

पुरानी पीढ़ी का भोजन काफी हद तक स्थानीय और मौसमी चीजों पर आधारित था। घर का बना ताजा खाना, दालें, सब्जियां, अनाज, दही और छाछ रोजमर्रा के भोजन में शामिल रहते थे। बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मिलेट्स भी कई क्षेत्रों में नियमित रूप से खाए जाते थे। आज इन्हीं पारंपरिक अनाजों को फाइबर और पोषण के लिहाज से फिर से चर्चा मिल रही है।

माता-पिता की पीढ़ी: सुविधा ने बदली आदतें

समय के साथ पैकेज्ड और इंस्टेंट फूड घरों में बढ़ने लगा। बिस्कुट, पैकेज्ड स्नैक्स, इंस्टेंट नूडल्स और रेडी-टू-ईट फूड ने खाने को आसान और सुविधाजनक बनाया। इसके बाद फास्ट फूड और ऑनलाइन डिलीवरी ने बाहर के खाने की पहुंच और बढ़ा दी। स्वाद और सुविधा के साथ ऐसे भोजन की मात्रा बढ़ी, जिनमें अक्सर ज्यादा नमक, चीनी या कैलोरी हो सकती है।

Gen Z: अब प्लेट में प्रोटीन और फाइबर

आज की युवा पीढ़ी भोजन को सिर्फ स्वाद से नहीं देख रही। फिटनेस और हेल्थ को लेकर बढ़ती जागरूकता के कारण प्रोटीन, फाइबर, कैलोरी और शुगर जैसे फैक्टर्स भी खाने के फैसले में शामिल हो रहे हैं। प्रोटीन रिच फूड, दालें, पनीर, अंडे, दही, नट्स और सीड्स जैसे विकल्पों पर ध्यान बढ़ा है। साथ ही सलाद, फल, सब्जियां और हाई-फाइबर फूड भी हेल्दी डाइट का हिस्सा बन रहे हैं।

 
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दादा-दादी से Gen Z तक बदली भारतीय थाली - फोटो : AI
मिलेट्स की वापसी क्यों खास?

बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मिलेट्स इसका सबसे दिलचस्प उदाहरण हैं। जो अनाज कभी पारंपरिक भोजन का हिस्सा थे, वे अब आधुनिक हेल्थ डाइट में वापस आ रहे हैं। युवा इन्हें सिर्फ पारंपरिक रोटी या दलिया के रूप में नहीं, बल्कि डोसा, चीला, खिचड़ी और दूसरे आधुनिक व्यंजनों में भी शामिल कर रहे हैं।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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