अस्थमा हमारे फेफड़ों को प्रभावित करने वाली बीमारी है जिसमें सांस लेने में कठिनाई के साथ घरघराहट जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। अस्थमा, एक क्रोनिक बीमारी है जो समय के साथ बढ़ती जाती है और इसके इलाज के साथ निरंतर बचाव के उपाय करते रहना जरूरी हो जाता है। सांस की ये समस्या किसी भी लिंग-उम्र वालों को हो सकती है।
Asthma Risk: क्या महिलाओं में ज्यादा खतरनाक होता है अस्थमा का अटैक? कैसे करें इससे बचाव
पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अस्थमा होने का खतरा दो गुना तक अधिक हो सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को इस रोग के बारे में जानने और बचाव के तरीकों का पालन करते रहने की सलाह देते हैं।
महिलाओं में अस्थमा अटैक का खतरा अधिक
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, महिलाओं में हार्मोन असंलुतन के कारण इसके कुछ लक्षण, पुरुषों की तुलना में गंभीर हो सकते हैं। युवावस्था और शुरुआती माहवारी वाले दिनों में महिलाओं में अस्थमा की समस्या होने का खतरा अधिक हो सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि टेस्टोस्टेरोन हार्मोन अस्थमा के लक्षणों से जुड़ी प्रतिरक्षा कोशिकाओं को बाधित कर सकता है जिसके कारण फेफड़ों में सूजन और बलगम का उत्पादन बढ़ जाता है।
हालांकि सभी महिलाओं में यह खतरा हो, यह जरूरी नहीं है।
एस्ट्रोजेन हार्मोन का असर
शोधकर्ताओं ने पाया टेस्टोस्टेरोन के अलावा एस्ट्रोजेन जैसे हार्मोन्स का भी वायुमार्ग पर लगभग उसी तरह का प्रभाव होता है जैसा कि एलर्जी और हे फीवर का। अस्थमा के लक्षणों को ट्रिगर करने में एस्ट्रोजेन का उतार-चढ़ाव भी जिम्मेदार है।
जॉर्जिया के मेडिकल कॉलेज में फार्माकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर, क्रिस्टियाना दिमित्रोपोलो-कैट्रावस के अनुसार एस्ट्रोजेन के स्तर में उतार-चढ़ाव उन प्रोटीन को सक्रिय कर सकता है जो इंफ्लामेटरी प्रतिक्रिया पैदा करते हैं। युवावस्था में महिलाओं में इस हार्मोन से संबंधित जटिलताएं अधिक देखी जाती रही हैं।
बचाव के उपायों को लेकर बरतें सावधानी
डॉक्टर्स के मुताबिक, अस्थमा से पीड़ित महिलाओं को मौसम में परिवर्तन के कारण होने वाली दिक्कतों और विशिष्ट एलर्जी को लेकर सतर्कता बरतनी चाहिए।
- मासिक धर्म चक्र के दौरान हार्मोन के स्तर में होने वाले बदलाव के कारण वायुमार्ग की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
- गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति के समय ये दिक्कतें और अधिक हो सकती हैं।
पुरुषों और महिलाओं में अस्थमा के लक्षण ज्यादा अलग नहीं होते हैं पर रोग की गंभीरता और इसके ट्रिगर होने का जोखिम जरूर भिन्न और गंभीर हो सकता है। सभी महिलाओं को इन जोखिमों से बचाव के उपाय करते रहना चाहिए।
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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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