एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस तेजी से उभरता बड़ा जोखिम है, जिसको लेकर कई अध्ययनों में स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंता जताते रहे हैं। एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का मतलब यह है कि जिन बैक्टीरिया को मारने के लिए उसे डिज़ाइन किया गया है, वह रोगाणु उसी दवा के साथ अभ्यस्त हो जाएं। ऐसा होने पर अगर आपको कोई छोटा संक्रमण भी होता है और इसके लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं तो उससे रोगाणु मरते नहीं हैं बल्कि और बढ़ते रहते हैं, गंभीर संक्रमण की स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। माना जाता रहा है कि एंटीबायोटिक दवाओं के अधिक उपयोग के कारण यह जोखिम काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है।
Air Pollution: वायु प्रदूषण नहीं हुआ कंट्रोल तो छोटे संक्रमण भी हो जाएंगे जानलेवा, जानिए क्या है इसकी वजह
वायु प्रदूषण और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस
द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने से एंटीबायोटिक प्रतिरोध को कम करने में मदद मिल सकती है। पीएम2.5 वायु प्रदूषण और एंटीबायोटिक प्रतिरोध में वृद्धि के बीच संबंध समय के साथ मजबूत होता देखा गया है। साल 2000 से 2018 तक 116 देशों के डेटा के विश्लेषण में पाया गया कि वातावरण में पीएम2.5 के स्तर में वृद्धि के कारण हाल के वर्षों में एंटीबायोटिक प्रतिरोध में बड़ी वृद्धि हुई है। जिस तरह से प्रदूषण के स्तर में वृ्द्धि जारी है, इसका खतरा समय के साथ और भी अधिक हो सकता है।
वातावरण में बढ़ रहा है PM2.5 का लेवल
गौरतलब है कि वातावरण में PM2.5 के स्रोतों में औद्योगिक प्रक्रियाएं, सड़क परिवहन और कोयला-लकड़ी जलाने को प्रमुख माना जा रहा है। पिछले शोध से संकेत मिलता है कि दुनिया की 90 प्रतिशत आबादी (करीब 7.3 अरब लोग) पीएम 2.5 स्तरों के सीधे संपर्क में हैं, जिनमें से 80 प्रतिशत निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं। इन सभी में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा हो सकता है।
क्या कहते हैं शोधकर्ता?
चीन के झेजियांग विश्वविद्यालय के प्रमुख शोधकर्ता और लेखक प्रोफेसर होंग चेन कहते हैं, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस पर चर्चा करना इसलिए भी बहुत आवश्यक हो जाता है क्योंकि वैश्विक स्तर कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। हमारे दैनिक जीवन में कई स्रोत हैं जो वायुमंडल में पीएम 2.5 के बढ़ने का कारण हो सकते हैं।
वैसे तो अब तक वायु प्रदूषण और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को स्थापित करने के लिए कोई पुख्ता सबूत नहीं है, लेकिन अध्ययनों में इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने से इसमें लाभ मिल सकता है।
क्या हैं अध्ययन का निष्कर्ष?
अध्ययन के निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि पीएम2.5 के साथ एंटीबायोटिक प्रतिरोध बढ़ता है, वायु प्रदूषण में प्रत्येक 1% की वृद्धि रोगजनको के आधार पर एंटीबायोटिक प्रतिरोध में 0.5 से लेकर 1.9% की वृद्धि कर सकती है। समय के साथ यह संबंध मजबूत हुआ है, पीएम 2.5 के स्तर में बदलाव के कारण हाल के वर्षों में एंटीबायोटिक प्रतिरोध में बड़ी वृद्धि हुई है।
अध्ययन के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि वायु प्रदूषण से उत्पन्न एंटीबायोटिक प्रतिरोध के कारण साल 2018 में अनुमानित 480,000 असामयिक मौतें हुई हैं, भविष्य में इसका खतरा और अधिक हो सकता है।
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स्रोत और संदर्भ
Association between particulate matter (PM)2·5 air pollution and clinical antibiotic resistance: a global analysis
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