राजधानी दिल्ली-एनसीआर में वायु की गुणवत्ता का लगातार खराब होते जाना गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। शुक्रवार (3 नवंबर) को राष्ट्रीय राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 400 से अधिक दर्ज किया गया, नोएडा में यह 460 से भी अधिक बना हुआ है। 300 से अधिक की एक्यूआई को बहुत खराब माना जाता है, जिसके कारण कई गंभीर रोगों का खतरा हो सकता है, यह उससे भी 170 अंक अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की जहरीली हवा के संपर्क में रहना कई जानलेवा बीमारियों के जोखिम को बढ़ाने वाला हो सकता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए ऐसी हवा कई प्रकार की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
Delhi Air Pollution: AQI 400 के पार, यह बेहद गंभीर और जानलेवा, बचाव के लिए जानिए क्या करें-क्या नहीं?
450 की एक्यूआई साबित हो सकती है 'जानलेवा'
अमर उजाला से बातचीत में ग्रेटर नोएडा स्थित अस्पताल में इंटेंसिव केयर के डॉ प्रभात रंजन कहते हैं, यह हेल्थ इमरजेंसी वाली स्थिति है, प्रदूषण का ऐसा स्तर बेहद गंभीर और चिंताकारक है, इसके कारण कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों के विकसित होने का खतरा हो सकता है। उच्च वायु प्रदूषण का स्तर, हृदय और श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ा रही है, कुछ स्थितियों में ये जानलेवा तक हो सकती है। प्रदूषण के कारण हृदय और फेफड़ों को शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
हवा में प्रदूषकों की बढ़ती उपस्थिति प्रारंभिक स्थितियों में थकान, गले में खराश, खांसी, सिरदर्द, आंखों में जलन या त्वचा पर लाल चकत्ते जैसी समस्याओं के अलावा दीर्घकालिक रूप से छाती की गंभीर बीमारियों और फेफड़ों के कैंसर का कारण भी बन सकती है। फिलहाल इस समस्या से बचाव के लिए सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। बच्चे और बुजुर्गों को इससे खास सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
प्रदूषण से बचाव के लिए क्या करें?
प्रदूषण के बढ़ते इस खतरे से बचाव के लिए सभी लोगों को कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।
- प्रदूषण से बचाव के लिए जितना हो सके घर के भीतर ही रहें, अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें।
- जब भी बाहर जाएं तो मास्क पहनें। एन-95 मास्क प्रदूषण के खतरे से बचाने में मददगार माने जाते हैं।
- घर और दफ्तरों में हवा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए वायु को शुद्ध करने वाले पौधे या उपकरण लगाएं।
- शरीर को हाइड्रेटेड रखें। शरीर से विषाक्त पदार्थों और हानिकारक कणों को बाहर निकालने के लिए अधिक पानी (गुनगुना पानी) पिएं।
- सड़क पर चलने वाले वाहनों की संख्या को कम करने के लिए कारपूलिंग, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें।
- बॉडी डिटॉक्स और प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एंटीऑक्सीडेंट्स और पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करें।
इस तरह की गलतियां बढ़ा सकती हैं खतरा
प्रदूषण से होने वाले जोखिमों से बचाव के लिए ऐसी गलतियां करने से बचें।
- फिलहाल बाहरी गतिविधियों जैसे बाहर व्यायाम, वॉक आदि से बचें, सुबह के समय घर में ही व्यायाम करें।
- कचरा, प्लास्टिक और अन्य फेंके गए सामानों को न जलाएं।
- धुएं या स्मॉग वाले क्षेत्रों में जाने से बचें।
- धूम्रपान शारीरिक जटिलताओं को बढ़ा देते हैं, इससे बचाव करें।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वायु प्रदूषण का मौजूदा खतरनाक स्तर के कुछ दिनों में कम होने की संभावना है, पर अभी इसके संपर्क में आना सभी लोगों के लिए नुकसानदायक है। इसे सिर्फ फेफड़ों की बीमारियों के खतरे तक ही सीमित करके न देखें, इसके कारण अध्ययनों में न्यूरोलॉजिकल और मानसिक रोगों के जोखिम भी देखे गए हैं। प्रदूषण के संपर्क में रहना हर स्तर पर नुकसानदायक है। उचित सावधानी बरतना महत्वपूर्ण है, खुद प्रदूषण से बचें और प्रदूषण को नियंत्रित करने में अपना योगदान दें।
----------------
नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।